हिन्दुस्तान पाल रहा हैं जहरीलें सांप, 110 कश्मीरियों ने थामा आतंक का हाथ

जहां एक ओर सीमा पार से आतंकी लगातार देश को अपना निशाना बना रहे है, वहीं दूसरी ओर देश के युवाओं ने भी सेना की मुश्किलें बढ़ा दी है. लगातार कश्मीर के युवा आतंकियों के लिए सहयोगी बनते जा रहे हैं. एक अधिकारी से मिली जानकारी के मुताबिक़, इस साल 15 जुलाई 2018 तक कश्मीर के 110 युवाओं ने आतंक के साये में पनाह ली है. जिसने भारत के भविष्य पर पूर्णतः कलंक का काम किया है.जहां एक ओर सीमा पार से आतंकी लगातार देश को अपना निशाना बना रहे है, वहीं दूसरी ओर देश के युवाओं ने भी सेना की मुश्किलें बढ़ा दी है. लगातार कश्मीर के युवा आतंकियों के लिए सहयोगी बनते जा रहे हैं. एक अधिकारी से मिली जानकारी के मुताबिक़, इस साल 15 जुलाई 2018 तक कश्मीर के 110 युवाओं ने आतंक के साये में पनाह ली है. जिसने भारत के भविष्य पर पूर्णतः कलंक का काम किया है.   जम्मू कश्मीर: एक और जवान को अगवा कर ले गए आतंकी    कश्मीर में सबसे अधिक युवा शोपियां जिले से आतंकी संगठनों से जुड़े है. अब न केवल देश को बाहरी आतंकियों से ख़तरा है, बल्कि देश में भी अब आतंकी पलने लगे है. भारत के लिए यह किसी भी रूप से उचित नहीं है. एक ओर जहां सरकार और सेना अभियान के तहत आतंकियों को जमकर खदेड़ने में लगे हुए है. वहीं दूसरी ओर कश्मीरी युवाओं ने आतंक का हाथ थामकर सरकार, सेना और देशवासियों की मुश्किलों में कई गुना इजाफ़ा कर दिया है.   आतंकियों के निशाने पर फिर अमरनाथ यात्रा    ख़बरों की माने तो कई युवाओं ने पढ़ाई-लिखाई छोड़ कर आतंक का हाथ थामा है. बता दे कि पिछले साल यह आंकड़ा 126 था, जबकि इस साल केवल 7 माह में ही 110 युवाओं ने आतंक की राह चुन ली है. यह आंकड़ा अभी और बढ़ने के आसार है. बता दे कि इससे पहले जम्मू एंड कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि इस सरकार में सबसे अधिक युवा आतंकी संगठनों से जुड़े है. 

कश्मीर में सबसे अधिक युवा शोपियां जिले से आतंकी संगठनों से जुड़े है. अब न केवल देश को बाहरी आतंकियों से ख़तरा है, बल्कि देश में भी अब आतंकी पलने लगे है. भारत के लिए यह किसी भी रूप से उचित नहीं है. एक ओर जहां सरकार और सेना अभियान के तहत आतंकियों को जमकर खदेड़ने में लगे हुए है. वहीं दूसरी ओर कश्मीरी युवाओं ने आतंक का हाथ थामकर सरकार, सेना और देशवासियों की मुश्किलों में कई गुना इजाफ़ा कर दिया है. 

ख़बरों की माने तो कई युवाओं ने पढ़ाई-लिखाई छोड़ कर आतंक का हाथ थामा है. बता दे कि पिछले साल यह आंकड़ा 126 था, जबकि इस साल केवल 7 माह में ही 110 युवाओं ने आतंक की राह चुन ली है. यह आंकड़ा अभी और बढ़ने के आसार है. बता दे कि इससे पहले जम्मू एंड कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि इस सरकार में सबसे अधिक युवा आतंकी संगठनों से जुड़े है.

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