उत्तराखंड के सीमावर्ती गांवों से हो रहे पलायन से टेंशन में भारत

पाकिस्तान के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगातार बढ़ते तनाव और हो रही घुसपैठ के बीच चीन सीमा क्षेत्र के सरहदी गांवों से लगातार हो रहे पलायन ने भारत की टेंशन और बढ़ा दी है।

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इन गांवों के ग्रामीण देश सुरक्षा के लिहाज से द्वितीय रक्षा पंक्ति का काम करते हैं। सुविधाओं के अभाव में ये ग्रामीण निचले क्षेत्रों के लिए पलायन कर रहे हैं। आलम यह है कि चीन सीमा पर स्थित अंतिम गांव नीती में वर्ष 1991 में 47 परिवार निवास करते थे। जो वर्ष 2001 में 54 हुए। अब वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार यहां अब सिर्फ 29 परिवार ही शेष बचे हुए हैं। यही स्थिति घाटी के अन्य गांवों में भी बनी हुई है।
 

इन गांवों के ग्रामीण देश सुरक्षा के लिहाज से द्वितीय रक्षा पंक्ति का काम करते हैं। सुविधाओं के अभाव में ये ग्रामीण निचले क्षेत्रों के लिए पलायन कर रहे हैं। आलम यह है कि चीन सीमा पर स्थित अंतिम गांव नीती में वर्ष 1991 में 47 परिवार निवास करते थे। जो वर्ष 2001 में 54 हुए। अब वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार यहां अब सिर्फ 29 परिवार ही शेष बचे हुए हैं। यही स्थिति घाटी के अन्य गांवों में भी बनी हुई है।
 

नीती घाटी में भोटिया जनजाति के परिवार निवास करते हैं। घाटी के ग्रामीण शीतकाल में छह माह तक जनपद के निचले क्षेत्रों में निवास करते हैं, जबकि ग्रीष्मकाल में घाटी में अपने पैतृक गांवों में लौट जाते हैं। घाटी में बुनियादी सुविधाओं के अभाव के चलते अब कई परिवार सरहदी गांवों में लौटने के बजाय निचले क्षेत्र में ही अपना कारोबार करने लगे हैं।
 

नीती घाटी के 28 वर्षीय मनोज सिंह, कमल सिंह और देव सिंह का कहना है कि नीती घाटी में स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार, सड़क का बुरा हाल है। बुखार की दवाई के लिए भी ग्रामीणों को साठ किमी की दूरी तय कर जोशीमठ आना पड़ता है।
 

घाटी में रोजगार के साधन भी शून्य हैं। घाटी के किसी भी गांव में इंटर कॉलेज नहीं है। वन्य जीव नगदी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जिससे कई परिवार घाटी में जाने के बजाय निचले क्षेत्रों में ही रहना पसंद कर रहे हैं। जोशीमठ प्रधान संगठन के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह नेगी का कहना है कि घाटी में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। जिससे भोटिया जनजाति के ग्रामीण घाटी से पलायन कर रहे हैं।
 

नीती घाटी के गांवों से पलायन चिंता का विषय है। बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्लान के तहत घाटी के गांवों में विकास कार्य संचालित कराए जाते हैं। घाटी के गांवों में सुविधाएं जुटाने का प्रयास किया जाएगा।
– विनोद कुमार सुमन, डीएम, चमोली

चीन सीमा क्षेत्र के गांवों में घटती परिवारों की संख्या
ग्राम – वर्ष 1991 – वर्ष 2001 – वर्ष 2011
परिवार – जनसंख्या – परिवार – जनसंख्या – परिवार – जनसंख्या      
नीती – 47 – 123 – 54 – 98 – 29 – 47    
कैलाशपुर – 41 – 443 – 44 – 85 – 35 – 158
जेलम – 100 – 409 – 85 – 315 – 81 – 224
जुम्मा – 82 – 214 – 27 – 98 – 62 – 76
कागा-गरपक – 21 – 72 – 14 – 58 – 11 – 66
बांपा – 35 – 97 – 46 – 74    – 60 – 192

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