खुशखबरी: 7वां वेतन आयोग अलाउंसेस के मुद्दे पर करीब 50 लाख कर्मचारियों का ख़त्म हो सकता है इन्तजार….!

करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों (central employess) के लिए आज शाम पांच बजे के करीब होने वाली कैबिनेट की बैठक से क्या कोई खुशखबरी आएगी. यह अभी कहा नहीं जा सकता लेकिन कर्मचारियों की उम्मीदें सातवें आसमान पर हैं. खुशखबरी: 7वां वेतन आयोग अलाउंसेस के मुद्दे पर करीब 50 लाख कर्मचारियों ख़त्म हो सकता है इन्तजार....!

बता दें कि सातवें वेतन आयोग से जुड़े अलाउंस (7th Pay Commission Allowances) के मुद्दे पर कर्मचारियों को सरकार से अब फैसले का इंतजार है. आज की कैबिनेट की बैठक में अलाउंस से जुड़े कैबिनेट नोट पर चर्चा की सरकारी कर्मचारी उम्मीद लगाए बैठे थे. जानकारी के लिए बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी विदेश दौरे से रात में ही लौटे हैं और इस वजह से आज सुबह होने वाली बैठक को शाम पांच बजे के लिए निर्धारित किया गया है. एनडीटीवी के मिली जानकारी के अनुसार इस बैठक का एजेंडा अभी तक तय नहीं हुआ है. इससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट पर अलाउंस समिति की रिपोर्ट पर तैयार कैबिनेट नोट पर आज चर्चा हो सकती है. फिर साफ कर दें कि यह अभी तय नहीं है कि बैठक के एजेंडे में यह मुद्दा है या नहीं है.

ये भी पढ़े: अमेरिका समेत तीन देशों की यात्रा संपन्न कर स्वदेश लौटे पीएम मोदी

जानकारी के लिए बता दें कि पिछले कुछ हफ्तों से किसी न किसी वजह से सातवें वेतन आयोग से जुड़े अलाउंस के मुद्दे पर कैबिनेट के बैठक में चर्चा नहीं हो पा रही है और इस कर्मचारियों में इंतजार बढ़ता जा रहा है और वे सभी इस प्रकार की देरी से आक्रोशित हो गए हैं. कभी वित्तमंत्री अरुण जेटली तो कभी वित्त मंत्रालय के अधिकारी के दिल्ली में न रहने की वजह से इस मुद्दे को कैबिनेट की बैठक में नहीं रखा गया. ऐसा कहा जा रहा है.

बता दें कि यूनियन लीडर कहते चले आ रहे हैं कि सरकार की ओर आश्वासन दिया गया है कि इस हफ्ते ही इस मुद्दे को लिया जाएगा. इस आधार पर यह कहा जा रहा है कि सरकार इसी हफ्ते इस मद्दे का समाधान कर देगी. कर्मचारी संघों के सूत्रों का कहना है कि सचिवों की अधिकार प्राप्त समिति ने इस मुद्दे पर चर्चा के बाद कैबिनेट नोट तो तैयार कर लिया है.

ये भी पढ़े: अभी अभी: इस बड़े स्टार को हुई गंभीर बीमारी, सुनकर पूरा बॉलीवुड हुआ परेशान…

बता दें कि केंद्रीय कर्मचारियों को अन्य अलाउंसेस के अलावा एचआरए के मुद्दे पर सरकार के फैसले का इंतजार है. यह इंतजार अब एक साल का हो गया है. उल्लेखनीय है कि पिछले साल 28 जून को ही सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने का फैसला लिया था. सरकार ने वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से लागू करने का ऐलान किया था. लेकिन वेतन आयोग की कई सिफारिशों के बाद केंद्रीय कर्मचारियों ने कई मुद्दों पर अपनी आपत्ति जताई थी. इन मुद्दों में अलाउंसेस को लेकर विवाद भी था.

सरकार ने इसके लिए एक समिति का गठन किया था. समिति ने अपनी रिपोर्ट 27 अप्रैल को वित्तमंत्री को सौंप दी थी. वित्तमंत्रालय की ओर से यह रिपोर्ट अधिकार प्राप्त सचिवों की समिति को भेजा गया था. अब इस रिपोर्ट पर चर्चा के बाद 1 जून को सचिवों की अधिकार प्राप्त समिति ने एक कैबिनेट नोट तैयार किया है. अब माना जा रहा है कि हर बुधवार को होने वाली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस बारे में फैसला हो सकता है.

कर्मचारी संघों के सूत्रों का कहना है कि कर्मचारियों से चर्चा के लिए बनी लवासा समिति ने सातवें वेतन आयोग की अलाउंसेस को लेकर की गई कुछ सिफारिशों में संशोधन के सुझाव दिए हैं.

जानकारी के लिए बता दें कि सातवां वेतन आयोग से पहले केंद्रीय कर्मचारी 196 किस्म के अलाउंसेस के हकदार थे. लेकिन सातवें वेतन आयोग ने कई अलाउंसेस को समाप्त कर दिया या फिर उन्हें मिला दिया जिसके बाद केवल 55 अलाउंस बाकी रह गए. तमाम कर्मचारियों को कई अलाउंस समाप्त होने का मलाल है.

बता दें कि सातवें वेतन आयोग (Seventh Pay Commission) द्वारा केन्द्रीय कर्मचारियों को दिए जाने वाले कई भत्तों को लेकर असमंजस की स्थिति है. नरेंद्र मोदी सरकार ने 2016 में सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) की सिफारिशों को मंजूरी दी थी और 1 जनवरी 2016 से 7वें वेतन आयोग की रिपोर्ट को लागू किया था. लेकिन, भत्तों के साथ कई मुद्दों पर असहमति होने की वजह से इन सिफारिशें पूरी तरह से लागू नहीं हो पाईं.

बता दें कि वेतन आयोग (पे कमीशन) ने अपनी रिपोर्ट में एचआरए को आरंभ में 24%, 16% और 8% तय किया था और कहा गया था कि जब डीए 50 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा तो यह 27%, 18% और 9% क्रमश: हो जाएगा. इतना ही नहीं वेतन आयोग (पे कमिशन) ने यह भी कहा था कि जब डीए 100% हो जाएगा तब यह दर 30%, 20% और 10% क्रमश : एक्स, वाई और जेड शहरों के लिए हो जाएगी. कर्मचारियों का कहना है कि वह इस दर को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं.

 

You May Also Like

English News