हर शाम बदला जाता है जगन्नाथ मंदिर का ध्वज

हर साल भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा होती है और इस यात्रा के पीछे कई रहस्य और तथ्य भी हैं जिन्हें आप सभी जानते ही होंगे. इस बार जगन्नाथ रथ यात्रा 14 जुलाई से शुरू होने वाली है जिसका बहुत महत्व होता है और इस यात्रा में दूर-दूर से लोग आ कर सम्मिलित होते हैं. भगवान जगन्नाथ और उनके मंदिर से जुडी कई बातें हैं जिनका अपने आप में एक महत्व है लेकिन उनके अलावा कई और चीज़ें हैं जो इस रथ यात्रा से ताल्लुक रखती हैं. इसके अलावा एक और ऐसा काम है जो हर शाम को किया जाता है. आपको बता दें मंदिर के गुंबद पर लगा ध्वज हर शाम को बदला जाता है. इसके पीछे का भी कारण है जिसे हम बता देते हैं.हर साल भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा होती है और इस यात्रा के पीछे कई रहस्य और तथ्य भी हैं जिन्हें आप सभी जानते ही होंगे. इस बार जगन्नाथ रथ यात्रा 14 जुलाई से शुरू होने वाली है जिसका बहुत महत्व होता है और इस यात्रा में दूर-दूर से लोग आ कर सम्मिलित होते हैं. भगवान जगन्नाथ और उनके मंदिर से जुडी कई बातें हैं जिनका अपने आप में एक महत्व है लेकिन उनके अलावा कई और चीज़ें हैं जो इस रथ यात्रा से ताल्लुक रखती हैं. इसके अलावा एक और ऐसा काम है जो हर शाम को किया जाता है. आपको बता दें मंदिर के गुंबद पर लगा ध्वज हर शाम को बदला जाता है. इसके पीछे का भी कारण है जिसे हम बता देते हैं.  जानकारी के अनुसार, इस ध्वज से जुड़ी एक रहस्यमय बात यह भी है कि यह हवा के विपरीत दिशा में उड़ता है. जिस दिशा में हवा चलती उसकी उलटी दिशा में ये झंडा लहराता है. यह झंडा 20 फीट का तिकोने आकार का होता है जिसे बदलने का जिम्मा एक चोला परिवार पर है. ये जानकर आपको हैरानी होगी कि ये परम्परा 800 सालों से चली आ रही है. इस पर ये कहा जा रहा है कि अगर झंडा रोज़ ना बदला जाए तो मंदिर 18 सालों के लिए अपने आप बंद हो जायेगा. आप देख सकते हैं मंदिर के शिकार पर एक सुदर्शन चक्र भी है जो दूर से ही दिखाई देता है. इस चक्र की खास बात ये है कि इसे जहां से भी देखो वो आपको अपनी ओर ही दिखाई देगा.     इस मंदिर के झंडे को बदलने के लिए एक पुजारी मंदिर के 45 मंजिला शिखर पर जंजीरों के सहारे चढ़ता है. उससे पहले वह नीचे अग्नि जलाता है और धीरे-धीरे मंदिर के गुंबद तक पहुंच कर पुराने ध्वज को हटाकर नए ध्वज को लगा देता है. चाहे जैसा भी मौसम हो इस झंडे को बदलने का रिवाज है जिसे हर रज बदलना होता है.हर साल भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा होती है और इस यात्रा के पीछे कई रहस्य और तथ्य भी हैं जिन्हें आप सभी जानते ही होंगे. इस बार जगन्नाथ रथ यात्रा 14 जुलाई से शुरू होने वाली है जिसका बहुत महत्व होता है और इस यात्रा में दूर-दूर से लोग आ कर सम्मिलित होते हैं. भगवान जगन्नाथ और उनके मंदिर से जुडी कई बातें हैं जिनका अपने आप में एक महत्व है लेकिन उनके अलावा कई और चीज़ें हैं जो इस रथ यात्रा से ताल्लुक रखती हैं. इसके अलावा एक और ऐसा काम है जो हर शाम को किया जाता है. आपको बता दें मंदिर के गुंबद पर लगा ध्वज हर शाम को बदला जाता है. इसके पीछे का भी कारण है जिसे हम बता देते हैं.  जानकारी के अनुसार, इस ध्वज से जुड़ी एक रहस्यमय बात यह भी है कि यह हवा के विपरीत दिशा में उड़ता है. जिस दिशा में हवा चलती उसकी उलटी दिशा में ये झंडा लहराता है. यह झंडा 20 फीट का तिकोने आकार का होता है जिसे बदलने का जिम्मा एक चोला परिवार पर है. ये जानकर आपको हैरानी होगी कि ये परम्परा 800 सालों से चली आ रही है. इस पर ये कहा जा रहा है कि अगर झंडा रोज़ ना बदला जाए तो मंदिर 18 सालों के लिए अपने आप बंद हो जायेगा. आप देख सकते हैं मंदिर के शिकार पर एक सुदर्शन चक्र भी है जो दूर से ही दिखाई देता है. इस चक्र की खास बात ये है कि इसे जहां से भी देखो वो आपको अपनी ओर ही दिखाई देगा.     इस मंदिर के झंडे को बदलने के लिए एक पुजारी मंदिर के 45 मंजिला शिखर पर जंजीरों के सहारे चढ़ता है. उससे पहले वह नीचे अग्नि जलाता है और धीरे-धीरे मंदिर के गुंबद तक पहुंच कर पुराने ध्वज को हटाकर नए ध्वज को लगा देता है. चाहे जैसा भी मौसम हो इस झंडे को बदलने का रिवाज है जिसे हर रज बदलना होता है.

जानकारी के अनुसार, इस ध्वज से जुड़ी एक रहस्यमय बात यह भी है कि यह हवा के विपरीत दिशा में उड़ता है. जिस दिशा में हवा चलती उसकी उलटी दिशा में ये झंडा लहराता है. यह झंडा 20 फीट का तिकोने आकार का होता है जिसे बदलने का जिम्मा एक चोला परिवार पर है. ये जानकर आपको हैरानी होगी कि ये परम्परा 800 सालों से चली आ रही है. इस पर ये कहा जा रहा है कि अगर झंडा रोज़ ना बदला जाए तो मंदिर 18 सालों के लिए अपने आप बंद हो जायेगा. आप देख सकते हैं मंदिर के शिकार पर एक सुदर्शन चक्र भी है जो दूर से ही दिखाई देता है. इस चक्र की खास बात ये है कि इसे जहां से भी देखो वो आपको अपनी ओर ही दिखाई देगा.

इस मंदिर के झंडे को बदलने के लिए एक पुजारी मंदिर के 45 मंजिला शिखर पर जंजीरों के सहारे चढ़ता है. उससे पहले वह नीचे अग्नि जलाता है और धीरे-धीरे मंदिर के गुंबद तक पहुंच कर पुराने ध्वज को हटाकर नए ध्वज को लगा देता है. चाहे जैसा भी मौसम हो इस झंडे को बदलने का रिवाज है जिसे हर रज बदलना होता है.

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