Analysis: गुजरात और यूपी चुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल!

लखनऊ: यूपी से लेकर गुजरात में जहां भाजपा की मौजूदा सरकार है, वहीं अब गुजरात में होने वाले विधानसभा और यूपी में होने वाले निकाय चुनाव को लेेकर भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। दोनों जगहोंं पर होने वाले चुनाव सत्तारूढ़ भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बने हैं।


गुजरात में भाजपा तीन बार से लगातार सरकार बनाती चली आ रही है और गुजरात मॉडल दिखा कर ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव की रैलियों में देश से भाजपा के लिए वोट मांगे। गुजरात में लगातार सत्तासीन होने की वजह से सरकार विरोधी लहर जनता में दिख रही है।

सत्ता विरोधी लहर से निपटने के लिए भाजपा नेतृत्व भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के दौरे करा प्रदेश में वापसी की आस लगा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात का मुख्यमंत्री पद छोडऩे के बाद से ही गुजरात में भाजपा की स्थिति बिगडऩे लगी जिसके चलते गुजरात में मुख्यमंत्री तक बदलने पड़े। वहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की दोस्ती और हार्दिक पटेल का सरकार विरोध भाजपा की मुश्किलों में इजाफा कर रहा है।

कुछ इसी तरह की स्थिति उत्तर प्रदेश में भी नजर आ रही है। कानून-व्यवस्था को मुद्दा बनाकर प्रदेश की सत्ता तक पहुंचने वाली भाजपा के शासनकाल में कानून-व्यवस्था सुधारने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। निकाय चुनाव में सफलता हासिल करने के लिए योगी सरकार और भाजपा नेतृत्व ने मंत्रियों औैर जिलों के नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है।

दोनों राज्य भाजपा की 2019 की दिशा भी तय करेंगे। प्रदेश में सभी विपक्षी दल भाजपा को घेरने की रणनीति बना रहे हैं जिसकी मिसाल बहुजन समाज पार्टी है। बसपा अब तक निकाय चुनाव में प्रत्याशी नहीं उतारती थी लेकिन इस बार उसने भी सिम्बल पर चुनाव लडऩे का ऐलान किया है।

प्रदेश के अधिकांश नगर निगमों पर भाजपा का ही कब्जा रहा है और राजधानी लखनऊ में पिछले दो दशक से भाजपा का ही मेयर चुना जाता रहा। उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा राजधानी लखनऊ से दो बार महापौर रहे हैं। ऐसे में लखनऊ सहित प्रदेश के नगर निगमों पर अपनी पकड़ बरकरार रखना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा।

गुजरात विधानसभा चुनाव की तिथियों का ऐलान हो चुका है, जबकि यूपी निकाय चुनाव का ऐलान शुक्रवार को होने की संभावना है। दोनों की जगहोंं पर होने पर चुनाव को लेकर भाजपा कोई भी कोरकसर नहीं छोडऩा चाह रही है। जीत हासिल करने के लिए पीएम मोदी से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने सारी ताकत लगा दी है।

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