50 लाख के खर्च के बावजूद भी दफ्तर नहीं आए मंत्री जी!

पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार को बने पूरे साढ़े तीन महीने हो चुके हैं लेकिन पंजाब सरकार में एक ऐसे मंत्री भी हैं जो इन 3 महीनों में एक भी बार CM सचिवालय में स्थित अपने दफ्तर में नहीं गए हैं. हां, अपना मंत्री पद का चार्ज लेने के लिए जरूर गए थे. लेकिन, इन मंत्री महोदय ने उसके बाद कभी भी अपने ऑफिस में झांक कर नहीं देखा. इसकी वजह थी ऑफिस का लुक इनकी प्रोफाइल और स्टाइल के मुताबिक नहीं था.

50 लाख के खर्च के बावजूद भी दफ्तर नहीं आए मंत्री जी!

हम बात कर रहे हैं पंजाब के हाईप्रोफाइल और तेजतर्रार मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की. एक तरफ पंजाब सरकार कहती है कि वीआईपी कल्चर को खत्म करना है और खर्चों में कटौती करनी है. दूसरी तरफ हालत यह है कि पंजाब में किसान लगातार खुदखुशी कर रहे हैं और तीसरी स्थिति यह है कि पंजाब में बहुत सारी स्कीमें सिर्फ पैसे के अभाव के चलते बंद पड़ी है लेकिन इन सब के बावजूद मंत्री महादेव के ऐशो आराम और शानो-शौकत में कोई कमी नहीं आई है और पिछले 3 महीने से भी ज्यादा समय से नवजोत सिंह सिद्धू के ऑफिस में काम लगातार जारी है. ‘आज तक’ की टीम ने नवजोत सिंह सिद्धू के फाइव स्टार टाइप कार्यालय का एक जायजा लिया.

एक तरफ पंजाब के मुख्यमंत्री आज अपने सौ दिनों का हवाला देते हुए कह रहे थे कि हमने खर्चों में कटौती की है, वीआईपी कल्चर को खत्म किया है तो वहीं दूसरी तरफ सिद्धू साहब का यह आलीशान ऑफिस. इस ऑफिस में अभी तक सिद्धू साहब के चरण कमल एक बार भी ना पढ़ना जाहिर सी बात है. विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की पूरी कोशिश की है पूर्व कैबिनेट मंत्री दलजीत चीमा का कहना है कि सिद्धू को ना जनता से और ना ही अपने ऑफिस से कोई मतलब है. पंजाब से ज्यादा मुंबई में वक्त बिताते हैं और ऑफिस पर खर्च कटौती के बावजूद करोड़ों रुपए खर्च करना बताता है कि सरकार किस कदर पंजाब के लिए चिंता में डूबी हुई है.

जिस समय नवजोत सिंह सिद्धू के ऑफिस में रेनोवेशन का काम शुरू हुआ था उस समय खुद नवजोत सिंह सिद्धू और पंजाब के कई मंत्री समेत उनकी पत्नी नवजोत कौर ने कहा था कि कोई खर्चा नहीं हो रहा है सिर्फ इस कमरे में रंग-रोगन किया जा रहा है लेकिन इस रंग रोगन में लगभग 50 लाख के करीब सरकारी खजाना खर्च हो चुका है और पूरे फर्नीचर से लेकर फर्श और छत तक को बदला जा चुका है. लेकिन, कांग्रेस के मंत्री और सिद्धू के सहयोगी अभी भी इसे एक महल की जरूरत ही बता रहे हैं.

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