सेवा दल में जान फूंकेंगे राहुल गांधी, RSS के मुकाबले की तैयारी

लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को लगातार मिल रही हार ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को चिंता में डाल दिया है. कांग्रेस को सत्ता के शिखर पर पहुंचाने के लिए उन्होंने अपने पुराने संगठन सेवा दल में नई जान फूंकने का फैसला किया है.लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को लगातार मिल रही हार ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को चिंता में डाल दिया है. कांग्रेस को सत्ता के शिखर पर पहुंचाने के लिए उन्होंने अपने पुराने संगठन सेवा दल में नई जान फूंकने का फैसला किया है.   उप्र कांग्रेस इकाई से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों का दावा है कि लोकसभा चुनाव से पहले ही सेवा दल का इस्तेमाल न केवल पार्टी का जनाधार बढ़ाने के लिए किया जाएगा, बल्कि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की एक मजबूत काट के तौर पर भी उभरेगा.   डॉ. कफील के भाई पर हमले मामले में नया मोड़, पुलिस ने कासिफ के करीबियों को पकड़ा   यूपी कांग्रेस इकाई के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने इसकी जानकारी दी. हालांकि इस पदाधिकारी ने अपना नाम जाहिर करने से मना कर दिया, लेकिन सेवा देल के विस्तार को लेकर उन्होंने विस्तार से चर्चा की.पदाधिकारी का दावा है कि राहुल गांधी मानसून सत्र के बाद अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी और अपनी मां सोनिया गांधी की संसदीय सीट रायबरेली से एक साथ इसकी शुरुआत कर सकते हैं.   सेवा दल को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुकाबले खड़ा करने की योजना   बकौल कांग्रेस पदाधिकारी, "कांग्रेस को मजबूत करने के लिए पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी कांग्रेस सेवा दल को फिर से सक्रिय करने की तैयारी में जुटे हैं. उन्होंने सेवा दल को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुकाबले खड़ा करने की योजना तैयार की है."   कांग्रेस के इस पदाधिकारी ने बताया कि जब तक कांग्रेस सेवा दल सक्रिय रहा, तब तक कांग्रेस आरएसएस की हर चाल की काट आसानी से निकाल लेती थी. कालांतर में सेवा दल लगातार कमजोर होता गया और आरएसएस मजबूत होता जा रहा है.   कांग्रेस के सूत्र भी बताते हैं कि सेवा दल का इतिहास कांग्रेस जितना ही पुराना है. इसकी कार्यशैली बिल्कुल आरएसएस की तरह ही रही है. मौजूदा समय में कांग्रेस का यह अहम संगठन मृतप्राय स्थिति में आ गया है.   हिंदुस्तान सेवा दल के नाम से हुआ था कांग्रेस सेवा दल का गठन   दरअसल, कांग्रेस सेवा दल का गठन वर्ष 1923 में हिंदुस्तान सेवा दल के नाम से हुआ था. बाद में इसे कांग्रेस सेवा दल का नाम दे दिया गया. आरएसएस की तरह ही कभी कांग्रेस सेवा दल पर भी प्रतिबंध लगा था. अंग्रेजी हुकूमत के दौरान वर्ष 1932 से लेकर 1937 तक हिंदुस्तान सेवा दल को प्रतिबंधित कर दिया गया था.   कांग्रेस के पदाधिकारी ने बताया, "आजादी के बाद सेवा दल ने कांग्रेस को आगे बढ़ाने की कोशिश की. आजादी के बाद सत्ता में काबिज कांग्रेस को आपातकाल के बाद देश के बदले माहौल में जनता पार्टी की सराकर के गठन के बाद सेवा दल की याद आई थी. इंदिरा जी ने सेवा दल को खड़ा किया. यही नहीं, खुद राजीव गांधी ने सेवा दल के शिविर में जाकर 1983 में में सात दिनों का प्रशिक्षण लिया था."   राहुल को अब सेवा दल की याद आने लगी है कांग्रेस के सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस के मुखिया राहुल को अब सेवा दल की याद आने लगी है. ऐसी अटकले हैं कि मानसून सत्र के बाद जल्द ही रायबरेली और अमेठी में सेवा दल का प्रशिक्षण शुरू होगा. इसके लिए कांग्रेस के शीर्ष स्तर पर सेवा दल के नाम पर बजट मुहैया कराने की रणनीति भी तैयार कर ली गयी है.   गोरखपुर: खाना देने में पत्नी को हुई देर तो पति ने मार दी गोली   सेवा दल को मजबूती देने के लिए लगातार हो रहा है काम उप्र में कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू के मुताबिक, "सेवा दल पार्टी का बहुत पुरान संगठन है.इससे किसी का मुकाबला नहीं है. सेवा दल को मजबूती देने के लिए लगातार काम होता रहा है. आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सभी संगठन एकसाथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरेंगे."

उप्र कांग्रेस इकाई से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों का दावा है कि लोकसभा चुनाव से पहले ही सेवा दल का इस्तेमाल न केवल पार्टी का जनाधार बढ़ाने के लिए किया जाएगा, बल्कि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की एक मजबूत काट के तौर पर भी उभरेगा.

यूपी कांग्रेस इकाई के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने इसकी जानकारी दी. हालांकि इस पदाधिकारी ने अपना नाम जाहिर करने से मना कर दिया, लेकिन सेवा देल के विस्तार को लेकर उन्होंने विस्तार से चर्चा की.पदाधिकारी का दावा है कि राहुल गांधी मानसून सत्र के बाद अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी और अपनी मां सोनिया गांधी की संसदीय सीट रायबरेली से एक साथ इसकी शुरुआत कर सकते हैं.

सेवा दल को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुकाबले खड़ा करने की योजना

बकौल कांग्रेस पदाधिकारी, “कांग्रेस को मजबूत करने के लिए पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी कांग्रेस सेवा दल को फिर से सक्रिय करने की तैयारी में जुटे हैं. उन्होंने सेवा दल को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुकाबले खड़ा करने की योजना तैयार की है.”

कांग्रेस के इस पदाधिकारी ने बताया कि जब तक कांग्रेस सेवा दल सक्रिय रहा, तब तक कांग्रेस आरएसएस की हर चाल की काट आसानी से निकाल लेती थी. कालांतर में सेवा दल लगातार कमजोर होता गया और आरएसएस मजबूत होता जा रहा है.

कांग्रेस के सूत्र भी बताते हैं कि सेवा दल का इतिहास कांग्रेस जितना ही पुराना है. इसकी कार्यशैली बिल्कुल आरएसएस की तरह ही रही है. मौजूदा समय में कांग्रेस का यह अहम संगठन मृतप्राय स्थिति में आ गया है.

हिंदुस्तान सेवा दल के नाम से हुआ था कांग्रेस सेवा दल का गठन

दरअसल, कांग्रेस सेवा दल का गठन वर्ष 1923 में हिंदुस्तान सेवा दल के नाम से हुआ था. बाद में इसे कांग्रेस सेवा दल का नाम दे दिया गया. आरएसएस की तरह ही कभी कांग्रेस सेवा दल पर भी प्रतिबंध लगा था. अंग्रेजी हुकूमत के दौरान वर्ष 1932 से लेकर 1937 तक हिंदुस्तान सेवा दल को प्रतिबंधित कर दिया गया था.

कांग्रेस के पदाधिकारी ने बताया, “आजादी के बाद सेवा दल ने कांग्रेस को आगे बढ़ाने की कोशिश की. आजादी के बाद सत्ता में काबिज कांग्रेस को आपातकाल के बाद देश के बदले माहौल में जनता पार्टी की सराकर के गठन के बाद सेवा दल की याद आई थी. इंदिरा जी ने सेवा दल को खड़ा किया. यही नहीं, खुद राजीव गांधी ने सेवा दल के शिविर में जाकर 1983 में में सात दिनों का प्रशिक्षण लिया था.”

राहुल को अब सेवा दल की याद आने लगी है
कांग्रेस के सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस के मुखिया राहुल को अब सेवा दल की याद आने लगी है. ऐसी अटकले हैं कि मानसून सत्र के बाद जल्द ही रायबरेली और अमेठी में सेवा दल का प्रशिक्षण शुरू होगा. इसके लिए कांग्रेस के शीर्ष स्तर पर सेवा दल के नाम पर बजट मुहैया कराने की रणनीति भी तैयार कर ली गयी है.

सेवा दल को मजबूती देने के लिए लगातार हो रहा है काम
उप्र में कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू के मुताबिक, “सेवा दल पार्टी का बहुत पुरान संगठन है.इससे किसी का मुकाबला नहीं है. सेवा दल को मजबूती देने के लिए लगातार काम होता रहा है. आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सभी संगठन एकसाथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरेंगे.”

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