सूर्यदेव को जल अर्पित करते समय रखें खास बातों का ध्यान

जीवन में सफल होने के लिए और धन कमाने के लिए हम कई देवी देव का पूजन करते हैं और उनसे अपने लिए वरदान भी मांगते हैं. जैसे देवी लक्ष्मी को प्रसन्न किया जाता है वैसे ही धन के लिए और अपार सफलता के लिए सूर्यदेव को भी प्रसन्न किया जाता है. आज हम आपको बताते हैं कैसे प्रसन्न किया जा सकता है सूर्य देव को. सूर्यदेव को प्रसन्न कर आप अपनी कुंडली के दोष भी हटा सकते हैं. अगर सूर्यदेव आपकी कुंडली में विराजमान है और रुष्ट हैं तो आप उन्हें कुछ इन उपायों से मना सकते हैं.* सूर्यदेव को हमेशा तांबे के लोटे से चढ़ाए जल चढ़ाएं, स्टील के लोटे से कभी ना चढ़ाएं इससे सूर्यदेव रुष्ठ होते हैं.  * इस बात का खास ध्यान रखें कि पूर्व दिशा में रखे मुख करके ही सूर्यदेव को जल चढ़ाएं.  * ब्रह्म मुहूर्त का समय सूर्यदेव को जल चढाने के लिए सबसे उचित है. इस मुहूर्त में जल अर्पित करें तो आपको कई लाभ हो सकते हैं. सुबह 8 बजे के पहले जल अर्पित कर देना चाहिए.  * जल चढ़ाते समय 'ऊं आदित्याय नम:, ऊं भास्कराय नम:' का जाप कर सकते हैं.  * चल अर्पित करते समय ध्यान रहे कि जल आपके पैरों को ना छुए. इससे बचने के लिए आप नीचे कुछ भी रख सकती हैं जिससे जल उसमें आ जाये और बाद में उसे पौधों में डाल दें.

सूर्य देव को सुबह जल तो सभी चढ़ाते हैं और अपने लिए कामना भी करते हैं लेकिन कई बार सूर्यदेव फिर भी उनसे रुष्ठ रहते हैं. इसके लिए हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे उपाय जो आपको सूर्यदेव को जल अर्पित करते हुए ध्यान में रखने होंगे. बता दें किन बातों का ध्यान रखना है आपको जल अर्पित करते हुए.

सूर्यदेव को हमेशा तांबे के लोटे से चढ़ाए जल चढ़ाएं, स्टील के लोटे से कभी ना चढ़ाएं इससे सूर्यदेव रुष्ठ होते हैं.

इस बात का खास ध्यान रखें कि पूर्व दिशा में रखे मुख करके ही सूर्यदेव को जल चढ़ाएं.

ब्रह्म मुहूर्त का समय सूर्यदेव को जल चढाने के लिए सबसे उचित है. इस मुहूर्त में जल अर्पित करें तो आपको कई लाभ हो सकते हैं. सुबह 8 बजे के पहले जल अर्पित कर देना चाहिए.

 जल चढ़ाते समय ‘ऊं आदित्याय नम:, ऊं भास्कराय नम:’ का जाप कर सकते हैं.

 चल अर्पित करते समय ध्यान रहे कि जल आपके पैरों को ना छुए. इससे बचने के लिए आप नीचे कुछ भी रख सकती हैं जिससे जल उसमें आ जाये और बाद में उसे पौधों में डाल दें.

 

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