कभी अपने सोचा हैं, योग व्यक्ति होता तो कैसा होता?

कभी अपने सोचा हैं, योग व्यक्ति होता तो कैसा होता?

क्या आपने कभी सोचा है योग अगर कोई व्यक्ति होता तो कैसा होता। क्या एक दोस्त की तरह, किसी डॉक्टर की तरह, किसी कलाकार या फिर किसी समझदार बुजुर्ग या फिर किसी आरामपसंद और अनुकूल इंसान की तरह होगा। उसका आपकी जिदंगी में आखिर कैसा रोल होता। कभी अपने सोचा हैं, योग व्यक्ति होता तो कैसा होता?कैसा हो अगर हम कहें कि योग इन सब की भूमिका निभाता है?  यह सब कुछ है। कल्पना कीजिए पूरे दिन साथ रहने वाले ऐसे साथी की, जो मल्टी टैलेंटेड होने के साथ मल्टी डायमेंशनल और डायनैमिक भी है। यह आपका मार्गदर्शन करने के साथ आपको स्वस्थ करता है, तनाव से मुक्त करता है, अच्छी नींद दिलाने में सहायता करता है, आपको प्रोत्साहन देता है ताकि आप अच्छा महसूस करने के साथ अच्छे भी दिख सकें। आपको कुछ भी देखने के लिए खुद से बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी।      

यह वह तरीका है जो गुरुजी के नाम से पहचाने जाने वाले बी.के.एस.अयंगर के योग छात्र दुनिया भर में योग को अपनी जिदंगी में देखते हैं। वे जानते हैं कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस आकार या साइज में आते हैं, अयंगर योग आपको अपने अंदर से पूरा होने का अहसास करवाता है।

वास्तव में, वह ऐसी सोच रखने वाला एक ज्वलंत उदाहरण था। एक बीमार बच्चा जो टीबी, टायफस, मलेरिया, और कुपोषण से पीड़ित है, योग उसके स्वास्थ्य को सुधारने के लिए एक सुझाव के रूप में आया था। बिना यह सोचे कि उसे वह दुनिया की वो दौलत दे सकता है जो किसी के पास हो सकती है। योग उसे कमजोरी से उत्सुकता, दुर्बलता से ताकत प्रदान करता है। उनकी साधना न केवल उसे स्वस्थ्य बनाएगी, बल्कि उसके शरीर में कई शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक बदलाव लाती है। वह अपने शरीर को योग सिद्धांतों और मुद्राओं के लिए एक प्रयोगशाला बना देता है। वह एक वैज्ञानिक की तरह अध्ययन,निरीक्षण,प्रयोग करता है जब तक गति और स्थिरता  दोनों तरह से प्रत्येक आसन एक कला न बन जाए। आज अपने शरीर के साथ यह कड़ी मेहनत आपको गहन समझ के साथ अयंगर योग को आपके लिए बहुत प्रभावकारी और बहुमुखी बनाने का रास्ता भी बनाता है।
 
गुरुजी ने यह साबित कर दिया कि एक  योग मुद्रा में न्यूनतम बदलाव भी कैसे शरीर में सुधार ला सकता है। उन्होंने सिखाया कि कैसे आप अपनी इच्छाशक्ति के आगे अपने दिमाग (muscle intelligence) का इस्तेमाल कर सकते हैं, अपने शरीर की ऊर्जा को एक हिस्से से दूसरे हिस्से में ले जाना, किसी भी मुद्रा में बने रहने के लिए संतुलन प्राप्त करना शामिल है। बिल्कुल उसी तरह जिस तरह संगीत कंडक्टर एक सिम्फनी में कई विविध उपकरणों के साथ एक सुंदर सद्भाव बनाता है। 
 
अयंगर योग करने वाला छात्र जो  शीर्षासन या मयूरासन करता है, वह आपको बताएगा कि शरीर को ऊपर से नीचे करने से पहले उन्हें अंदर से खुद को मजबूत बनाने के साथ, छाती खोलने, और पैर को सीधा रखना याद ऱखना होता है। उसके बाद भीतर से विपरीत दिशा में बाहर की ओर घूमाना है। उन्होंने इस एकीकरण का अनुभव किया है। 

अयंगर योग छोटे छोटे विवरणों के बारे में है जो कि आपकी हर मुद्रा को आसान और सहज महसूस करवाते हैं। अब इस अनुभव को अपने जीवन में महसूस करिए। लोग अलग अलग कारणों की वजह से योग करते हैं। कुछ लोग अपने कमर के दर्द को ठीक करने के लिए तो कुछ घुटनों के दर्द को ठीक करने के लिए करते हैं। कुछ लोग योग अपने शरीर में लचीला बनाने तो कुछ मन को शांत करने तो कुछ शरीर में एनर्जी के लिए योग करते हैं। शारीरिक रूप से हो सकता है कि यह सारी बातें ठीक हो, यह सब प्राकृतिक तरीके हैं खुद को वापस पाने के लिए। 

 
छात्रों का योग करने का जो असल कारण है, वह है खुद के बारे में जानना। इसके अलावा उस आंतरिक संतुलन को ढूंढना जो हम सब अपने मन में जाने अनजाने चाहते हैं। जैसे ही आप इस लंबी यात्रा पर निकलेंगे, आप देखेंगे कि आपका योग आपके अंदर का ही कोई प्रतिबिंब है। एक अयंगर योग शिक्षक बस आपके चलने, उठने, बैठने के तरीके को देखकर ही आपके शारीरिक और मानसिक स्थिति को समझ जाता है। उदाहरण के लिए, कई छात्रों को पीछे झुकने में परेशानी होती है , जो आमतौर पर अपने किसी अनजान डर को लेकर होता है। अब अपने जीवन में किसी को होने की कल्पना करें,जो आपको बताए कि आपको भीतर किस सुधार की जरूरत है, बल्कि आपको करके भी बताएं कि कैसे करना है। हर किसी का योग को लेकर सोचने का अलग तरीका है। हम सब आसन की अपनी छवि के साथ सोचते हैं कि वह कैसे दिखते हैं। जबकि गुरुजी पूर्णता में विश्वास रखते थे,एक आसान का असर आप पर इससे ज्यादा होता है। 

अयंगर योग एक ही मुद्रा में बने रहने से कहीं ऊपर है। यह आपको बताता है कि आप कैसे उस मुद्रा में पहुंच सकते हैं। आप उस मुद्रा में क्या महसूस करते हैं और कैसे आप इससे निकल सकते हैं। इस का अनुभव हर किसी के लिए अलग है। वास्तव में, उनका मानना ​​था कि गुरुजी की  शिक्षा इसी आधार के सिद्धांत पर आधारित थी कि प्रत्येक शरीर स्वाभाविक रूप से अलग है, इसलिए इसकी सीमाएं हैं उनका प्रयास ज्यादा से ज्यादा प्राप्त करना है। गुरूजी की शिक्षा इसी सिद्धांत पर आधारित थी कि हर व्यक्ति की व्यक्तिगत सीमाओं के बावजूद उन्हें इस  आसन का लाभ मिले। यही कारण है कि अयंगर योग हर तरह की शरीर- क्षमता, और योग्यता वाले लोगों के लिए है। यह आपके शरीर पर काम करने के बजाय उसके साथ काम करता है। यह आपको समझते हुए आपके भीतर से आपका बेस्ट निकालता है। यह आपके लिए जीवन भर की दोस्ती है। 

हालांकि, योग के साथ आपका रिश्ता आपकी एक निजी यात्रा है। जितनी जल्दी आप इस साझेदारी को शुरू करते हैं, उतनी गहराई में आप पहुंच जाएंगे। गुरुजी, बी.के.एस. अयंगर का योग के साथ 82 वर्ष पुराना संबंध था। आपका योग के साथ कितना लंबा रिश्ता होगा?

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