स्काॅटलैंड से अमेरिका का सफर करने में इस पर्स को लगे 77 साल

अमेरिका के जाॅर्जिया की पीचट्री सिटी में रह रहे 100 साल के रॉय रोट्स का पर्स करीब 77 साल पहले कैलिफोर्निया के सांता मोनिका एयरपोर्ट पर खोया था। अब जा कर उन्हें ये इंग्लैड के स्काॅटलैंड में रहने वाले एक परिवार से वापस मिला है। खुद रॉय नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर ये कैसे हुआ। उनका पर्स जो करीब सात दशक पहले अनजाने में गिर गया था कैसे किसी युरोपियन शख्स के पास पुहंचा आैर कैसे उसके परिजनों ने उनका पता लगा कर वापस पहुंचाया ये सब एक कहानी जैसा है।  अमेरिका के जाॅर्जिया की पीचट्री सिटी में रह रहे 100 साल के रॉय रोट्स का पर्स करीब 77 साल पहले कैलिफोर्निया के सांता मोनिका एयरपोर्ट पर खोया था। अब जा कर उन्हें ये इंग्लैड के स्काॅटलैंड में रहने वाले एक परिवार से वापस मिला है। खुद रॉय नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर ये कैसे हुआ। उनका पर्स जो करीब सात दशक पहले अनजाने में गिर गया था कैसे किसी युरोपियन शख्स के पास पुहंचा आैर कैसे उसके परिजनों ने उनका पता लगा कर वापस पहुंचाया ये सब एक कहानी जैसा है।    किसी फिल्मी कहानी जैसा किस्सा   राॅय के अनुसार 1941 में जब द्वितीय विश्व युद्घ के दौरान वे कैलिफोर्निया में डगलस एयरक्राफ्टस के लिए बतौर इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर काम करते थे। उसी दौरान हवार्इ जहाज की जांच के दौरान किसी समय उनका पर्स जेब से फिसल कर कहीं गिर गया। उन्होंने जहाज मेंं मौजूद हर इंसान से पता किया पर पर्स नहीं मिला। उसमें पैसे ही नहीं कर्इ जरूरी कागजात भी थे। उनको सारी घटना हाल में ही देखी किसी फिल्म की कहानी की तरह आज भी अच्छी तरह याद है।    50 साल पहले दुर्घटना का शिकार हुआ था जहाज, पायलट का शव मिला अब बिल्कुल सुरक्षित यह भी पढ़ें कहानी का दूसरा हिस्सा   हांलाकि ये तो नहीं पता कैसे पर राॅय का वाॅलेट एडगर वॉरेन बर्ड्स को मिला जो उस समय इंग्लैंड के डर्बीशायर स्थित रॉयल एयरफोर्स में बतौर बाम्बर कार्यरत थे। पर्स में राॅय का ड्राइविंग लाइसेंस था पर वे कुछ ही अर्सा पहले नेवी से अलग हुए थे आैर उसमें लिखा पता यूएसएस फोनिक्स में था, जिसके जरिए बर्ड्स का उन्हें तलाशना मुमकिन नहीं था। लिहाजा उन्होंने पर्स संभाल कर रख लिया। इसके बाद अपनी मृत्यु से पहले वो पर्स को अपने बच्चों को सौंप गए। आैर उनके बच्चों ने भी इस बारे में अपने बच्चों को बताया। आखिरकार बर्ड्स की स्काॅटलैंड में रहने वाली ग्रैंड डाॅटर ने इंटनेट पर राॅय के परिवार को खोजा आैर पर्स के बारे में बताया।    पायलट की एक लत ने चलते जहाज की करानी पड़ी इमरजेंसी लैंडिंग यह भी पढ़ें बर्ड्स की परंपरा को आगे बढ़ायेंगे   फाॅक्स न्यूज की खबर के अनुसार रोट्स हैरान हैं कि क्यों बर्ड्स ने उनका पर्स इतने अर्से से संभाल कर रखा। अगर किसी गलत इरादे से उन्होंने वो पर्स रखा होता तो वह बरसों तक उस बटुए को संभाल कर नहीं रखते, पैसे निकालकर उसे फेंक देते। जबकि एडगर ने ना सिर्फ उस वॉलेट को संभाले रखा बल्कि अपनी अगली दो पीढ़ियों को भी एेसा करने के लिए कहा। वॉरेन अब इस दुनिया में नहीं हैं आैर उनकी पोती ने  रोट्स को उनका बटुआ लौटाया, इसलिए उसे सहेजकर रखने के पीछे क्या भावना थी यह राज़ ही है, लेकिन राॅय इसे आगे बढ़ाना चाहते हैं आैर  दिसंबर में अपना 101वां जनमदिन मनाते हुए वो ये पर्स आैर इसकी कहानी अपने उत्तराधिकारियों को सौंप जायेंगे

किसी फिल्मी कहानी जैसा किस्सा 

राॅय के अनुसार 1941 में जब द्वितीय विश्व युद्घ के दौरान वे कैलिफोर्निया में डगलस एयरक्राफ्टस के लिए बतौर इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर काम करते थे। उसी दौरान हवार्इ जहाज की जांच के दौरान किसी समय उनका पर्स जेब से फिसल कर कहीं गिर गया। उन्होंने जहाज मेंं मौजूद हर इंसान से पता किया पर पर्स नहीं मिला। उसमें पैसे ही नहीं कर्इ जरूरी कागजात भी थे। उनको सारी घटना हाल में ही देखी किसी फिल्म की कहानी की तरह आज भी अच्छी तरह याद है।  

हांलाकि ये तो नहीं पता कैसे पर राॅय का वाॅलेट एडगर वॉरेन बर्ड्स को मिला जो उस समय इंग्लैंड के डर्बीशायर स्थित रॉयल एयरफोर्स में बतौर बाम्बर कार्यरत थे। पर्स में राॅय का ड्राइविंग लाइसेंस था पर वे कुछ ही अर्सा पहले नेवी से अलग हुए थे आैर उसमें लिखा पता यूएसएस फोनिक्स में था, जिसके जरिए बर्ड्स का उन्हें तलाशना मुमकिन नहीं था। लिहाजा उन्होंने पर्स संभाल कर रख लिया। इसके बाद अपनी मृत्यु से पहले वो पर्स को अपने बच्चों को सौंप गए। आैर उनके बच्चों ने भी इस बारे में अपने बच्चों को बताया। आखिरकार बर्ड्स की स्काॅटलैंड में रहने वाली ग्रैंड डाॅटर ने इंटनेट पर राॅय के परिवार को खोजा आैर पर्स के बारे में बताया। 

बर्ड्स की परंपरा को आगे बढ़ायेंगे 

फाॅक्स न्यूज की खबर के अनुसार रोट्स हैरान हैं कि क्यों बर्ड्स ने उनका पर्स इतने अर्से से संभाल कर रखा। अगर किसी गलत इरादे से उन्होंने वो पर्स रखा होता तो वह बरसों तक उस बटुए को संभाल कर नहीं रखते, पैसे निकालकर उसे फेंक देते। जबकि एडगर ने ना सिर्फ उस वॉलेट को संभाले रखा बल्कि अपनी अगली दो पीढ़ियों को भी एेसा करने के लिए कहा। वॉरेन अब इस दुनिया में नहीं हैं आैर उनकी पोती ने  रोट्स को उनका बटुआ लौटाया, इसलिए उसे सहेजकर रखने के पीछे क्या भावना थी यह राज़ ही है, लेकिन राॅय इसे आगे बढ़ाना चाहते हैं आैर  दिसंबर में अपना 101वां जनमदिन मनाते हुए वो ये पर्स आैर इसकी कहानी अपने उत्तराधिकारियों को सौंप जायेंगे

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