30 साल से पीने के शुद्ध पानी को तरसती 20 गांव की जनता

क्या आप जानते हैं कि हरियाणा में 20 ऐसे गांव हैं, जिनके घरों में कोई मां-बाप अपनी बेटी देने को तैयार नहीं है। दरअसल, ये गांव हरियाणा के मेवात जिले के नगीना खंड के हैं। यहां की सबसे बड़ी समस्या पानी न होना है जिसके कारण लोगों का घर नहीं बस पा रहा है।  
30 साल से पीने के शुद्ध पानी को तरसती 20 गांव की जनता

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मेवात जिला के 443 गावों में करीब 60 फीसदी गावों में पीने योग्य पानी नहीं हैं, जमीनी पानी खारा है। मेवात जिला के कुछ गांवों के छोड़कर केवल अरावली पर्वत श्रंखला की तलहेटी में ही पीने लायक पानी है।

जहां भी वाटर लेवल काफी गहरा चला जाने की वजह से अधिक्तर बोरवैल खराब हो गये हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने 425 करोड रुपये की लागत से 2 अक्तूबर 2004 को पुन्हाना खण्ड के गांव मढियाकी में रेनीवेल परियोजना का शिलान्‍यास किया था।

30 से ये गांव है पानी के प्यासे

गांव का नाम राजाका पर पीने को पानी भी नसीब नहीं हैं। राजाका निवासी 70 वर्षीय समदखां और इसे खां का कहना है कि जब से उनको गांव बसा है तभी से पीने का पानी कि समस्या बनी हुई है।

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गांव के अंदर जमीनी खारा पानी है। करीब 30 साल पहले मेवात में बारिश हो जाती थी उनसे पानी का वाटर लेबल ऊपर आने की वजह से वे गांव में कच्चे कुएं से आठ से दस फीट तक खोदकर अपनी प्यास बुझा लेते थे।

 उसने गांव को वाटर सप्लाई से भादस और घाघस से तो जोड़ रखा है पर कभी उनमें पानी आता ही नहीं हैं।  गांव अकलीमपुर के सरपंच असरूदीन का कहना है कि उनके गांव पानी आता ही नहीं हैं। उनका आरोप है कि रैनीवैल के पैसे को खुर्द-बुर्द कर दिया गया है। कहते हैं, चुनाव आता है तो वोट लेकर चले जाते हैं है पानी का वादा। लेकिन बाद में कोई पूछने नहीं आता। 

हबीब निवासी गंडूरी का कहना है कि उनके गांव को संगेल से जोड रखा है पर उसमें कभी पीने का पानी आता ही नहीं हैं। अब तो उनके कुओं में भी पानी नहीं है। गावों के तालाब सूखे पड़े हैं। समाजसेवी खालिद हुसैन मढी का कहना है कि उनके इलाके में एक-दो गांव नहीं बल्कि पूरे 20 गांव है जो पिछले 30 साल से पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे हैं।

जब से शादी कर आई, तब से झेल रहे पानी की किल्लत

गावं मढी की 70 वर्षीय अजीजा और 80 वर्षीय बननी बुजुर्ग महिलाओं का कहना है कि जितनी परेशानी उन्हें 50 साल पहले थी अब उससे भी कहीं जयादा है। जब से वे शादी हाकर गांव में आई हैं तभी से वे पीने के पानी की किल्लत झेल रही हैं। 
इस इलाके के खिड्डी सरपंच, मजीद सरपंच, मास्टर अलीम का कहना है कि उनके करीब 20 गावों में पीने का पानी न होने की वजह से लड़कों के रिश्ते पर भी बहुत असर पडता है। बेटी का रिश्ते करते वाला सभी सहूलियतें देखते है लेकिन पानी की कमी उनके लडकों के रिश्तों में ही आड़े आगे आ रही है। फिरोजपुर झिरका से इनेलो विधायक नसीम अहमद का कहना है कि असल में भाजपा सरकार लोगों को पीने का पानी मुहैया ही नहीं कराना चहाती है। उन्होने कई बार विधानसभा और मेवात डवलपमेंट बोर्ड की मींटिग में पानी की किल्लत के मुद्दे उठाये हैं लेकिन अधिकारी सरकार के सामने झूठे आकडे़ पेश कर देते हैं। 

 
 

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