सूरत: 24 करोड़ की इस अंगूठी में जड़े हैं 6690 हीरे, गिनीज बुक में शामिल

हीरा नगरी सूरत का नाम एक बार फिर से गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में शामिल हुआ है. इस बार रिकॉर्ड की वजह शहर के एक हीरा कारोबारी द्वारा 6690 हीरा जड़ित अंगूठी बनी है, जिसकी कीमत तक़रीबन 24 करोड़ रुपये है.हीरा नगरी सूरत का नाम एक बार फिर से गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में शामिल हुआ है. इस बार रिकॉर्ड की वजह शहर के एक हीरा कारोबारी द्वारा 6690 हीरा जड़ित अंगूठी बनी है, जिसकी कीमत तक़रीबन 24 करोड़ रुपये है.  सूरत के हीरा कारोबारी विशाल अग्रवाल की मानें तो मेक इन इंडिया को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के मुख्य मकसद से यह अंगूठी बनाई गई है. इसकी डिजाइन विशाल की पत्नी खुशबु अग्रवाल ने की है. इस लोटस अंगूठी को तैयार करने में 20 कारीगर लगे थे.  हीरे में कमल के फूल का डिजाइन को बानाने के लिए सबसे पहले कम्प्यूटर मॉडल बनाया गया. इसके बाद रिंग का कॉन्सेप्टयुलाइजेशन किया गया. फिर फाइनल डिजाइन तैयार होने पर इसे तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई. पूरे एक साल बाद यह अंगूठी बन कर तैयार हुई. इसमें खास बात यह है कि ये 18 कैरेट रोज गोल्ड और 24 फीसदी अलॉय से बनाई गई है. यह 58.176 ग्राम वजन की यानी अंदाजन 6 तोला सोने की बनी है.  इस अंगूठी को बनाने वाले व्यापारी विशाल अग्रवाल का कहना है कि जब वह विदेश जाते थे तो वहां वह आउट ऑफ द बॉक्स डिजाइन ज्वैलरी को देखते थे, तब ही ख्याल आया कि मेड इन इंडिया डिजाइन भी कुछ ऐसा होना चाहिए. जिसके बाद इस पर काम करना शुरू किया गया.

सूरत के हीरा कारोबारी विशाल अग्रवाल की मानें तो मेक इन इंडिया को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के मुख्य मकसद से यह अंगूठी बनाई गई है. इसकी डिजाइन विशाल की पत्नी खुशबु अग्रवाल ने की है. इस लोटस अंगूठी को तैयार करने में 20 कारीगर लगे थे.

हीरे में कमल के फूल का डिजाइन को बानाने के लिए सबसे पहले कम्प्यूटर मॉडल बनाया गया. इसके बाद रिंग का कॉन्सेप्टयुलाइजेशन किया गया. फिर फाइनल डिजाइन तैयार होने पर इसे तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई. पूरे एक साल बाद यह अंगूठी बन कर तैयार हुई. इसमें खास बात यह है कि ये 18 कैरेट रोज गोल्ड और 24 फीसदी अलॉय से बनाई गई है. यह 58.176 ग्राम वजन की यानी अंदाजन 6 तोला सोने की बनी है.

इस अंगूठी को बनाने वाले व्यापारी विशाल अग्रवाल का कहना है कि जब वह विदेश जाते थे तो वहां वह आउट ऑफ द बॉक्स डिजाइन ज्वैलरी को देखते थे, तब ही ख्याल आया कि मेड इन इंडिया डिजाइन भी कुछ ऐसा होना चाहिए. जिसके बाद इस पर काम करना शुरू किया गया.

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