हर साल अपनी जगह से खिसक जाता है यह रेगिस्तान

पूरी दुनिया में घूमने फिरने के लिए बहुत सारी खूबसूरत जगह मौजूद हैं. कुछ लोगों को खूबसूरती के साथ-साथ अजीबोगरीब जगह देखना भी पसंद होता है. आज हम आपको दुनिया में मौजूद सबसे बड़े रेगिस्तान के बारे में बताने जा रहे हैं. यह रेगिस्तान चीन में मौजूद है.  इस रेगिस्तान को सी ऑफ डेथ के नाम से जाना जाता है. यह रेगिस्तान जितना खूबसूरत है यहां पर जाना किसी एडवेंचर से कम नहीं है. पूरी दुनिया में घूमने फिरने के लिए बहुत सारी खूबसूरत जगह मौजूद हैं. कुछ लोगों को खूबसूरती के साथ-साथ अजीबोगरीब जगह देखना भी पसंद होता है. आज हम आपको दुनिया में मौजूद सबसे बड़े रेगिस्तान के बारे में बताने जा रहे हैं. यह रेगिस्तान चीन में मौजूद है.  इस रेगिस्तान को सी ऑफ डेथ के नाम से जाना जाता है. यह रेगिस्तान जितना खूबसूरत है यहां पर जाना किसी एडवेंचर से कम नहीं है.   सी ऑफ़ डेथ रेगिस्तान चीन के उत्तर पश्चिम शिनजियांग प्रांत में मौजूद है. यह रेगिस्तान हर साल खिसकता है. यह दुनिया का दूसरा और चीन का सबसे बड़ा रेगिस्तान है. जिसे एक समय में बहुत ही खतरनाक माना जाता था. यह रेगिस्तान चीन के 3.37 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है.  इस रेगिस्तान का 85% हिस्सा हर साल खिसक जाता है. सबसे बड़े खिसकते तकलामाकन रेगिस्तान में आयल कंपनी के वर्कर्स ने 15 साल में 436 किलोमीटर हाईवे के दोनों तरफ पेड़ लगाकर हरियाली ला दी है.   रेगिस्तान में हरियाली लाने के लिए सन 2002 में प्रोजेक्ट शुरू किया गया था. यहां के लोगों का कहना है कि जो भी व्यक्ति इस रेगिस्तान में जाता है वह कभी भी लौट कर नहीं आता है. हाईवे के किनारे पेड़ लगने के कारण ये एक टूरिस्ट प्लेस बन गया है. इससे पहले तकलामाकन के इलाके में लोग नहीं रहते थे. हाईवे बनाने के लिए तकलामाकन के दक्षिणी उत्तरी इलाके को जोड़ा गया है.

सी ऑफ़ डेथ रेगिस्तान चीन के उत्तर पश्चिम शिनजियांग प्रांत में मौजूद है. यह रेगिस्तान हर साल खिसकता है. यह दुनिया का दूसरा और चीन का सबसे बड़ा रेगिस्तान है. जिसे एक समय में बहुत ही खतरनाक माना जाता था. यह रेगिस्तान चीन के 3.37 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है.  इस रेगिस्तान का 85% हिस्सा हर साल खिसक जाता है. सबसे बड़े खिसकते तकलामाकन रेगिस्तान में आयल कंपनी के वर्कर्स ने 15 साल में 436 किलोमीटर हाईवे के दोनों तरफ पेड़ लगाकर हरियाली ला दी है. 

रेगिस्तान में हरियाली लाने के लिए सन 2002 में प्रोजेक्ट शुरू किया गया था. यहां के लोगों का कहना है कि जो भी व्यक्ति इस रेगिस्तान में जाता है वह कभी भी लौट कर नहीं आता है. हाईवे के किनारे पेड़ लगने के कारण ये एक टूरिस्ट प्लेस बन गया है. इससे पहले तकलामाकन के इलाके में लोग नहीं रहते थे. हाईवे बनाने के लिए तकलामाकन के दक्षिणी उत्तरी इलाके को जोड़ा गया है.

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