6 घंटों के लिए बुत बनी थी वो कलाकार, लोगों ने पार कर दी दरिंदगी की सारी हदें

लोगों को जब छूट मिलती है तो वो उसका पूरा फायदा उठाने की कोशिश करते हैं, फिर चाहे इसके लिए किसी भी हद तक जाकर लोगों को परेशान ही क्यों ना करना पड़े।

 

नर्इ दिल्ली।

लोगों को जब छूट मिलती है तो वो उसका पूरा फायदा उठाने की कोशिश करते हैं, फिर चाहे इसके लिए किसी भी हद तक जाकर लोगों को परेशान ही क्यों ना करना पड़े। युगोस्लाविया की मशहूर कलाकार मरीना एब्रोमोविक ने बरसों पहले एक प्रयोग किया था। उन्होंने एक स्टेज पर ‘रिदम’ नाम की एक स्टेज परफाॅर्मेंस दी। इस दौरान लोगों ने उनके साथ जो किया वो देखकर कोर्इ भी हिल जाए। 

कलाकार एब्रोमोविक को अपनी इस परफोरमेंस के दौरान 6 घंटे तक सीधा खड़ा रहना था। उनके सामने स्थित एक टेबल पर 72 चीजें रखी गर्इं। इन चीजों को देखने के लिए आए लोग उन चीजों के साथ एब्रोमोविक के साथ कुछ भी कर सकते थे। एब्रोमोविक ने कहा कि छह घंटे के दौरान लोग इन चीजों में से कुछ भी उठाकर उन पर इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी उनकी होगी। 

रात 8 बजे से 2 बजे तक के इस शो में लोगों ने सामान उठाना शुरू कर दिया। सामान में एक खुशी देने वाला सामाना था आैर दूसरा दुखी करने वाला। इन चीजों में पंख, फूल से लेकर चाकू, रेजर, ब्लेड आैर भरी हुर्इ बंदूक तक कर्इ चीजें थीं। हालांकि लोगों ने उनके साथ जो किया वो बेहद खौफनाक था। 

इस दौरान एक शख्स ने उनका गला काट दिया तो कुछ ने उन्हें बिठाकर परेशान करना शुरू कर दिया। कुछ लोगों ने उनके शरीर पर कर्इ तरह की बातें लिख दी तो कुछ ने उनके शरीर पर तरह-तरह की चीजें बांध दी। यहां तक की एक शख्स ने तो लोडेड बंदूक का मुंह उनकी आेर कर थमा दी। वहीं दूसरे ने उनके कपड़े उतार दिए। हालांकि दरिंदगी के इस दौर में कुछ लोगों ने उन्हें फूल भी थमाए। 

एब्रोमोविक ने कहा कि जब एक शख्स मेरे कपड़े उतार रहा था तो मुझे एेसा लग रहा था कि कोर्इ मेरा रेप कर रहा है। उन्हाेंने कहा कि आखिरी के दो घंटे में हालात बद से बदतर होते गए। लोगों ने उन्हें परेशान करने आैर नुकसान पहुंचाने में कोर्इ कसर नहीं छोड़ी। 

इस प्रयोग से साफ था कि जब भी लोगों को मौका मिलता है तो वो दूसरों को दुख पहुंचाने में पीछे नहीं रहते हैं। 1974 के उन छह घंटों को मरीना ने अपने जीवन के सबसे खराब वक्त की संज्ञा देते हुए कहा कि वे जीवन में कभी भी वो वक्त दोबारा नहीं जीना चाहेंगी। 

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