सुषमा का मंगोलिया दौरा होगा बेहद ख़ास, ये बड़ी वजह

भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज 25 और 26 अप्रैल को मंगोलिया का दौरा करेंगी, इससे पहले  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2015 में इस मुल्क के दौरे पर जा चुके हैं, उसी सिलसिले को आगे बढ़ने के लिए सुषमा भी मंगोलिया जाकर वहां के विदेश मंत्री डैमडिन सोगतबातर के साथ भारत-मंगोलिया की संयुक्त सलाहकार समिति के छठे दौर की बैठक की सह-अध्यक्षता करेंगी.मंगोलिया: भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज 25 और 26 अप्रैल को मंगोलिया का दौरा करेंगी, इससे पहले  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2015 में इस मुल्क के दौरे पर जा चुके हैं, उसी सिलसिले को आगे बढ़ने के लिए सुषमा भी मंगोलिया जाकर वहां के विदेश मंत्री डैमडिन सोगतबातर के साथ भारत-मंगोलिया की संयुक्त सलाहकार समिति के छठे दौर की बैठक की सह-अध्यक्षता करेंगी.  गौरतलब है कि भारत और मंगोलिया ने पीएम मोदी के मंगोलिया दौरे के दौरान सामारिक साझेदारी के लिए संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए थे. उस वक़्त पीएम मोदी ने मंगोलिया के विकास के लिए 1 अरब डॉलर बतौर कर्ज देने का एलान किया था, जिसका उपयोग मंगोलिया आयल रिफाइनरी बनाने में कर रहा है. दोनों देश के विदेश मंत्रियों के बीच मंगोलिया में चल रही परियोजनाओं पर चर्चा की जाएगी.  आपको बता दें कि 2015 में जब पीएम मोदी ने मंगोलिया का दौरा किया था, उसी साल भारत-मंगोलिया के कूटनीतिक रिश्तों की 60वीं वर्षगांठ भी थी. इससे पहले मात्र सोवियत संघ ऐसा देश था जिसने मंगोलिया के साथ कूटनीतिक रिश्ते स्थापित किए थे. इस घटनाक्रम के कुछ साल बाद भारत ने संयुक्त राष्ट्र में मंगोलिया की सदस्यता का समर्थन किया, जबकि चीन और ताइवान इसके खिलाफ थे.दोनों देशों के बीच तमाम दूरी के बावजूद मंगोलिया की तरफ से भारत को 'तीसरे पड़ोसी' के अलावा 'आध्यात्मिक पड़ोसी' भी माना जाता है.

गौरतलब है कि भारत और मंगोलिया ने पीएम मोदी के मंगोलिया दौरे के दौरान सामारिक साझेदारी के लिए संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए थे. उस वक़्त पीएम मोदी ने मंगोलिया के विकास के लिए 1 अरब डॉलर बतौर कर्ज देने का एलान किया था, जिसका उपयोग मंगोलिया आयल रिफाइनरी बनाने में कर रहा है. दोनों देश के विदेश मंत्रियों के बीच मंगोलिया में चल रही परियोजनाओं पर चर्चा की जाएगी.

आपको बता दें कि 2015 में जब पीएम मोदी ने मंगोलिया का दौरा किया था, उसी साल भारत-मंगोलिया के कूटनीतिक रिश्तों की 60वीं वर्षगांठ भी थी. इससे पहले मात्र सोवियत संघ ऐसा देश था जिसने मंगोलिया के साथ कूटनीतिक रिश्ते स्थापित किए थे. इस घटनाक्रम के कुछ साल बाद भारत ने संयुक्त राष्ट्र में मंगोलिया की सदस्यता का समर्थन किया, जबकि चीन और ताइवान इसके खिलाफ थे.दोनों देशों के बीच तमाम दूरी के बावजूद मंगोलिया की तरफ से भारत को ‘तीसरे पड़ोसी’ के अलावा ‘आध्यात्मिक पड़ोसी’ भी माना जाता है.

You May Also Like

English News