सुंदरता और स्वास्थ दोनों को संवारती है पायल,जानिए..

आज के फैशन में पायल का अपना एक अलग स्थान है. पायल या पाजेब महिलाओं के श्रृंगार का भिन्न अंग है. बिना पायल के किसी भी स्त्री का श्रृंगार अधूरा रहता है. सोलह श्रृंगार में शामिल पायल का अपना अलग ही महत्व है. पायल की छन – छन की आवाज़ सभी को अपनी ओर आकर्षित करती है. पायल से पैरों की सुंदरता में चार चाँद लग जाते हैं. पायल मात्र सुंदरता ही नहीं बढ़ाती बल्कि इसके कुछ स्वस्थ लाभ भी हैं. पुराने ज़माने में लोग इनसे शुभ अशुभ फल भी जोड़ते थे.सुंदरता और स्वास्थ दोनों को संवारती है पायल,जानिए..योगी आदित्यनाथ को भेजा 125 किलो का साबुन, अपनाया विरोध का अनूठा तरीका

कहते हैं कि पायल हमेशा चांदी की होना चाहिए. सोने की पायल पहनना अपशगुन माना जाता है. जहाँ प्राचीन काल में सोने की पायल को अपशगुन माना जाता था वहीँ आज स्वास्थ की दृष्टि से भी सोने की पायल पहनना गलत है. सोने की पायल पहनने से शरीर का तापमान असंतुलित हो जाता है जिससे कई रोग जन्म ले लेते हैं. आयुर्वेद के मुताबिक इंसान का सर ठंडा और पैर गर्म होने चाहिए इसलिए सिर पर सोना और पैरों में चांदी धारण करनी चाहिए.

पायल की छन – छन जहाँ पुरषो को मोहित करती है और उन्हें अपनी ओर आकर्षित करती है वहीँ दूसरी ओर वास्तु के हिसाब से पायल की आवाज़ घर की निगेटिव एनर्जी को ख़त्म करती है. इसके अलावा पैरो से संपर्क में रहने के कारण धातु के तत्व शरीर में शामिल हो जाते हैं जो शरीर और हड्डियों को मजबूती प्रदान करते हैं.

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