29 साल में पहली बार गोरखपुर का सांसद न राजपूत होगा, न मठाधीश

गोरखपुर की संसदीय सीट पिछले 29 साल से गोरखनाथ मठ में रही है. ये बीजेपी का मजबूत दुर्ग है. 1989 से इस सीट पर गोरखनाथ मंदिर से जुड़ी हस्तियां ही जीत का भगवा ध्वज फहराती आ रही हैं. लेकिन इस बार हुए उपचुनाव में चाहे बीजेपी उम्मीदवार जीते या सपा, एक बात तय है कि इस बार क्षेत्र का सांसद मठ से बाहर का होगा. इतना ही नहीं वो गैर-राजपूत भी होगा.29 साल में पहली बार गोरखपुर का सांसद न राजपूत होगा, न मठाधीश

योगी पांच बार सांसद

योगी आदित्यनाथ ने पिछले पांच बार से गोरखपुर से सांसद रहने के बाद पिछले साल यूपी के सीएम बनने के बाद यहां की लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. योगी की कर्मभूमि गोरखपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव के लिए बीजेपी ने उपेंद्र शुक्ला को मैदान में उतारा है. बीजेपी को मात देने के लिए बसपा समर्थित सपा उम्मीदवार प्रवीण निषाद हैं. वहीं कांग्रेस ने सुरहिता करीम को टिकट दिया है. इस बार सभी उम्मीदवार मठ के बाहर के हैं.

आजादी के बाद चौथा चुनाव कांग्रेस हार गई

आजादी के बाद पहली बार 1952 में लोकसभा चुनाव हुआ तो कांग्रेस ने जीत दर्ज थी. इसके बाद 1967 तक ये सीट कांग्रेस के पास रही, लेकिन 1967 में हुए चौथे लोकसभा चुनाव में गोरखनाथ मंदिर से मंहत दिग्विजयनाथ ने निर्दलीय रूप में जीत दर्ज की. इसके बाद 1970 में मंहत अवैद्यनाथ ने ये सीट जीती. 1971 में कांग्रेस ने फिर वापसी,लेकिन 1977 में फिर लोकदल के हरिकेश बहादुर से उसे मात मिली. हालांकि हरिकेश ने जीत के बाद  कांग्रेस का दामन थाम लिया. 1984 में कांग्रेस के मदन पाण्डेय ने यहां से आखिरी बार जीत दर्ज की. इसके बाद आज तक कांग्रेस पार्टी वापसी नहीं कर सकी है. 

29 साल से मठ के पास सीट

पिछले 29 साल से गोरखपुर की सियासत का सबसे बड़ा केंद्र मठ है. आदित्यनाथ के गुरु महंत अवैद्यनाथ 1989 में गोरखपुर लोकसभा सीट से हिंदू महासभा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. इसके बाद उन्होंने 1991 और 1996 के लिए बीजेपी के उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की. 

1998 में योगी ने विरासत संभाली

अवैद्यनाथ की सियासी विरासत 1998 में उनके उत्तराधिकारी और यूपी के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संभाली. योगी लगातार पांच बार यहां से सांसद बने. वे 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 में बीजेपी के उम्मीदवार के तौर पर जीते. गोरखपुर उपचुनाव में बीजेपी जीते या फिर सपा, कांग्रेस लेकिन एक बात निश्चित है कि नया सांसद मठ से बाहर का होगा.

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