TAX: जीएसटी के बाद केन्द्र सरकार आयकर में बड़े बदलाव करने की कोशिश में !

नई दिल्ली: केन्द्र की मोदी सराकर देश में जीएसटी लागू करने के बाद अब आयकर क्षेत्र में बड़े बदलाव करने का मन बना रही है। इस बारे में सुझाव देने के लिए सरकार ने एक छह सदस्यीय कार्य दल का गठन किया है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से बुधवार को यहां जारी एक बयान के मुताबिक बीते एक और दो सितंबर को आयोजित राजस्व ज्ञान संगम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि आयकर कानूनए 1961 को तैयार हुए 50 वर्ष से अधिक हो चुके हैं और इसका मसौदा दोबारा तैयार करने की जरूरत है।


कानून की समीक्षा करने और देश की आर्थिक जरूरतों के अनुरूप नए प्रत्यक्ष कर कानून का मसौदा तैयार करने के लिए सरकार ने एक कार्य दल के गठन को मंजूरी दी है। कार्य दल के संयोजक केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ;सीबीडीटीद्ध के सदस्य अरबिंद मोदी होंगेए जबकि चार्टर्ड अकाउंटेंट गिरीश आहूजाए ईएंडवाई के भारतीय प्रमुख राजीव मेमानीए अहमदाबाद के कर अधिवक्ता मुकेश पटेलए इक्रीयर में सलाहकार मानसी केडिया और भारतीय राजस्व सेवा के पूर्व अधिकारी जीसी श्रीवास्तव कार्य दल के सदस्य होंगे।

मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियन कार्य दल के स्थायी आमंत्रित सदस्य होंगे। कार्यदल को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी है। बयान के मुताबिकए कार्य दल को चार मुद्दों पर विचार करना है। ये मुद्दे हैं . विभिन्न देशों में प्रचलित प्रत्यक्ष कर व्यवस्थाए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख प्रचलित व्यवस्थाए देश की आर्थिक जरूरतें और अन्य संबंधित मुद्दे।

उल्लेखनीय है कि पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार के दौरान भी प्रत्यक्ष कर व्यवस्था में बदलाव की रूपरेखा खींची गई थी। उस दौरान एक समिति के सुझावों के आधार पर प्रत्यक्ष कर संहिता ;डीटीसीद्ध का मसौदा तैयार किया गया था और उसके बाद एक विधेयक वर्ष 2010 में लोकसभा में पेश भी किया गया। उस समय कोशिश थी कि अगर विधेयक कानून बन गयाए तो पहली अप्रैल 2012 से इसे लागू किया जाएगा।

उसमें वैसे तो कर की दरें आम लोगों के लिए 10, 20 और 30 फीसदी तक रखे जाने की बात कही गई थीए लेकिन कई तरह की कर रियायतों को खत्म करने का भी प्रस्ताव था। उसमें कर व्यवस्था को सरल बनाने का भी प्रावधान था। उस मसौदे को वित्त मंत्रालय की स्थायी समिति के पास भेजा गयाए जिसने अपनी रिपोर्ट 2012 में दे दी। लेकिन मनमोहन सिंह सरकार इसे लोकसभा में पास कराने में सफल नहीं रहे।

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