68500 सहायक अध्यापक भर्ती में आरक्षण पर सरकार को देना होगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में विशेष आरक्षित वर्ग के लिए आरक्षण के मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति डीके सिंह ने आशीष कुमार सिंह व अन्य लोगों की याचिका पर दिया है। सरकार ने टीईटी परीक्षा में विशेष आरक्षित वर्ग के लिए पांच फीसदी आरक्षण दिया था। इस भर्ती में यह लाभ नहीं दिया जा रहा है। कोर्ट ने राज्य सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में आरक्षण पर सरकार को देना होगा जवाब

शुरू से विवादों में परिषदीय शिक्षक भर्ती

उल्लेखनीय है कि परिषदीय स्कूलों की 68500 शिक्षक भर्ती शुरू से विवादों में रही है। पहली बार लिखित परीक्षा कराने का विरोध हुआ, फिर उत्तीर्ण प्रतिशत को लेकर शिक्षामित्रों ने विरोध किया। शासन ने नौ जनवरी को जारी आदेश में जो उत्तीर्ण प्रतिशत तय किया, उसे 21 मई को बदल दिया। अभ्यर्थियों ने परीक्षा के छह दिन पहले हुए बदलाव के आधार पर इम्तिहान दिया। अगस्त में रिजल्ट देने की बारी आई तो हाईकोर्ट ने 21 मई के आदेश को नहीं माना। परिणाम के पांच दिन पहले फिर नौ जनवरी को जारी उत्तीर्ण प्रतिशत बहाल हुआ। 13 अगस्त को जारी शिक्षक भर्ती के रिजल्ट में 41556 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हो सके। रिजल्ट विवाद अब भी चल रहा है।

6009 उत्तीर्ण अभ्यर्थी चयन से बाहर

दो दिन पहले लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को चयनित करने का मानक एकाएक बदल दिया गया। भर्ती की लिखित परीक्षा 68500 पदों के सापेक्ष कराई गई उसके सफल अभ्यर्थियों की चयन सूची में पदों का आकलन 41556 के सापेक्ष किया गया। इससे 6009 अभ्यर्थी चयन सूची से बाहर हो गए हैं। सिर्फ 34660 अभ्यर्थियों को ही जिला आवंटित हो सका है। चयन का नियम बदलने से हाहाकार मच गया है। हालांकि बाद में अपर मुख्य सचिव प्रभात कुमार ने ट्वीट करके आश्वस्त किया है कि इसका आदेश चंद दिनों में जारी होगा। 

बदलाव के आधार पर इम्तिहान 

सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की बारी आई तो तय पद 68500 की जगह सफल अभ्यर्थियों 41556 को ही आधार बनाकर चयन किया गया। इसीलिए शुक्रवार को जारी सूची में केवल 34660 अभ्यर्थियों का विभिन्न जिलों में आवंटन हुआ है। बेसिक शिक्षा परिषद ने नियुक्ति देने के लिए 21 से 28 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन लिया। इसमें 887 अभ्यर्थियों ने दावेदारी ही नहीं की। एनआइसी ने 40669 अभ्यर्थियों की ओर से दिए गए जिलों के विकल्प, उनके गुणांक और जिलों में उपलब्ध रिक्तियों के सापेक्ष आरक्षण के अनुरूप जिला आवंटन किया। प्रक्रिया में आरक्षित वर्ग के उच्च मेरिट वाले अभ्यर्थी अनारक्षित वर्ग की सीटें पाने में सफल में रहे। इससे लिखित परीक्षा में सफल 6009 अभ्यर्थी चयन सूची से बाहर हो गए हैं, इनमें से अधिकांश सामान्य वर्ग के हैं। अभ्यर्थी चयन सूची का विरोध कर रहे हैं। इस मामले को कोर्ट में भी चुनौती देने की तैयारी है। 

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