Big Action:सीएम योगी ने पूरा किया वादा, उठाया कड़ा कदम!

लखनऊ: यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ जो वादा कुछ समय पहले किया था, आज उस वादे को उन्होंने पूरा कर दिया। कुछ दिन पहले ही सीएम ने गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज में मासूमों की मौत के बाद सीएम ने कहा था कि साज ऐसी होगी की वह मिसाल बन जायेगी। आज सीएम ने जांच रिपोर्ट आने के बाद वैसा ही किया। सीएम ने पहले को चिकित्सा शिक्षा की प्रमुख सचिव अनीता जैन को हटाने के साथ ही बीआरडी मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल सहित अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया।
अब सीएम के आदेश पर हजरतगंज कोताली में एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया गया है।


बीआरडी मेडिकल कालेज में हुई घटना को लेकर सीएम ने उच्चस्तरीय जांच का आदेश दिया था। मंगलवार को इस पूरे मामले की जांच रिपोर्ट सीएम के सामने पेश की गयी। जांच समिति में स्वास्थ्य सचिव आलोक कुमार, वित्त सचिव मुकेश मित्तल और पीजीआइ के चिकित्सा अधीक्षक डॉ.हेमचंद्र को शामिल किया गया था। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के बाद कई स्तरों पर अधिकारियों की उदासीनता और लापरवाही की बातें सामने आई थीं।

बताया गया था कि ऑक्सीजन की आपूर्ति करने वाली फर्म ने कॉलेज के प्राचार्य से लेकर महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा और अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा तक को कई पत्र भेजे थेए फिर भी किसी ने इसे गंभीरता से लेकर भुगतान के लिए तत्परता नहीं बरती। आखिरकार ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद हो गई लेकिनए तब पूरा सिस्टम गोरखपुर की ओर दौड़ उठा। गोरखपुर के जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट में बीआरडी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र को जहां ऑक्सीजन का समय से भुगतान न करने का दोषी माना गया था।

वहीं ऑक्सीजन आपूर्ति के जिम्मेदार एनेस्थीसिया विभाग के एचओडी डॉ सतीश को बिना अनुमति और बिना किसी को जिम्मेदारी सौंपे मुंबई चले जाने का दोषी पाया गया था। 100 बेड एइएस वार्ड के नोडल प्रभारी डॉ कफील खान को सिलसिलेवार कई गड़बडिय़ों के लिए दोषी माना गया जबकि स्टॉक रजिस्टर और ऑक्सीजन की लॉग बुक में हेराफेरी के लिए चीफ फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल को भी जिम्मेदार माना गया था।

इसी तरह बजट मिलने के बाद समय से प्राचार्य को सूचना न देने और ऑक्सीजन भुगतान की पत्रावली प्रस्तुत न करने के लिए लेखा अनुभाग के कार्यालय सहायक उदय प्रताप शर्मा, लेखा लिपिक संजय कुमार त्रिपाठी और सहायक लेखाकार सुधीर कुमार पांडेय को दोषी माना गया था। इसी तरह ऑक्सीजन की आपूर्ति करने वाली फर्म पुष्पा सेल्स को भी सप्लाई बंद करने का दोषी माना गया था। डीएम की रिपोर्ट में हालांकि प्राचार्य डॉ राजीव मिश्र की पत्नी डॉ पूर्णिमा शुक्ला का नाम नहीं था।

आयुष विभाग ने उच्चस्तरीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद डॉ शुक्ला को निलंबित कर दिया था। सीएम ने मंगलवार को इस मामले में हजरतगंज कोतवाली में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। इस मामले में पूर्व प्रचार्य डाक्टर राजीव कुमार सहित अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। देर रात तक इस मामले में एफआईआर दर्ज होने की उम्मीद है।

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