सेना के शिविर पर फिर आतंकियों ने किया कब्जा, 150 जवानों की जान खतरे में

यहां हम PAKISTAN के आतंक से परेशान है और सीरिया में ISIS सेना की नाक में दम किए हुए है।

सेना के शिविर पर फिर आतंकियों ने किया कब्जा, 150 जवानों की जान खतरे में आतंकियों ने सीरियाई सेना के कैंप पर कब्जा करके उन्हें बंधक बना लिया है। करीब 150 सैनिकों को IS ने बंधक बना लिया है। 
अलेप्पो में तबाही
पिछले एक हफ्ते से जारी युद्धविराम टूटने के बाद सीरिया में विद्रोहियों के कब्जे वाले अलेप्पो शहर में रूस के हवाई हमलों में बड़े पैमाने पर जानमाल की तबाही हुई है। पिछले 24 घंटे में रूसी लड़ाकू विमानों ने सीरियाई सेना के साथ मिलकर 200 हमले किए, जिसमें 100 से ज्यादा लोग मारे गए।
 
बदतर हुए शहर के हालात
शहर की तस्वीरें दिल दहला देने वाली हैं। इन हमलों के बाद लोग इधर-उधर भाग रहे थे। कोई मां अपने बच्चे को कलेजे से लगाए बिलख रही थी, तो कोई पिता अपनी मासूम बेटी को मलबे में दबा मजबूर होकर देख रहा था। कुछ परिवार बचा-खुचा सामान बचाने की जद्दोजहद में थे। 
मासूमों ने गंवाई जान 
सीरिया और रूस की सेना ने मिलकर शुक्रवार और शनिवार के बीच करीब 200 बार हवाई हमले किए। हमले में ज्यादातर बेगुनाह लोग मारे गए हैं, जिनमें मासूम बच्चे भी हैं। मलबे में कई लोग दबे हुए हैं। कई घायल हुए हैं, जिससे मौत का यह आंकड़ा बढ़ने की आशंका है।
हमले में अलेप्पो और आसपास के हिस्से में वाटर सप्लाई का सिस्टम बर्बाद हो गया है। हमलों में रेस्क्यू ग्रुप ‘वाइट हेलमेट’ की टीम को भी नहीं बख्शा गया। अंसारी जिले में रेस्क्यू ग्रुप का हेडक्वार्टर क्षतिग्रस्त हो गया। इस ग्रुप की तीन एंबुलेंस और दो अस्पताल पर भी बम गिराए गए। बताया जा रहा है कि बैरल और वैक्यूम बमों से हमला किया गया था।
बच्ची का विडियो वायरल
शुक्रवार को बाब अल-नैराब में हमले के बाद मलबे से पांच साल की बच्ची को जिंदा बचाने का विडियो वायरल हुआ है। सोशल मीडिया पर पोस्ट इस विडियों में रेस्क्यू मेंबर बच्ची को बाल पकड़कर बाहर निकालते दिख रहे हैं। बच्ची की पहचान रवन अलोश के तौर पर हुई है।
इस हमले में उसकी मां, पिता और चारों भाई-बहन मारे गए। हमले की चपेट में बशकतीन शहर भी आया। यहां एक ही परिवार के 15 लोग मारे गए। दो हिस्सों में बंटा शहर2012 से सीरिया की कमर्शियल कैपिटल रहे अलेप्पो के पश्चिमी हिस्से पर सरकार और पूर्वी हिस्से पर विद्रोहियों का कब्जा है। विद्रोहियों के कब्जे वाले हिस्से में ढाई लाख लोग रह रहे हैं, जिसकी वजह से सेना के हमले में बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे जा रहे हैं।
 

 

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