होलिका दहन 2018: रहेगा भद्रा का साया, शाम सात बजे के बाद पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त

होलिका दहन आज शाम 7 बजे से होगा। इस बार पूर्णिमा का मान बृहस्पतिवार की सुबह 7:53 बजे से शुक्रवार की सुबह 6 बजे तक है जबकि भद्रा बृहस्पतिवार शाम 6:58 बजे के बाद ही खत्म होगी। ऐसे में एक मार्च की शाम सात बजे के बाद ही होलिका दहन का श्रेष्ठ मुहूर्त है। ये लगभग 22 घंटों तक रहेगा। होलिका दहन के साथ ही शहर की गलियों में रंग शुरू हो जाएगा, जो शुक्रवार को दोपहर तक जारी रहेगा। रंग के दिन शहर में जगह-जगह हुरियारों के जुलूस निकलेंगे।होलिका दहन 2018: रहेगा भद्रा का साया, शाम सात बजे के बाद पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त

 

सूर्यास्त के बाद ऐसे करें पूजन
होलिका पूजन में डुंडिका देवी का पूजन सूर्यास्त के बाद करना चाहिए। अबीर-गुलाल मिश्रित जल से होलिका का पूजन करना चाहिए। उपले, नए अनाज की बालियां चढ़ानी चाहिए। होलिका दहन के बाद सुबह गन्ने को भूनने के साथ ही होलिका में मिष्ठान्न अर्पित करना चाहिए। होलिका में नए अनाज की भुनी बालियां और गन्ने भूनकर चूसने के लिए घर लाने चाहिए। छोटी होली पर नवान्नेष्टी पूजन यानी नए अनाज की पूजा भी होगी। ग्रामीण इलाकों में किसान अपनी तैयार हो रही फसलों के साथ खेतों का भी पूजन करेंगे।

गाजे-बाजे से निकलेगी हुरियारों की बारात
होली के दिन शहर में जहां रंगों-गुलाल और फूलों की होली का रंग चढ़ेगा, वहीं चौक-चौपटिया में हुरियारों का जुलूस होली का मजा दुगुना करेगा। गाजे-बाजे के साथ निकलने वाले जुलूस में डीजे, ढोल, ऊंट, तांगे और घोड़े के साथ हुरियारों नाचते-गाते और लोगों को रंग लगाते चलेंगे।

शुभ संस्कार समिति की ओर से 44वीं बारात 2 मार्च को सुबह चौपटियां कक्कड़ पार्क से निकलेगी। वहीं, होलिकोत्सव समिति की ओर से कोनेश्वर चौराहे से होली बारात निकाली जाएगी। आयोजन से जुड़े अन्नू मिश्रा ने बताया कि बारात में ऊंट, घोड़े के साथ अबीर-गुलाल उड़ाते हुरियारों की टोली शामिल होगी।

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