1.4 लाख छात्र-छात्राएं आज चुन रहे अपने नेता

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के लिए बुधवार सुबह 8ः30 बजे से दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के 52 कॉलेजों में वोट मतदान शुरू हो गया है, जो दोपहर एक बजे तक होगा। इसके बाद दो घंटे तक मतदान बंद रहेगा। फिर दोपहर बाद तीन बजे से सांध्य कॉलेजों में शाम 7.30 बजे तक मतदान होगा। 

चुनाव के मद्देनजर मतदान करने के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अपने-अपने कॉलेजों में पहुंच रहे हैं। खासकर फर्स्ट ईयर के छात्र-छात्राओं में वोटिंग को लेकर खासा जोश है। 

एक लाख 40 हजार विद्यार्थी करेंगे

चुनाव समिति के मुताबिक, सभी कॉलेजों में सुबह से लेकर दोपहर के दौरान बड़ी संख्या में विद्यार्थी वोट डालने आएंगे। डीयू में कुल एक लाख 40 हजार विद्यार्थी बुधवार को मतदान करेंगे। कॉलेजों में शांतिपूवर्क चुनाव संपन्न कराने के लिए 500 से ज्यादा शिक्षक तैनात हैं, जबकि सुरक्षा के भी कड़े प्रबंधन किए गए हैं। 

कॉलेजों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए शिक्षक तैनात हैं, वहीं कॉलेजों के मुख्य द्वार पर निगरानी करने के लिए पुलिसकर्मी मौजूद हैं। विद्यार्थियों के पहचान पत्र देखने के बाद ही उन्हें कॉलेजों में मतदान देने के लिए जाने दिया जाएगा।

23 प्रत्याशी चुनावी मैदान में
डूसू चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए पांच, उपाध्यक्ष के लिए पांच, सचिव पद के लिए आठ एवं संयुक्त सचिव पद के लिए पांच प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। कुल 23 प्रत्याशियों के लिए विद्यार्थी मतदान में हिस्सा लेंगे।
बीते सालों में कैसा रहा था मतदान 
डूसू चुनावों में बीते कुछ वर्षों के दौरान मतदान करने वाले विद्यार्थियों की भूमिका मिली जुली रही है। इस बार सभी छात्र संगठनों की कोशिश रही है कि ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थी मतदान करने आएं। बीते तीन वर्षों के मत फीसद पर नजर डालें तो पिछले साल 45 फीसद विद्यार्थियों ने वोट डाले थे। 2015 में 43.3 फीसद, 2016 में 36.9 फीसद और 2017 में 45 फीसद मतदान हुआ था।

इन पर भी रहेगी नजर
छात्र संगठनों की ओर से डूसू चुनाव समिति से पूरी पारदर्शिता के साथ मतदान कराने की मांग की गई है। इसके लिए भी पत्र लिखे गए हैं। छात्र संगठनों ने दावा किया कि कई बार उपद्रवी तत्वों द्वारा फर्जी तरीके से मतदान कराने की शिकायतें भी आई हैं। साथ ही ईवीएम पर सीसीटीवी कैमरों के जरिये नजर रखने की मांग की गई है। इसके अलावा जिन छात्रों के पहचान पत्र नहीं बने हैं, उन्हें फीस की रसीद और अन्य किसी पहचान पत्र के माध्यम से मतदान करने की इजाजत देने की भी मांग की गई है।

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