5 रुपये के सिक्के ने बचाई आतंकियों से जान, बड़ी फिल्मी है इनकी कहानी

कारगिल युद्ध में एक जवान की जान 5 रुपये के सिक्के ने बचाई। यकीं नहीं होता न, लेकिन ये सच है। पढ़िए पूरी स्टोरी… 5 रुपये के सिक्के ने बचाई आतंकियों से जान, बड़ी फिल्मी है इनकी कहानी

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कारगिल युद्ध में टाइगर हिल ऑपरेशन के दौरान जांबाजी दिखाने वाले ग्रेनेडियर (अब सूबेदार) योगेंद्र सिंह यादव को परमवीर चक्र से नवाजा गया था। चंडीगढ़ पहुंचे योगेंद्र ने स्कूली छात्रों और युवाओं के साथ ऑपरेशन के अनुभव सांझे किए। उन्होंने बताया कि वे टाइगर हिल फतेह करने वाले 18 ग्रेनेडियर की घातक पलटून का हिस्सा थे। जब उनकी टीम टाइगर हिल पर चढ़ रही थी, तभी दुश्मनों ने ऊपर से हमला बोल दिया। 

उनके कमांडर और कई साथी जवान इस हमले में शहीद हो गए। वह भी बुरी तरह घायल हुए। तभी उनकी पलटून ने यह योजना बनाई कि चूंकि दुश्मन दिखाई नहीं दे रहा है इसलिए फायरिंग बंद कर बचे हुए जवान अपनी-अपनी पोजिशन संभाल लें। जब घंटों इंडियन पलटून की तरफ से कोई फायरिंग नहीं हुई, तो टाइगर हिल पर बैठी पाक सेना ने समझा कि भारतीय फौज के सभी जवान या तो मारे जा चुके हैं  या फिर उनका असलहा खत्म हो गया है। ये सोचकर पाक सेना के जवान पलटून की ओर बढ़ने लगे।

 उनके नजदीक आने की ताक  में बैठे भारतीय जवानों एकदम से बाहर आए और पाक जवानों पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। जोगेंद्र यादव ने भी 4 पाक सैनिकों को मारा था। लेकिन दुर्भाग्य यह था कि ये पलटून टाइगर हिल कवर करती, तब तक पाकिस्तान की रिफोर्समेंट (और जवान) वहां पहुंच गई और उन्होंने इस पलटून के सभी जवानों को घेरकर फायरिंग कर दी।

 

सभी जवान शहीद हो चुके थे, लेकिन योगेंद्र यादव बुरी तरह से खून से लथपथ वहीं साथियों के शवों के पास पड़े थे। उनके कपड़े फट चुकेथे और उनकी पैंट को वो हिस्सा जिसमें  उनका पर्स था, वो छाती पर पड़ा था। पाक सेना के अफसर ने जवानों को आदेश दिए कि एक बार मर चुके सभी भारतीय सेना के जवानों को फिर से गोलियां मारो, ताकि यदि कोई जिंदा है तो वो भी मर जाए। पाक जवानों ने ऐसा ही किया।
 जोगेंद्र सिंह यादव ने बताया कि पाक जवानों ने शवों पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। वह घायल थे, मृत नहीं, उन्हें भी बाजू, जांघ और कंधे पर 15 गोलियां लगी, वह चुपचाप पड़े गोलियां सहते रहे। लेकिन वह गोली जो उनकी जान ले सकती थी, वो छाती पर पड़े उनके पर्स में रखे पांच के सिक्कों पर लगी, वरना वो गोली उनके दिल को छलनी कर देती। जोगेंद्र यादव ने कहा कि उसके बाद पाकिस्तानी वहां से उन्हें भी मृत समझकर चले गए। 
 लेकिन वह सरक-सरक कर टाइगर हिल के उस हिस्से में पहुंचे, जहां पाक सेना का कैंप था, वहां उनकी सारी पोजिशन उन्होंने समझी, अफसर जो आदेश दे रहे थे, उसे सुना और फिर पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद एक नाले के सहारे गिरते-पड़ते वे नीचे तक पहुंचे और उन्होंने अपने अफसर को सारी सूचना दे दी। इसके बाद फौज ने टाइगर हिल को नई प्लानिंग के साथ हमला कर अपने कब्जे में लिया।

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