2018 में सख्त हुआ सुप्रीम कोर्ट, इन बड़े मामलों पर रहेगी नजर…

नई दिल्ली:  साल 2018 ने दस्तक दे दी है। अब हर किसी की नजर इस नए साल पर होगी। पिछले हर साल की तरह यह नया साल भी कई मायनों में बेहद खास रहेगा। वहीं देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के पास भी ढेरों ऐसे पुराने मामले दर्ज है जिस पर इस साल फैसला सुनाया जाएगा।2018 में सख्त हुआ सुप्रीम कोर्ट, इन बड़े मामलों पर रहेगी नजर...बाबरी मस्जिद विध्वंस
इस साल बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने की उम्मीद है जो बेहद अहम रहेगा। बता दें कि 1992 में अयोध्या में हुए बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले के बाद राम मंदिर-बाबरी मस्जिद से जुड़े जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। 2017 में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली 3 जजों की बेंच ने अगली सुनवाई के लिए 8 फरवरी की तारीख तय की और कहा था कि अब मामले की सुनवाई लगातार की जाएगी, टाली नहीं जाएगी। उम्मीद है कि इस साल इस चर्चित मामले पर कोई फैसला आ जाएगा। हालांकि मुस्लिम संगठनों की ओर से सीनियर ऐडवोकेट कपिल सिब्बल ने कोर्ट में दलील दी थी कि 2019 जुलाई के बाद मामले की सुनवाई होनी चाहिए क्योंकि यह कोई आम जमीन विवाद नहीं है और इसका राजनीतिक स्तर पर काफी असर पड़ेगा।

दिल्ली की प्रशासनिक जिम्मेदारी किसकी
सुप्रीम कोर्ट ने 6 दिसंबर को दिल्ली से जुड़े एक मामले में सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। ये मामला है दिल्ली के प्रशासनिक बॉस का। दरअसल कोर्ट को यह फैसला करना है कि दिल्ली की प्रशासनिक जिम्मेदारी दिल्ली सरकार के पास है या फिर केंद्र सरकार के पास रहेगी। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई में 5 जजों के बेंच ने 4 हफ्ते में 15 दिन चली सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। दिल्ली सरकार के वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम ने बेंच के सामने जवाब दिया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास विधायिका से जुड़े कानून बनाने का अधिकार है। जबकि केंद्र ने इसका विरोध किया कि अगर मामला राष्ट्रीय हित से जुड़ा हुआ है तो दिल्ली सरकार के पास कोई विशिष्ट विधाई अधिकार नहीं है।

एडल्टरी कानून पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने साल 2017 के अंत में एक याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार की। इसमें एडल्टरी यानी परगमन से जुड़े विवादित कानून की सुनवाई की जाएगी। दाखिल याचिका में कहा गया है कि महिला के खिलाफ एडल्टरी का केस दर्ज किए जाने की कोई व्यवस्था नहीं है। IPC की धारा-497 के तहत एक ऐसा कानूनी प्रावधान है जिसके अनुसार अगर कोई शादीशुदा पुरुष किसी शादीशुदा महिला के साथ आपसी रजामंदी से यौनिक संबंध बनाता है तो उक्त महिला का पति एडल्टरी के नाम पर केस करा सकता है, जबकि यह व्यवस्था पुरुष के साथ नहीं है। केरल के एक अनिवासी भारतीय ने केस दर्ज कराते हुए IPC की धारा-497 की संवैधानिकता को चुनौती दी है।

आधार कार्ड
2017 में आधार कार्ड की हर ओर चर्चा हुई और इससे जुड़े कई विवाद भी हुए। साल की शुरूआत में ही सरकार ने सभी जरूरी चीजों और दस्तावेजों के साथ आधार को अनिवार्य कर दिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल सरकार से जुड़ी सभी कल्याणकारी सुविधाओं और सेवाओं के साथ-साथ अन्य जरूरी चीजों के लिए डेडलाइन बढ़ाते हुए 31 मार्च तक आधार से लिंक कराने की अनुमति दे दी थी। देश की शीर्ष अदालत इस बात की सुनवाई 17 जनवरी से शुरू करेगी कि आधार से निजता का उल्लंघन हो रहा है या नहीं।

निर्भया रेप कांड
दिल्ली में 5 साल पहले 16 दिसंबर को हुए निर्भया रेप मामले में पिछले साल मई में चारों दोषि पाए गए और उन्हें मौत की सजा दी गई। इस साल चारों दोषियों की ओर से दाखिल रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई के बाद फैसला किया जाना है। आरोपी मुकेश की ओर से अपनी दलीलें दी जा चुकी हैं जबकि अन्य दोषियों की ओर से दलीलें पेश की जानी है। मुकेश के वकील की ओर से पेश दलीलों के दौरान मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा था कि आप एक दोषी के लिए मृतक पीड़िता के माता-पिता पर राज्य और पुलिस को घूंस दिए जाने की बात कर रहे हैं। इसे बंद करिए। आप रिव्यू पिटिशन में ऐसी बातें नहीं कह सकते। सर्वोच्च कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 22 जनवरी तय की है।

You May Also Like

English News