फंड गायब कर रहा था ये दिग्गज ब्रोकर, SEBI ने कसी नकेल

मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने दिग्गज स्टॉक ब्रोकर प्रभुदास लीलाधर को कोई भी नया क्लाइंट जोड़ने या नया असाइनमेंट लेने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। यह 15 दिसंबर 2025 से 7 दिनों के लिए होगा। शुक्रवार को जारी अंतरिम आदेश में सेबी के चीफ जनरल मैनेजर एन मुरुगन ने कहा, “प्रभुदास लीलाधर को 15 दिसंबर 2025 (सोमवार) से 7 दिनों की अवधि के लिए स्टॉक ब्रोकर के रूप में कोई नया क्लाइंट, नया कॉन्ट्रैक्ट या नई स्कीम शुरू करने से प्रतिबंधित किया जाता है।”

क्या-क्या उल्लंघन पाए गए?
सेबी, एनएसई, बीएसई और एमसीएक्स की संयुक्त जांच (1 अप्रैल 2021 से 31 अक्टूबर 2022 तक) में कई गंभीर अनुपालन चूक सामने आईं हैं। जिसमें क्लाइंट फंड का दुरुपयोग करना शामिल रहा। जुलाई 2021 में तीन अलग-अलग तारीखों पर क्लाइंट खातों में कुल करीब 2.70 करोड़ रुपये की कमी पाई गई। सेबी ने कहा कि यह क्लाइंट फंड्स का सीधा-सीधा निकासी है और इसके लिए कोई वैध कारण नहीं दिया गया।

इसके अलावा निष्क्रिय क्लाइंट्स के पैसे समय पर नहीं लौटाए गए। सेबी के मुताबिक 1,283 निष्क्रिय खातों (तिमाही आधार पर), 677 खातों (मासिक आधार पर) और कुछ एक्टिव खातों में भी करोड़ों रुपये का निपटान समय सीमा में नहीं किया गया था। साथ ही मार्जिन की गलत रिपोर्टिंग की गई थी। कई क्लाइंट्स के पीक मार्जिन और एंड-ऑफ-डे मार्जिन गलत बताए गए। एक मामले में 55.46 लाख रुपये की पीक मार्जिन शॉर्ट कलेक्शन हुई। एक्सचेंज का लगाया गया जुर्माना क्लाइंट्स पर डाला गया और बाद में रिफंड नहीं किया गया।

पूरी पेमेंट वाले क्लाइंट्स की सिक्योरिटीज को गलत तरीके से क्लाइंट अनपेड सिक्योरिटीज अकाउंट में पार्क किया गया। कई मामलों में ब्रोकरेज नियम से ज्यादा वसूला गया और केवाईसी रजिस्ट्रेशन एजेंसी (KRA) में देरी से अपलोड किया गया।

कंपनी का बचाव खारिज
प्रभुदास लीलाधर ने दलील दी थी कि ये चूक सिर्फ तकनीकी या सॉफ्टवेयर/क्लर्कियल गलतियां थीं और रकम कुल बिजनेस के मुकाबले बहुत छोटी थी। सेबी ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि, ”क्लाइंट फंड्स का अलग रखना और उनकी सुरक्षा सबसे बुनियादी नियामकीय जिम्मेदारी है। रकम छोटी होने या बाद में सुधार कर लेने से यह जिम्मेदारी खत्म नहीं होती।”

सेबी ने माना कि बाद में कंपनी ने कई सुधार किए और कुछ रिफंड भी किए, लेकिन बार-बार हो रही चूक को देखते हुए निवेशकों के हित में यह अस्थायी प्रतिबंध जरूरी था। यह कदम अनुशासनात्मक और भविष्य में ऐसी गलतियां रोकने के लिए उठाया गया है। 15 से 21 दिसंबर 2025 तक प्रभुदास लीलाधर कोई नया क्लाइंट नहीं जोड़ सकेगा। मौजूदा क्लाइंट्स के साथ काम जारी रहेगा।

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