कोई भी बात किसी भी लॉजिक से साथ अगर कोई बोल दे तो वह बात सभी जगह फैल जाती है। कुछ ऐसा ही तकनीकियों को लेकर भी होता है। मोबाइल से जुड़ी ऐसी कई भ्रांतियां है जिनके बारे में हर कोई बात करता है और उसे फॉलो भी करता है। लेकिन आपको उन बातों को सही मान लेने से पहले जान लेना चाहिए कि कहीं ये कोई मिथ तो नहीं।कोई भी बात किसी भी लॉजिक से साथ अगर कोई बोल दे तो वह बात सभी जगह फैल जाती है। कुछ ऐसा ही तकनीकियों को लेकर भी होता है। मोबाइल से जुड़ी ऐसी कई भ्रांतियां है जिनके बारे में हर कोई बात करता है और उसे फॉलो भी करता है। लेकिन आपको उन बातों को सही मान लेने से पहले जान लेना चाहिए कि कहीं ये कोई मिथ तो नहीं।  ऐसे ही 5 गलतफहमियों को यहां दूर करने की कोशिश की गई है जो कि मोबाइल से जुड़ी हैं:    फोन में जितने ज्यादा बार्स उतने अच्छे सिग्नल  आमतौर पर लोग मानते हैं कि मोबाइल में जितने ज्यादा बार होते हैं, उतना अच्छा सिग्नल होता है। हम सोचते हैं कि इससे हमें कॉल क्वालिटी बहुत अच्छी मिलेगी, आवाज बिलकुल क्लीयर आएगी और बात करने में कोई दिक्कत नही आएगी। लेकिन ऐसा नहीं है। जो आप मोबाइल में सिग्नल बार्स केवल ये बताते हैं कि आपका मोबाइल फोव उस नेटवर्क टावर से कितनी दूरी पर है।    मान लीजिए अगर आप टावर के एकदम पास जा कर फोन कॉल कर रहे हैं और उसी समय आपके उस इलाके में 4 हजार और लोग हैं जो कॉल करने की कोशिश कर रहे हैं तो आपका नेटवर्क एकदम बिजी हो जाएगा और आपको कॉल क्वालिटी एकदम पुअर ही मिलेगी। तो इस गलतफहमी में मत रहिए कि जितने ज्यादा बार्स उतनी अच्छी कॉलिंग।  कैमरे में जितनी ज्यादा मेगापिक्सल्स, उतनी अच्छी फोटो   जब आप कोई नया स्मार्टफोन खरीदते हैं तो कैमरा स्पेसिफिकेशन आपके इस फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आप में से ज्यादातर लोग सोचते हैं की जिस मोबाइल के कैमरा में ज्यादा मेगापिक्सल्स होते हैं उसमे फोटो क्वालिटी ज्यादा अच्छी होती है।    ये बात भी बिलकुल गलत है। मेगापिक्सल्स तब ही मायने रखता है जब आप पिक्चर प्रिंट करवाते हैं। वास्तव में फोटो की क्वालिटी मेगापिक्सल्स के अलावा और भी बहुत-सी चीजों पर डिपेंड करती है जैसे कैमरा लेंस, सेंसर, फोकस आदि। एक मेगा पिक्सल्स यानी एक मिलियन पिक्सल्स। पिक्चर्स छोटे-छोटे डॉट्स से बनी होती है जो कि पिक्सल्स कहलाते हैं।  ओवरनाइट चार्जिंग से बैटरी हो सकती है खराब     आपने कई बार सुना होगा की अपने मोबाइल को रात भर चार्जिंग पर मत लगाइए नही तो आपका फोन खराब हो सकता है या उसकी बैटरी खराब हो सकती है। कुछ लोग ये तक कहते हैं कि फोन ब्लास्ट भी हो सकता है।    हकीकत तो ये हैं कि आप मोबाइल को रातभर चार्ज कर सकते हैं और मान लीजिए कि आपकी बैटरी को कुछ नहीं होगा। इसका कारण यह है कि आजकल के मोबाइल 'स्मार्ट' फोन होते हैं। आपका फोन यह पहचान लेगा कि यह फुल चार्ज हो गया है और खुद ही चार्जिंग बंद कर देगा।  कोई दूसरा या थर्ड पार्ट चार्जर यूज नहीं करना चाहिए   आपने ये बात कई बार सुनी होगी की अपने फोन को कभी भी किसी दूसरे फोन या कंपनी के चार्जर से चार्ज मत कीजिये, केवल उसी चार्जर का यूज कीजिए जो इस फोन के साथ आया है। ये बात बिलकुल गलत है। आप किसी भी टाइप का चार्जर यूज कर सकते हैं, चाहे वो किसी भी कंपनी का हो बस ध्यान इस बात का रखना है की जो दूसरा चार्जर हो वो डुप्लीकेट या जाली चार्जर ना हो, वो चार्जर एकदम ओरिजनल होना चाहिए बाकि कोई समस्या नही है।  डाटा और कनेक्टिविटी टर्न ऑफ करने से  दो तरह की भ्रांतियां है। आपने ऐसी कई बातें सुनी होगी कि डाटा, वाई-फाई, ब्लूटूथ और जीपीएस बंद करने से आपके बैटरी पर लोड कम होता है। यह भी सलाह दी जाती है कि आपका मोबाइल कम चार्ज हो तो इन्हें टर्न ऑफ करने से कुछ मदद नहीं मिलेगी।    ये बेसिक सिस्टम सर्विसेस है जो कि आपके मोबाइल में ऑन होनी चाहिए ताकि यह स्मूदली काम कर सके।

ऐसे ही 5 गलतफहमियों को यहां दूर करने की कोशिश की गई है जो कि मोबाइल से जुड़ी हैं:

फोन में जितने ज्यादा बार्स उतने अच्छे सिग्नल

आमतौर पर लोग मानते हैं कि मोबाइल में जितने ज्यादा बार होते हैं, उतना अच्छा सिग्नल होता है। हम सोचते हैं कि इससे हमें कॉल क्वालिटी बहुत अच्छी मिलेगी, आवाज बिलकुल क्लीयर आएगी और बात करने में कोई दिक्कत नही आएगी। लेकिन ऐसा नहीं है। जो आप मोबाइल में सिग्नल बार्स केवल ये बताते हैं कि आपका मोबाइल फोव उस नेटवर्क टावर से कितनी दूरी पर है।

मान लीजिए अगर आप टावर के एकदम पास जा कर फोन कॉल कर रहे हैं और उसी समय आपके उस इलाके में 4 हजार और लोग हैं जो कॉल करने की कोशिश कर रहे हैं तो आपका नेटवर्क एकदम बिजी हो जाएगा और आपको कॉल क्वालिटी एकदम पुअर ही मिलेगी। तो इस गलतफहमी में मत रहिए कि जितने ज्यादा बार्स उतनी अच्छी कॉलिंग।

कैमरे में जितनी ज्यादा मेगापिक्सल्स, उतनी अच्छी फोटो

जब आप कोई नया स्मार्टफोन खरीदते हैं तो कैमरा स्पेसिफिकेशन आपके इस फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आप में से ज्यादातर लोग सोचते हैं की जिस मोबाइल के कैमरा में ज्यादा मेगापिक्सल्स होते हैं उसमे फोटो क्वालिटी ज्यादा अच्छी होती है।

ये बात भी बिलकुल गलत है। मेगापिक्सल्स तब ही मायने रखता है जब आप पिक्चर प्रिंट करवाते हैं। वास्तव में फोटो की क्वालिटी मेगापिक्सल्स के अलावा और भी बहुत-सी चीजों पर डिपेंड करती है जैसे कैमरा लेंस, सेंसर, फोकस आदि। एक मेगा पिक्सल्स यानी एक मिलियन पिक्सल्स। पिक्चर्स छोटे-छोटे डॉट्स से बनी होती है जो कि पिक्सल्स कहलाते हैं।

ओवरनाइट चार्जिंग से बैटरी हो सकती है खराब

आपने कई बार सुना होगा की अपने मोबाइल को रात भर चार्जिंग पर मत लगाइए नही तो आपका फोन खराब हो सकता है या उसकी बैटरी खराब हो सकती है। कुछ लोग ये तक कहते हैं कि फोन ब्लास्ट भी हो सकता है।

हकीकत तो ये हैं कि आप मोबाइल को रातभर चार्ज कर सकते हैं और मान लीजिए कि आपकी बैटरी को कुछ नहीं होगा। इसका कारण यह है कि आजकल के मोबाइल ‘स्मार्ट’ फोन होते हैं। आपका फोन यह पहचान लेगा कि यह फुल चार्ज हो गया है और खुद ही चार्जिंग बंद कर देगा।

कोई दूसरा या थर्ड पार्ट चार्जर यूज नहीं करना चाहिए

आपने ये बात कई बार सुनी होगी की अपने फोन को कभी भी किसी दूसरे फोन या कंपनी के चार्जर से चार्ज मत कीजिये, केवल उसी चार्जर का यूज कीजिए जो इस फोन के साथ आया है। ये बात बिलकुल गलत है। आप किसी भी टाइप का चार्जर यूज कर सकते हैं, चाहे वो किसी भी कंपनी का हो बस ध्यान इस बात का रखना है की जो दूसरा चार्जर हो वो डुप्लीकेट या जाली चार्जर ना हो, वो चार्जर एकदम ओरिजनल होना चाहिए बाकि कोई समस्या नही है।

डाटा और कनेक्टिविटी टर्न ऑफ करने से

दो तरह की भ्रांतियां है। आपने ऐसी कई बातें सुनी होगी कि डाटा, वाई-फाई, ब्लूटूथ और जीपीएस बंद करने से आपके बैटरी पर लोड कम होता है। यह भी सलाह दी जाती है कि आपका मोबाइल कम चार्ज हो तो इन्हें टर्न ऑफ करने से कुछ मदद नहीं मिलेगी।

ये बेसिक सिस्टम सर्विसेस है जो कि आपके मोबाइल में ऑन होनी चाहिए ताकि यह स्मूदली काम कर सके।