31 अक्टूबर के पहले राहुल की ताजपोशी, इस वजह से टला कुछ दिन कार्यक्रम

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का कार्यकाल दिसंबर 2015 में खत्म हो गया. उसके बाद सभी ने माना कि तब ही राहुल गांधी पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी संभाल लेंगे.31 अक्टूबर के पहले राहुल की ताजपोशी, इस वजह से टला कुछ दिन कार्यक्रमपहली बार आरुषि की मां नुपुर ने किया बड़ा खुलासा: जेल में एक लड़की ने ऐसे बदली उनकी जिंदगी…

लेकिन उनके बाद सियासी हालात के मद्देनजर लगातार दो बार दो सालों के लिए पार्टी ने सोनिया को एक्सटेंशन दिया और पार्टी के चुनाव दिसंबर 2017 तक के लिए टाल दिया गया. इसके बाद ये तय हुआ कि 31 अक्टूबर के पहले राहुल की ताजपोशी हो जाएगी.

फिर सूत्रों ने बताया कि नवंबर के पहले हफ्ते तक ताजपोशी खींच गई है. लेकिन उन्हीं सूत्रों के मुताबिक, अब राहुल की ताजपोशीहिमाचल में मतदान की तारीख यानी 9 नवंबर के बाद होने के आसार हैं.

दरअसल, पार्टी में संगठन के चुनाव 15 अक्टूबर को ही पूरे हो गए. ज्यादातर प्रदेशों से राहुल को अध्यक्ष बनाने का सर्वसम्मति से प्रस्ताव भी पास हो गया. सभी राज्यों ने नए प्रदेश अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष बनाने का अधिकार नए अध्यक्ष को सौंपने के प्रस्ताव भी पारित कर दिए.

इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को महज CWC की औपचारिक बैठक बुलानी थी और पार्टी की चुनाव अथॉरिटी को नए अध्यक्ष के चुनाव का शेड्यूल घोषित करना था. लेकिन अपने करीबी नेताओं की सलाह से सोनिया गुजरात चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद ही CWC की बैठक बुलाना चाहती थीं.

दरअसल, कांग्रेस को आशंका थी कि राहुल की ताजपोशी और गुजरात में पहले चरण के मतदान की तारीख में 15 से ज्यादा दिनों का अंतर होना चाहिए. वरना नेताओं, कार्यकर्ताओं में गुजरात चुनाव का फोकस बदल सकता है. 

इसी के बाद नवंबर के पहले हफ्ते में राहुल की ताजपोशी का मन बनाया गया.

लेकिन सोनिया की तबीयत बिगड़ने के साथ ही तमाम वरिष्ठ नेताओं ने सलाह दी है कि ताजपोशी को जब इतना टाला ही गया है, तो फिर क्यों ना हिमाचल चुनाव के मतदान की तारीख यानी 9 नवंबर के बाद ही किया जाए. आखिर हिमाचल में मतदान के ठीक पहले करने पर वही सियासी परेशानी हो सकती है, जिसकी आशंका गुजरात को लेकर थी.

वैसे भी CWC औपचारिक बैठक के बाद चुनावी प्रक्रिया में 10-15 दिन लगेंगे. ऐसे में अब लगता है कि राहुल की ताजपोशीहिमाचल में मतदान के बाद ही होने के आसार हैं. उसके बाद गुजरात में पहले चरण के मतदान से पहले एक महीने का अंतर है.

इसी बीच उपाध्यक्ष रहते अध्यक्ष का काम देख रहे राहुल की आधिकारिक तौर पर ताजपोशी हो जानी चाहिए.

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