सीमा पर सख्त हुआ भारत तो PAK ने अमेरिका से लगाई दखल की गुहार…

सीमा पर आतंकियों के खिलाफ भारतीय सेना की कार्रवाई से पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है. पाकिस्तान ने सोमवार को ही अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए भारत के उप उच्चायुक्त को तलब किया था. साथ ही नेशनल असेंबली में भी भारत के रुख पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने अमेरिका से दखल की गुहार लगाई है.सीमा पर सख्त हुआ भारत तो PAK ने अमेरिका से लगाई दखल की गुहार...

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री खुर्रम दस्तगीर खान ने कहा है कि अमेरिका पाकिस्तान को आश्वस्त करने की कोशिश कर रहा है कि भारत उसके लिए खतरा नहीं है और इस्लामाबाद को नई दिल्ली के प्रति अपने रणनीतिक रूख में बदलाव लाना चाहिए.

US से गलतफहमी हों दूर

रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ सौहार्दपूर्ण लेकिन पूरी तरह बिना छलावे की बातचीत की जरूरत है जिसमें हर चीज सामने हो. उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य इस्लामाबाद और वॉशिंगटन के बीच गलतफहमियों को दूर करना है.

डॉन अखबार ने खबर दी है कि नेशनल असेंबली में सोमवार को सरकार की विदेश नीति और पाकिस्तान की सुरक्षा स्थिति की जानकारी देते हुए उन्होंने दुख जताया कि नियंत्रण रेखा और अस्थायी सीमा पर भारत के आक्रामक रूख को अमेरिका तवज्जो नहीं दे रहा है.

रक्षा मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान और अमेरिका के बीच मूल अंतर भारत के बारे में विचार को लेकर है. रक्षा मंत्री ने कहा, ‘वक्त आ गया है कि पाकिस्तान और अमेरिका के बीच सौहार्द्रपूर्ण लेकिन पूरी तरह से निष्कपट वार्ता हो और हर चीज वार्ता की मेज पर हो.’ 

भारत को बताया दुश्मन

खान ने कहा कि वॉशिंगटन पाकिस्तान को विश्वास दिलाने का प्रयास कर रहा है कि भारत खतरा नहीं है और इसलिए इस्लामाबाद को अपने रणनीतिक रूख में बदलाव करना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया, ‘लेकिन हकीकत हकीकत है, भारत की क्षमता और मंशा दोनों पाकिस्तान के प्रति शत्रुतापूर्ण हैं.’

खान ने आरोप लगाए कि भारत ने ‘पाकिस्तान की सीमा के साथ सेना, साजो-सामान और हथियार सब कुछ इकट्ठा कर रखा है.’ उन्होंने कहा कि नियंत्रण रेखा पर उल्लंघन और और नागरिकों की हत्या के मामले में 2017 सबसे खतरनाक वर्ष रहा.’

पाक रक्षा मंत्री ने मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान को कुर्बानी का बकरा बनाया जा रहा है क्योंकि अमेरिका अफगानिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ युद्ध नहीं जीत पा रहा है. उन्होंने अमेरिका से आग्रह किया कि पाकिस्तान और इसके लोगों के बलिदान को याद करे जिन्होंने 2001 के बाद से आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में योगदान किया है.

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