आखिकार सुषमा ने संसद में किया खुलासा, कि आखिर क्यों लिया चीन से पंगा

सिक्किम सीमा पर चीन के साथ जारी टकराव को लेकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने गुरुवार को संसद में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने राज्यसभा में बताया कि आखिर भारत को किन परिस्थितियों में चीन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाना पड़ा। बता दें कि महीने भर से ज्यादा वक्त से डोकलाम में भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने हैं। इस मामले का अभी तक कोई हल निकलता नजर नहीं आ रहा। 

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विदेश मंत्री से पहला सवाल कांग्रेस सांसद छाया वर्मा ने पूछा। छाया ने पूछा कि क्या चीन ने हिंद महासागर में अपनी पनडुब्बियों को तैनात किया है और क्या वह भारत की घेराबंदी कर रहा है? इस मामले में सरकार क्या कर रही है? सुषमा ने हिंद महासागर में चीन के भारत को घेरने पर कहा कि ऐसी खबरें आई थीं चीन समुद्री ताकत बनना चाहता है। इसके लिए उसने समुद्री सीमाओं के आसपास सक्रियता बढ़ाई है, लेकिन भारत अपनी सुरक्षा के बारे में बहुत चौकन्ना है, इसलिए उसे कोई घेर नहीं सकता। सुषमा ने बताया कि भारत की स्थिति दक्षिण चीन सागर के बारे में बिल्कुल साफ है। वहां फ्रीडम ऑफ नेविगशन होनी चाहिए। किसी तरह से व्यापार को बाधित नहीं बनाना चाहिए। 

समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश अग्रवाल ने विदेश मंत्री से सवाल किया कि चीन और भारत के बीच मौजूदा तनाव का कारण क्या है और चीन की क्या -क्या मांगें हैं? उन्होंने पूछा कि चीन क्या-क्या विरोध कर रहा है और भारत का इस पर क्या जवाब है? दुनिया के कौन-कौन से देश भारत के साथ इस मुद्दे पर खड़े हैं? 

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सिक्किम सीमा पर हुए ताजा विवाद के बारे में जानकारी देते हुए सुषमा ने कहा कि भारत और चीन के अलावा चीन और भूटान के बीच सीमा तय होनी है। भारत ने इस मामले के हल के लिए प्रतिनिधि तय किए हैं। विदेश मंत्री के मुताबिक, सीमा तय किए जाने का मामला देशों को आपस में सुलझाना होता है, लेकिन एक जगह ऐसी थी, जिसे ट्राइजंक्शन कहते हैं। इसे लेकर 2012 में समझौता हुआ था कि भारत, चीन और थर्ड कंट्री यानी कि भूटान मिलकर सीमा तय करेंगे। विदेश मंत्री के मुताबिक, इसके बाद, चीन बीच-बीच में इस क्षेत्र में आता रहा और उसकी हल्की-फुल्की गतिविधियां जारी रहीं। हालांकि, इस बार चीनी सेना बुलडोजर और भारी साजो-सामान लेकर पहुंच गई।

विदेश मंत्री ने बताया कि इस बार चीन चाहता था कि ट्राइजंक्शन को लेकर ‘स्टेटस क्वो’ यानी यथापूर्व स्थिति खत्म हो जाए। सुषमा ने कहा कि ट्राइजंक्शन पॉइंट में चीन की दखल होते ही भारत के हित इस मामले से सीधे तौर पर जुड़ गए। अगर चीन यहां की यथापूर्व स्थिति को बदल देता तो हमारी सुरक्षा खतरे में पड़ जाती। चीनी सेना से आमना-सामना पर सुषमा ने कहा कि अगर बातचीत के लिए दोनों देशों द्वारा सेनाएं पीछे हटाने की शर्त रखी गई तो इसमें कुछ भी गलत नहीं था। विदेश मंत्री के मुताबिक, भारत की ओर से इस मामले में कोई भी गैर वाजिब कदम नहीं उठाया गया है और भूटान समेत सभी देश उसके रुख के साथ खड़े हैं। 

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