34 साल बाद बन रहा है छठ पूजा पर ऐसा महासंयोग….

24 अक्टूबर को नहाय-खाय के साथ छठ पूजा की शुरुआत होने जा रही है. 34 साल बाद इसबार छठ पूजा पर ऐसा महासंयोग बनने जा रहा है जो अति कल्याणकारी है. 24 अक्टूबर यानी छठ पूजा का पहला दिन मंगलवार है और गणेश चतुर्थी है. गणेश जी हर काम मंगल ही मंगल करेंगे.34 साल बाद बन रहा है छठ पूजा पर ऐसा महासंयोग....भूलकर भी नहीं करना चाहिए छठ पूजा में ये 11 काम…

पहले दिन सूर्य का रवियोग भी है. ऐसा महासंयोग 34 साल बाद बन रहा है. रवियोग में छठ की विधि विधान शुरू करने से सूर्य हर कठिन मनोकामना भी पूरी करते हैं. चाहे कुंडली में कितनी भी बुरी दशा चल रही हो, चाहे शनि राहु कितना भी भारी क्यों ना हों, सूर्य के पूजन से सभी परेशानियों का नाश हो जाएगा. ऐसे महासंयोग में यदि सूर्य को अर्घ्य देने के साथ हवन किया जाए तो आयु बढ़ती है.

बिहार, झारखंड और पूर्वी यूपी के लोगों के लिए आस्था का महापर्व छठ 24 अक्टूबर से नहाय-खाय शुरू हो रहा है. यह पर्व कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी तिथि तक चलती है. इतने दिनों तक व्रतियां बिना अन्न का एक भी दाना किए निर्जला व्रत करती है. यही वजह है कि इसे महापर्व की श्रेणी में रखा गया है. बिहार वासियों का सबसे बड़ा पर्व छठ को पूरे देश में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. बिहार-झारखंड के लोग जहां भी रहते हैं वे इस पर्व को वहीं मनाते हैं.

कब से शुरू हो रही है पूजा

24 अक्टूबर 2017 (चतुर्थी) : नहाय-खाय

25 अक्टूबर 2017 (पंचमी) : खरना

26 अक्टूबर 2017 (षष्ठी) : शाम का अर्घ्य

27 अक्टूबर 2017(सप्तमी) : सुबह का अर्घ्य, व्रत का समापन

वैसे तो ये पर्व साल में दो बार मनाया जाता है. पहला चैत्र महीने में और दूसरा कार्तिक महीने में. भगवान सूर्य की उपासना के साथ छठ पर्व की शुरुआत होती है. कार्तिक महीने में छठ मानने का विशेष महत्व है. हिंदू धर्म में किसी भी पर्व की शुरुआत स्नान के साथ ही होती है और यह पर्व भी स्नान यानी नहाय-खाय के साथ होता है.

पहला दिन नहाय-खाय

इस मौके पर घर की पूरी तरह से सफाई कर स्वच्छ होकर व्रतियां शुद्ध शाकाहारी भोजन बनाती हैं. नहाय-खाय के दिन व्रतियों द्वारा स्नान और पूजन-अर्चन के बाद कद्दू व चावल के बने प्रसाद बनाएं जाते हैं फिर इसी प्रसाद को सभी ग्रहण करती हैं.

दूसरा दिन खरना

इस दिन से महिलाओं का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू होता है जो उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के बाद समाप्त होता है. इस दिन व्रती महिलाएं उपवास कर शाम में स्नानकर विधि-विधान से रोटी और गुड़ से बनी खीर का प्रसाद तैयार कर भगवान भास्कर की अराधना कर प्रसाद ग्रहण करती हैं.

तीसरा दिन शाम का अर्घ्य

तीसरे दिन सूर्य षष्ठी को पूरे दिन उपवास रखकर शाम के समय डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. इस दिन रात के समय छठी माता के गीत गाने और व्रत कथा सुनने की मान्यता है.

चौथा और अंतिम दिन सुबह का अर्घ्य

चौथे दिन सुबह के समय सूर्य निकलने से पहले ही घाट पर पहुंचना होता है और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. इसके बाद घाट पर छठ माता को प्रणाम कर उनसे संतान-रक्षा का वरदान मांगा जाता है. अर्घ्य देने के बाद घर लौटकर सभी में प्रसाद बांट कर फिर व्रती खुद भी प्रसाद खाकर व्रत खोलते हैं.

छठ की तैयारी और पूजन सामग्री

छठ की पूजा में एक-एक विधि-विधान को महत्व दिया गया है. इन विधि-विधानों में पूजन सामग्री विशेष महत्व है साथ ही इन सामग्री के बिना छठ पूजा अधूरा माना गया है. छठ पूजा के लिए जो पूजन सामग्री महवपूर्ण है इसका पूरा लिस्ट इस प्रकार है.

बॉस या पितल की सूप (सूपा), बॉस का दौरा, डलिया और डगरा, पानी वाला नारियल, गन्ना जिसमें पत्ता लगा हो, सुथनी, शकरकंदी, हल्दी और अदरक का पौधा, नाशपाती, नींबू बड़ा (टाब), शहद की डिब्बी, पान और साबूत सुपारी, कैराव, सिंदूर, कपूर, कुमकुम, चावल अक्षत के लिए, चन्दन, मिठाई.

इसके अलावा घर में बने हुए पकवान जैसे ठेकुवा, खस्ता, पुवा, जिसे कुछ क्षेत्रों में टिकरी भी कहते हैं, इसके अलावा चावल के लड्डू, जिसे लड़ुआ भी कहा जाता है, इत्यादि छठ पूजन के सामग्री में शामिल हैं.

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