स्टार्ट-अप कंपनियों की असमय मौत रोकने की जरूरत: सुरेश प्रभु

वाणिज्य व उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने स्टार्ट-अप कंपनियों की शुरुआती चरणों में ही मौत पर चिंता जताई है। शनिवार को गोवा स्टार्ट-अप एंड इनोवेशन डे नामक दो-दिवसीय आयोजन के आखिरी दिन प्रभु ने कहा कि देश में स्टार्ट-अप कंपनियों का आधिकारिक आंकड़ा महज 20,000 है। लेकिन असल में स्टार्ट-अप कंपनियों की तादाद कहीं ज्यादा है। स्टार्ट-अप कंपनियों की असमय मौत रोकने की जरूरत: सुरेश प्रभु

राज्य सरकार ने नई कंपनियों को कारोबार की संभावनाएं तलाशने में मदद के लिए गोवा स्टार्ट-अप एंड इनोवेशन डे का आयोजन किया था। इस मौके पर प्रभु ने कहा, ‘देश में आधिकारिक तौर पर करीब 20,000 स्टार्ट-अप कंपनियां हैं। लेकिन मैं जहां कहीं भी जाता हूं, मुङो दर्जनों ऐसी कंपनियां मिलती हैं।’ उन्होंने कहा कि पिछले दिनों गुजरात यूनिवर्सिटी में उन्हें 17-18 वर्ष उम्र के कई छात्र मिले, जिनके पास गजब के कारोबारी आइडिया थे। उनका कहना था कि वैसे छात्र भविष्य के उद्यमी हैं।

प्रभु ने कहा, ‘बाल मृत्यु की तरह कई स्टार्ट-अप कंपनियां अपने परिचालन के कुछ महीनों से ज्यादा आगे नहीं जा पातीं। ऐसे में इन कंपनियों के संरक्षण के सभी उपाय किए जाने की जरूरत है।’ वाणिज्य मंत्री का कहना था कि वर्ष 2017 में स्टार्ट-अप कंपनियों ने 36 फीसद विकास दर हासिल की, जो बेहद उत्साहजनक है। स्टार्ट-अप कंपनियों में अब तक 1,800 करोड़ डॉलर (1.17 लाख करोड़ रुपये) का निवेश किया गया। इसमें से 1,400 करोड़ डॉलर (91,000 करोड़ रुपये) का निवेश पिछले वर्ष किया गया।

प्रभु ने कार्यक्रम के दौरान भावी युवा उद्यमियों को अपने आइडिया पर गंभीरता से काम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कभी-कभी बेहद बकवास सा लगने वाला कोई आइडिया एकदम सफल हो जाता है। ऐसे में स्टार्ट-अप पर लगन और मेहनत के साथ काम करते रहना चाहिए। प्रभु ने कहा, ‘आप किसी से मत पूछिए कि अमुक आइडिया सही है या नहीं। उसे गलत बताने वाले सैकड़ों लोग मिलेंगे। लेकिन आपको उस पर काम करते रहना होगा और वह सफल होगा।’

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