गांवों में पैसा पहुंचाने के लिए क्या कर रही है सरकार

सुप्रीम कोर्ट ने ग्रामीण इलाकों में नोटबंदी से हो रही परेशानी को लेकर केंद्र सरकार को फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि ग्रामीण इलाकों में रहने वाले ज्यादातर लोग सहकारी बैंकों पर निर्भर रहते हैं। नोटबंदी से ग्रामीण क्षेत्रों में जूझ रहे लोगों के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं।
 
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रामीण इलाकों में नोटबंदी से हो रही परेशानी 
अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने केंद्र सरकार का पक्ष करते हुए कहा,’सरकार को पता है कि अनुसूचित बैंकों के मुकाबले सहकारी बैंक उचित बुनियादी ढांचे और व्यवस्था की कमी से जूझ रहे हैं।’

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नोटबंदी के विभिन्न पहलुओं को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवई करते हुए चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर और डी वाई चंद्रचूढ़ की बैंच ने कहा कि याचिका दायर करने वाले सभी पक्षों को एक साथ बैठकर एक सूची बनानी चाहिए जिससे यह तय हो सके कि किस पहलु की सुनवाई हाईकोर्ट में होगी और किस पहलु की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी, यह निश्चित हो जाए।

मुकुल रोहतगी ने कहा कि केंद्र ने जो अतिरिक्त हलफनामा दिया है वे सहकारी बैंकों की स्थिति को लेकर ही है। ऐसा नहीं है कि हमें स्थिति की जानकारी नहीं है लेकिन सहकारी बैंकों में उचित बुनियादी ढांचे और व्यवस्था की कमी है। 

अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सरकार ने नोटबंदी के बाद सहकारी बैंकों को जान बूझकर इससे बाहर रखा है, क्योंकि नकली नोटों का पता लगाने के लिए इन बैंकों के पास व्यवस्था नहीं है

एक साथ हो सारे मामलों की सुनवाई

 
उन्होंने नोटबंदी के विभिन्न पहलुओं को लेकर देश के अलग-अलग राज्यों के हाईकोर्ट में दायर होने वाले मामलों पर कहा,’ एक साथ केरला, कोलकाता, जयपुर और मुंबई में दायर किए मामलों से एक साथ नहीं निपटा जा सकता इसलिए इनकी सुनवाई  किसी एक हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में होने चाहिए।’

वरिष्ठ वकील पी चिदंबरम ने सहकारी बैंकों का पक्ष रखते हुए कहा कि नोटबंदी के बाद से ग्राामीण इलाकों के सहकारी बैंकों को शामिल न करने से गांव की अर्थव्यवस्थ चरमरा गई है।

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वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने एक याचिकाकर्ती का पक्ष रखते हुए कहा कि सब एक साथ बैठकर एक सूची बनाकर सोमवार को सौंपेंगे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मसले पर अगली सुनवाई 5 दिसंबर को होगी।

 
 

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