हार और भीतरघात के खिलाफ वसुंधरा का वर्चस्व…

उप चुनावों में पार्टी की हार का मुद्दा और अंदरूनी राजनीति मिलकर राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ कितने ही पापड़ बेले मगर, सीएम अपनी पकड़ जरा भी ढीली नहीं कर रही है. वसुंधरा राजस्थान की आगामी सूरत को देखकर हार कदम फुंक फुंक कर आगे बड़ा रही है. इसके चलते वह केंद्रीय नेतृत्व को भी सिमित दायरे तक ही हावी होने दे रही है. राजस्थान मंत्रिमंडल में फेरबदल उपचुनाव में मिली हार के लिए जिम्मेदार नेताओं को सजा का एक रूप होता मगर ऐसा हो न सका .हार और भीतरघात के खिलाफ वसुंधरा का वर्चस्व...

सूत्र बताते हैं कि कर्नाटक के विधानसभा चुनाव तक राजस्थान सरकार में मंत्रिमंडल फेरबदल की संभावना कम है. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अशोक परनामी का बने रहना मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को नागवारा है, मगर आला कमान के कारण उन्होंने फ़िलहाल समझौता कर लिया है. सूत्रों का कहना है कि राजस्थान के संघ के प्रचारक और संगठन मंत्री भी और वसुंधरा राजे के बीच बनी सहमति की स्थिति फिर से डगमगा रही है. इस पर सीएम समर्थकों का कहना है कि राजस्थान स्विंग स्टेट है. पिछले तीस साल से एक बार भाजपा तो एक बार कांग्रेस का शासन यहां रहा है. लेकिन इसके बाद भी वसुंधरा राजे की राज्य में लोकप्रियता बनी है.

चुनाव का महीना नजदीक आने तक सब कुछ ठीक हो जाएगा. मुख्यमंत्री के काफी करीबी मंत्री की माने तो राज्य में भाजपा के पास फिलहाल वसुंधरा राजे का विकल्प नहीं है. कांग्रेस की एक प्रवक्ता का भी कहना है कि राज्य में वसुंधरा राजे अपनी एक पहचान, अलग तरह की राजनीतिक छवि रखती हैं. खेर कई सवालों के जवाब भविष्य के गर्भ में है और तात्कालिक मुसीबतों से पार पाने की कवायद में फ़िलहाल राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सफलता प्राप्त कर ली है.  

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