सुसाइड की एक और कोशिश, जिम्मेदार लोगों को हरीश रावत की क्लीन चिट?

जहर खाने वाले प्रकाश पांडे की मौत ने जहां एक तरफ प्रदेश की दोनों ही राजनैतिक पार्टियों को अपनी सियासत चमकाने का मौका दे दिया है, वहीं दूसरी ओर प्रकाश पांडे की मौत का बहाना लेकर अब प्रदेश के खनन माफियां भी त्रिवेंद्र सरकार को धमकाने के लिए प्रकाश पांडे की राह चल आत्महत्या करने कोशिश करने में लगे हैं.सुसाइड की एक और कोशिश, जिम्मेदार लोगों को हरीश रावत की क्लीन चिट?

प्रकाश पांडे ने तो मजबूर होकर जहर खाया और अपनी जिंदगी खत्म कर ली, मगर उसकी मौत का बहाना अब त्रिवेंद्र सिंह रावत को धमकी देने के लिए हथियार बनता जा रहा है.

खनन व्यापारी ने की आत्महत्या करने की कोशिश, 7 और लोगों ने दी धमकी

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में गुरुवार को एक ऐसा मामला सामने आया जहां एक और खनन व्यापारी ने आत्महत्या करने कोशिश की, हालंकि सही समय पर पुलिस के द्वारा उसकी इस कोशिश को विफल कर उसे हिरासत में ले लिया और संबंधित धाराओं में उस पर मुकदमा दर्ज करने की तैयारी चल रही है.

रामनगर का रहने वाला ये निवासी गुरुवार दोपहर के वक्त सीधे प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सरकारी आवास पहुंच गया. यहां वो खुद को जलाने की तैयारी के साथ पंहुचा था, मगर समय रहते पुलिस द्वारा उसकी पहचान कर उसे ऐसा करने से रोक दिया गया. ये व्यक्ति देहरादून इसलिए पंहुचा था क्योंकि नैनीताल जिले की कोसी नदी में ये खनन कर चुगान करना चाहता था, जिसकी इजाजत सरकार  द्वारा इसको नहीं मिली थी.

संजय बिष्ट नामक ये व्यक्ति इस कदम को उठाने से पहले ही अपने द्वारा रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो को वायरल कर चुका था, जिसकी वजह से पुलिस तंत्र के साथ ही प्रदेश का खुफिया तंत्र भी लगातार नजरे बनाये हुए था, शायद यही कारण रहा कि एक और जान जाने से बच सकी. फिलहाल पुलिस के शहर कप्तान प्रदीप राय के द्वारा संजय बिष्ट से पूछताछ की जा रही है.

ऐसा ही सिलसिला अब लगातार जारी है. मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार ने बाकायदा सरकारी मेल जारी कर इसकी सूचना दी जिसमें साफ तौर पर लिखा है कि 7 और लोगों ने मुख्यमंत्री को आत्महत्या करने की धमकी दी है, अगर ऐसा ही होता रहा तो ये राज्य के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं.

फर्जी तरीके से मदद करना ठीक है: हरीश रावत 

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी राजनीति कर इस मुद्दे को भुनाने में कोई चूक नहीं की, मगर पक्ष और विपक्ष दोनों का ही समर्थन कर उन्होंने ये बात साफ कर दी कि उनके लिए प्रकाश पांडे की मौत सिर्फ एक मुद्दा भर है.

प्रकाश पांडे का वीडियो जिसमें उन्होंने मरने से पहले ये बताया कि किस तरह से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के OSD उर्बा दत्त भट्ट ने उन्हें फर्जी कागजात पेशकर, फर्जी तरीके से 30 हजार तक की मदद करने का आश्वाशन दिया था, जो कि एक अपराध था. लेकिन हरीश रावत ने आजतक से बात करते हुए सरकार के OSD को क्लीनचिट देते हुए कहा की कम से कम फर्जी तरीके से ही सही उसने मृतक की मदद करने की कोशिश तो की.

इसके साथ ही उन्होंने अपनी ही पार्टी की वरिष्ठ नेता और सदन में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहीं इंदिरा हृदयेश को भी क्लीनचिट दे दी, लेकिन प्रकाश पांडे पर राजनीति कर रहे हरीश रावत शायद ये भूल गए कि मृतक ने मरने पहले ये भी साफ कर दिया था कि उनका संदेश इंदिरा हृदयेश तक भी पंहुचा दिया जाए. तो क्या वो आने से पहले इंदिरा हृदयेश से मिलकर आया था? क्या इंदिरा हृदयेश के द्वारा उसको आत्महत्या के लिए उकसाया गया था? क्या उसके इस कदम की पहले से ही जानकारी इंदिरा हृदयेश को थी? अगर ये सही है तो पक्ष और विपक्ष दोनों ही कटघरे में खड़े हैं.

त्रिवेंद्र सरकार के लिए चुनौती

अब सवाल उत्तराखंड के मुख़्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के लिए है, क्योंकि उनके द्वारा आयोजित जनता दरबार में ही एक व्यक्ति ने अपनी जान दे दी और उसको उकसाने वाले उसके द्वारा इस कदम को बढ़ाने वाले राजनीती कर रहे हैं. जिसके लिए त्रिवेंद्र सिंह रावत को सभी अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुंचाने की जरूरत है, नहीं तो सरकार के लिए अभी ये केवल शुरुआत भर है. कही ऐसा ना हो कि त्रिवेंद्र सिंह रावत के लिए मुश्किलें और भी बढ़ जाएं.

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