Violence: महाराष्ट्र में जातीय हिंसा, एक की मौत, तोडफ़ोड़, आगजनी,देखिए तस्वीरें!

महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के पुणे में दो समुदायों के बीच हुई जातीय हिंसा में एक ही मौत हो गयी। यह हिंसा सोमवार को हुई थी। अब इस हिंसा का असर महाराष्ट्र के अन्य इलाकों में भी देखा जा रहा है। मंगलवार को मुंबई के अलावा हड़पसर व फुरसुंगी में बसों पर पथराव किया गया। इसके बाद औरंगाबाद और अहमदनगर के लिए बस सेवा निरस्त कर दी गई।

बता दें कि नए साल के मौके पर पुणे के कोरेगांव भीमा गांव में शौर्य दिवस मनाया गया था जिसके बाद से दो समुदायों के बीच झड़प हो गई थी। इस दौरान एक शख्स की मौत भी हो गई। शाम करीब साढ़े चार बजे पुणे से अहमदनगर के बीच सभी बस सेवाएं बहाल हो गईं। पुणे की जातीय हिंसा पर महाराष्ट्र सीएम ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सरकार को बदनाम करने की साजिश है।

सरकार ने इसके न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। सीएम देवेंद्र फडनवीस ने मृतक के परिजनों को 10 लाख का मुआवजा देने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सरकार को बदनाम करने की साजिश है और साथ ही अफवाहों पर ध्यान न देने की सभी से अपील की। पुणे की जातीय हिंसा की आग सोमवार को महाराष्ट्र के अन्य इलाकों में फैल गई। इस दौरान मुंबई के कुर्ला, मुलुंड, चेंबूर और ठाणे में सरकारी बसों पर पथराव और रास्ता रोको की घटनाएं सामने आईं।

कई इलाकों में तनाव की स्थिति कायम है। चेंबूर में ऐम्बुलेंस में तोडफ़ोड़ की गई है। उधर कुर्ली,गोवंडी के बीच रेल यातायात भी बाधित हुआ है। अहमदनगरए अकोलाए औरंगाबादए धुलेए परभणी में भी बवाल हुआ है। नवी मुंबई को जोडऩे वाली हार्बर लाइन चेंबूर में ठप है। घाटकोपर में ईस्टर्न एक्सप्रेसवे को जाम किया गया है। इस घटना पर एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी।

शरद पवार का कहना है कि घटना के पीछे कौन लोग हैं इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने आगे यह भी कहा कि शौर्य दिवस के 200 साल पूरे होने पर अधिक लोगों को इक_ा होने की संभावना पहले से थी इसलिए प्रशासन को इस पर नजर रखनी चाहिए थी।

बता दें कि 1 जनवरी 1818 के दिन अंग्रेजों और पेशवा बाजीराव द्वितीय के बीच कोरेगांव भीमा में युद्ध हुआ था जिसमें पेशवा को अंग्रेजों से पटखनी मिली थी। ईस्ट इंडिया कंपनी की फौज में बड़ी संख्या में दलित भी शामिल थे। इस घटना के इस बार 200 साल पूरे होने पर सोमवार को कोरेगांव भीमा में कार्यक्रम का आयोजन हुआ और जश्न मनाया गया।

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