सुप्रीम संग्राम सुलझाने आगे आया बार काउंसिल, सात सदस्यों की टीम बनाई

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और उसके चार जजों के बीच पैदा हुई मतभेदों की खाई को पाटने की कोशिशें तेज हो गई हैं। शनिवार को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) की अलग-अलग बैठकों में इसे सुलझाने की दिशा में कई कदम उठाए गए।सुप्रीम संग्राम सुलझाने आगे आया बार काउंसिल, सात सदस्यों की टीम बनाईएससीबीए के अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि उनकी बैठक में पारित प्रस्ताव में तय किया गया कि चार जजों द्वारा उठाए गए मुद्दे गंभीर हैं और उन्हें बार द्वारा तत्काल सुलझाया जाना चाहिए।

दूसरे प्रस्ताव में कहा गया है कि जनहित याचिका (पीआईएल) को चीफ जस्टिस को ही डील करना चाहिए या उसे पांच जजों के कोलेजियम को ही भेजा जाना चाहिए। यहां तक कि 15 जनवरी के लिए सूचीबद्ध पीआईएल के मामले में भी इसका पालन किया जाए। शीर्ष अदालत की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए ऐसा करना जरूरी है।

पूर्ण पीठ करे विचार
सिंह ने बताया कि मुद्दों को हल करने के लिए एससीबीए की पहली बैठक चीफ जस्टिस के साथ होगी। अगर वे सहमत बार के दृष्टिकोण से सहमत होते हैं तो अन्य जजों से भी मुलाकात का समय लिया जाएगा। बार का मानना है कि जजों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट की पूर्ण पीठ को विचार करना चाहिए।

बीसीआई ने बनाई सात सदस्यों की टीम
उधर, इस मुद्दे पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया की भी बैठक में दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता करने के लिए सात सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल का गठन करने का फैसला किया गया। यह डेलीगेशन रविवार को चीफ जस्टिस एवं माननीय जजों से मुलाकात करेगा। बीसीआई के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि हम चाहते हैं कि इसका जल्द से जल्द समाधान हो।

हमने राहुल को दिया मौका

हमने राहुल गांधी और राजनीतिक दलों को न्यायपालिका के बारे में बात करने का मौका दिया है। यह सचमुच में अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। इस मुद्दे के राजनीतिकरण की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, ‘बार काउंसिल की तरफ से हम सभी राजनीतिक दलों से अनुरोध करते हैं कि अब भविष्य में वे इस मामले में संयम बरतें।

हम नहीं चाहते हैं कि न्यायपालिका की छवि पर धब्बा लगे। लोगों का न्यायपालिका में दृढ़ विश्वास है।’ मिश्रा ने कहा कि हम सरकार के उस रुख का स्वागत करते हैं जिसमें उसने कहा है कि यह न्यायपालिका का आंतरिक मसला है।

जल्द फाइनल किया जाए एमओपी
जहां तक मेमोरेंडम ऑफ प्रॉसिजर का सवाल है तो इसे जल्द से जल्द उचित तरीके से अंतिम रूप दिया जाना चाहिए। हम इस संबंध में केंद्र सरकार को भी पत्र भेजेंगे, लेकिन यह इतना बड़ा मसला नहीं है जिसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। बीसीआई ने कहा कि जजों को चीफ जस्टिस से लेकर अपने मतभेदों पर प्रेस कांफ्रेंस नहीं करनी चाहिए थी। 

जजों ने कहा, कोई अनुशासन नहीं तोड़ा   
चीफ जस्टिस के खिलाफ बगावत करने वाले चार जजों में शामिल जस्टिस कुरियन जोसेफ ने भरोसा जताया कि उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों का समाधान हो जाएगा। हमने सिर्फ न्यायपालिका में जनता का भरोसा बढ़ाने के लिए यह काम किया है।।

अनुशासन तोड़ने के आरोपों को खारिज करते हुए उम्मीद जताई कि चीफ जस्टिस के साथ मतभेदों को सार्वजनिक करने के उनके फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट के प्रशासन में ज्यादा पारदर्शिता आएगी।  शुक्रवार की विस्फोटक प्रेस कांफ्रेंस के बाद केरल के कोच्चि के निकट अपने पैतृक गांव पहुंचे जस्टिस जोसेफ मीडिया कर्मियों के सवालों के जवाब दे रहे थे।

बाहरी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं
जस्टिस जोसेफ ने कहा कि इस मामले में बाहरी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट स्वयं इसे सुलझा लेगा। हम इस मामले को लेकर राष्ट्रपति के पास इसलिए नहीं गए क्योंकि इस संबंध में उनकी कोई संवैधानिक जिम्मेदारी नहीं है।

कोई संकट नहीं

जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि उनके द्वारा उठाए मुद्दों के कारण कोई संकट नहीं है। पूर्वी क्षेत्र की राज्य विधिक सेवाओं की बैठक में शामिल होने कोलकाता पहुंचे जस्टिस गोगोई से जब यह पूछा गया कि क्या उन लोगों ने अनुशासन का उल्लंघन किया है, तो उन्होंने इसका कोई जवाब नहीं दिया और कहा कि उन्हें लखनऊ की फ्लाइट पकड़नी है। इसलिए वे कोई बात नहीं कर सकते।

चीफ जस्टिस के आवास से बैरंग लौटे पीएम के प्रधान सचिव
नई दिल्ली। शनिवार सुबह टीवी चैनलों ने प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के आवास जाते दिखाया। बहरहाल, कुछ देर तक इंतजार करने के बाद जब उनके आवास का गेट नहीं खुला तो वे वापस चले गए। 

यशवंत ने आग में डाला घी
अपनी पार्टी भाजपा की एकाधिक मौकों पर किरकिरी करा चुके पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने जजों की बगावत से पैदा हुई आग में घी डालते हुए कहा कि उन जजों की तरह ही पार्टी के सदस्यों और कैबिनेट मंत्रियों को भी डर से उबरते हुए लोकतंत्र के लिए खुलकर अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए।

दूसरे दिन भी चीफ जस्टिस शांत
न्यायपालिका में शुक्रवार को आए ‘भूचाल’ के बाद से अब तक चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है। चीफ जस्टिस पूरे दिन अपने आवास पर रहे और उन्होंने किसी से मुलाकात नहीं की। चर्चा है कि सोमवार को वे चारों जजों से मुलाकात करेंगे।

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