बैंक से आये फोन तो हो जाइये होशियार, ठगे जा सकते हैं आप!

लखनऊ: वैसे तो बैंक कभी किसी को किसी बात के लिए फोन नहीं करता है, पर अगर आप के पास बैंक अधिकारी या कर्मचारी बन कोई फोन कर तो कृपा कर सावधान हो जाइयेगा। हो सकता है कि फोन करने वाला न तो बैंक का अधिकारी हो और न ही कर्मचारी हो बल्कि वह एक ठग या साइबर जालसाज हो सकता है। बैंक अधिकारी व कर्मचारी के नाम पर जालसाज लोगों को फोन कर उनके एटीएम कार्ड ब्लाक होने की बात कहते हैं और फिर एटीएम चालू करने के नाम पर खाते, एटीएम कार्ड की सारी डीटेल हासिल कर खाते से रुपये निकाल लेते हैं। राजधानी लखनऊ में रहने वाली चार महिलाओं को इस तरह जालसाजों ने फोन किया और उनके खाते से लाखों रुपये निकाल लिये।

 


पहली घटना- मडिय़ांव के रहीमनगर डुडौली गांव में सुशील प्रधान अपने परिवार के साथ रहते हैं। उनकी पत्नी रीना प्रधान का अलीगंज स्थित इण्डियन ओवरसीज बैंक में बचत खाता है। रीना का कहना है कि चंद रोज पहले उनके पास एक फोन आया। फोनकर्ता ने खुद को बैंक का अधिकारी बताया और जानकारी दी कि उनका बैंक का एटीएम बंद कर दिया गया। एटीएम बंद होने की बात सुन रीना परेशान हो गयीं। इसके बाद फोनकर्ता ने दोबारा से एटीएम कार्ड चालू करने की बात कही और इसी का झांसा देकर रीना से उनके खाते व एटीएम की जानकारी मांगी। फोनकर्ता को बैंक अधिकारी समझ रीना ने सारी जानकारियों दे दी। बस इसी के बाद जालसाज ने 7 बार में रीना के खाते से 1,39,935 लाख रुपये निकाल डाले। बैंक से रुपये निकाले जाने का मैसेज आने पर रीना को अपने साथ ठगी का पता चला। उन्होंने इस बारे में अपने पति को बताया। इसके बाद पीडि़त शिकायत लेकर बैंक पहुंचे तो उनको पता चला कि उनके साथ ठगी की गयी है। बैंक ने रीना व उसके पति को इस संबंध में एफआईआर दर्ज कराने की सलाह दी। इसके बाद रीना ने इस संबंध में अलीगंज थाने में एफआईआर दर्ज करायी है।

दूसरी घटना- इसके अलावा अलीगंज के सेक्टर बी इलाके में शशि श्रीवास्तव अपने परिवार के साथ रहती है। उनका अलीगंज के कपूरथला स्थित भारतीय स्टेट बैंक में बचत खाता है। बताया जाता है कि चंद रोज पहले शशि श्रीवास्तव के पास एक फोन आया। फोनकर्ता ने खुद को बैंक मैनेजर बताया। उसने शशि श्रीवास्तव को अपनी बातों में उलझाकर एटीएम व खाते की सारी जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद जालसाज ने शशि श्रीवास्तव के खाते से 50 हजार रुपये निकाल लिये। बैंक से रुपये निकाले जाने का मैसेज देख शशि के पैरों तले जमीन खिसक गयी। उन्होंने इस बात की शिकायत बैंक से की और अपना एटीएम कार्ड ब्लाक कराया। इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम सेल में अपनी शिकातय दर्ज करायी। साइबर क्राइम सेल ने उनको स्थानीय थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कहा। अब इस मामले में ठगी का शिकार हुई शशि श्रीवास्तव ने अलीगंज थाने में एफआईआर दर्ज करायी है।

तीसरी घटना- चिनहट के जैम इंकलेव में गजाला नसरीन अपने परिवार के साथ रहती हैं। उनका गोरखपुर स्थित कोटक महिन्द्रा की एक शाखा में बचत खाता है। बताया जाता है कि 17 अगस्त को गजाला के पास एक फोन आया। फोनकर्ता ने खुद को बैंक का कर्मचारी बताया और जानकारी दी कि उनके एटीएम कार्ड की सेवाएं रोक दी गयी हैं। दोबारा से एटीएम कार्ड चालू कराने के लिए कुछ जानकारियों देनी होंगी। गजाला ने भी फोनकर्ता को बैंक का कर्मचारी समझ लिया और उसको अपने खाते व एटीएम की सारी जानकारी दे दी। इसके बाद जालसाज ने गजाला के खाते से 19999 रुपये निकाल लिये। बैंक से मैसेज आने पर गजाला को अपने साथ हुई ठगी का पता चला। उन्होंने सबसे पहले अपना एटीएम ब्लाक कराया और इस संबंध में चिनहट कोतवाली में धोखाधड़ी व 66 आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करायी।

चौथी घटना- गोमतीनगर के विजयखण्ड इलाके मेें अभिषेक विक्रम सिंह अपने परिवार के साथ रहते हैं। उनकी बुजुर्ग मां नीरजा विक्रम सिंह का यूनियन बैंक आफ इण्डिया में बचत खात है। बताया जाता है कि 16 अगस्त को नीरजा विक्रम सिंह के पास फोन आया। फोनकर्ता ने खुद को बैंक का अधिकारी बताया और उनके पुराने एटीएम कार्ड को रिन्यू करने की बात कही। बुजुुर्ग नीरजा विक्रम सिंह ने भी फोनकर्ता को बैंक अधिकारी समझ उसको एटीएम व खाते की सारी जानकारी दे दी। इसके बाद जालसाज ने उनके खाते से 24500 रुपये निकाल लिये। बुजुर्ग नीरजा विक्रम सिंह को रुपये निकाले जाने का पता तक नहीं चल सका। उनके बेटे अभिषेक विक्रम सिंह ने जब खाता चेक किया तो उनको ठगी का पता चला। इस संबंध में अभिषेक विक्रम सिंह ने गोमतीनगर थाने में एफआईआर दर्ज करायी है।

 

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