ATM कार्ड पर हैकर्स की नजर, सिर्फ 4500 की मशीन से हो रहा करोड़ों का फ्रॉड

 दिल्ली एनसीआर में एटीएम फ्रॉड जोरों पर है। हैकर कभी एटीएम बदलकर, कभी एटीएम क्लोन कर, कभी एटीएम मशीन हैंग तो कभी सिम कार्ड स्वैप कर धड़ल्ले से लोगों के बैंक खातों में सेंध लगा रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर के थानों में प्रतिदिन औसतन 100 से ज्यादा एटीएम फ्रॉ़ड की शिकायतें आती हैं। एक माह में दिल्ली के शकरपुर थाने में ही एटीएम फ्रॉड के 300 मामले सामने आ चुके हैं। बावजूद एटीएम फ्रॉड के मामलों में लगाम लगने की जगह इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। एटीएम फ्रॉड के बढ़ते मामलों का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि रविवार को पूर्वी दिल्ली स्थित शकरपुर थाने में देर रात तक एटीएम फ्रॉड की शिकायत करने वालों की लंबी लाइन लगी रही। बताया जा रहा है कि सिर्फ 4500 रुपये की स्कीमर मशीन के जरिये हैकर एटीएम क्लोन करके करोड़ों के वारे न्यारे कर लेते हैं।

एटीएम क्लोन कर खाते से रुपये निकालने या ट्रांसफर करने की सबसे ज्यादा घटनाएं आधी रात को होती हैं। हैकर रात 11:45 बजे से 12:15 के बीच सबसे ज्यादा ट्रांजेक्शन करते हैं। दरअसल हर एटीएम की प्रतिदिन की लिमिट निर्धारित होती है। अमूमन एटीएम की एक दिन की लिमिट 25 से 50 रुपये होती है। ऐसे में हैकर ज्यादा रुपये निकालने के लिए एक ट्रांजेक्शन रात 12 बजे से पहले और दूसरा ट्रांजेक्शन रात 12 बजे के बाद करते हैं। ऐसे में उन्हें बहुत कम समय में दो दिन की लिमिट ट्रांजेक्शन के लिए मिल जाती है। ज्यादातर उपभोक्ता उस वक्त सो रहे होते हैं। ऐसे में उन्हें ट्रांजेक्शन का पता नहीं चलता। सुबह उठने पर उपभोक्ता को फ्रॉड का पता लगता है।

एटीएम से फर्जी ट्रांजेक्शन होना आपकी समस्याओं की शुरूआत है। फ्रॉड का पता चलते ही पीड़ित पुलिस के पास एफआइआर कराने जाता है। आइटी एक्ट का मामला होने की वजह से पुलिस अमूमन इसकी एफआइआर करने से बचती है। आइटी एक्ट के मामलों की जांच इंस्पेक्टर या उससे सीनियर रैंक के अधिकारी ही कर सकते हैं। एटीएम फ्रॉड समेत आइटी एक्ट की जानकारी रखने वाले पुलिसकर्मियों की संख्या न के बराबर है और शिकायतों की भरमार है। बावजूद अगर आपने किसी तरह एफआइआर दर्ज करा ली तो भी रुपये मिलने या आरोपी के पकड़ने जाने की कोई गारंटी नहीं है। इस तरह की 90 फीसद एफआइआर में पुलिस क्लोजर रिपोर्ट लगा देती है

लक्ष्मी नगर में रहने वाले गिरीश के खाते से रविवार को 15 हजार रुपये निकल गए। ये ट्रांजेक्शन मंडावली के देना बैंक एटीएम से हुई थी। वह शकरपुर थाने में एफआइआर कराने पहुंचे तो वहां से उन्हें मंडावली थाने भेज दिया गया। मंडावली थाने ने भी एफआइआकर करने से इंकार कर दिया। वह दोबारा शकरपुर थाने आए, बावजूद उनकी एफआइआर नहीं हुई।

एटीएम फ्रॉड या बैंक खाते में सेंध लगने के ज्यादातर मामलों में बैंकों की लापरवाही भी जिम्मेदार होती है। बैंक अपने एटीएम बूथ पर गार्ड तैनात नहीं करते। ऐसे में हैकर को मशीन में कार्ड क्लोन करने के लिए स्कीमर लगाने या बूथ में घुसकर मदद के नाम पर किसी का कार्ड बदलने का भरपूर मौका मिलता है। इस तरह की ठगी का शिकार होने पर अगर पीड़ित बैंक से संपर्क करे तो भी उन्हें गुमराह किया जाता है। बैंक एफआइआर कराने को कहता है, क्योंकि उसे भी पता है कि आसानी से रिपोर्ट दर्ज नहीं होगी। अगर आपने एफआइआर करा ली तो भी बैंक ये कहकर टाल देते हैं कि उनके पास पुलिस से कोई सूचना नहीं आई है। जबकि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर बैंक को सूचना दे या उन्हें अपनी जांच रिपोर्ट दे। ऐसे में पीड़ित बैंक, पुलिस और कोर्ट के चक्कर काटता रह जाता है।

एटीएम कार्ड क्लोन कर खाते से रुपये निकालने वाले एक गिरोह के तीन बदमाशों को गुरुग्राम की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह में अभी तीन-चार और बदमाश शामिल हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। गिरफ्तार बदमाशों में एक सेक्टर-चार रेलवे रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में काम करता था। ये रेस्टोरेंट शिवपुरी निवासी पवन आहूजा का है। शुक्रवार को पवन के खाते से 47 हजार रुपये निकल गए। उन्होंने साइबर सेल को शिकायत देते हुए बताया कि कुछ दिनों पहले उनके एक ग्राहक के खाते से भी 15 हजार रुपये निकल गए थे। जांच के बाद साइबर सेल ने रेस्टोरेंट में काम करने वाले नारायणपुर, अलवार, राजस्थान निवासी आकाश और उसके दो साथियों को गिरफ्तार कर लिया। आकाश ने ही अपने मालिक और उनके ग्राहक का कार्ड क्लोन कर उनके खाते से रुपये निकाले थे।

करीब एक माह पहले गुरुग्राम स्थित HDFC बैंक के एक एटीएम बूथ से 100 से ज्यादा ग्राहकों के एटीएम कार्ड का डाटा चोरी कर उनके बैंक खाते से कई बार में 15 लाख रुपये निकालने का मामला सामने आया था। इन सभी पीड़ितों ने मार्च व अप्रैल महीने में गुरुग्राम के सेक्टर-45 स्थित एचडीएफसी एटीएम से रुपये निकाले थे। यहीं से एटीएम मशीन में स्कीमर लगा 14 दिनों में ग्राहकों के कार्ड का गोपनीय डाटा चोरी हुआ था।

साइबर क्राइम विशेषज्ञों के अनुसार एटीएम कार्ड से डाटा चोरी करने के लिए एक छोटी सी डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे स्कीमर कहते हैं। हैकर स्कीमर को मशीन के कार्ड रीडर स्लॉट के ऊपर लगा देते हैं। मशीन में कार्ड इनसर्ट करते ही डाटा स्कीमर में सुरक्षित हो जाता है। ये स्कीमर आकार, डिजाइन व रंग में बिल्कुल मशीन के कार्ड रीडर स्लॉट से मिलता-जुलता होता है। इसलिए सामान्य तौर पर यूजर कार्ड स्लॉट पर लगे स्कीमर की पहचान नहीं कर सकते हैं। पेट्रोल पंप, रेस्टोरेंट, होटल, दुकान जहां कहीं भी क्रेडिट व डेबिट कार्ड का इस्तेमाल होता है, वहां स्कीमर के जरिए गोपनीय डाटा चोरी कर आपके खाते में सेंध लगाई जा सकती है। ये डिवाइस इतना छोटा होता है कि हैकर इसे आराम से जेब में रखकर घूम सकता है। इसलिए कार्ड से भुगतान करते वक्त काफी अलर्ट रहें।

स्कीमर से डाटा चोरी करने के साथ ही हैकर को उपभोक्ता के डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड का चार अंकों का पिन नंबर भी पता होना चाहिए। तभी वह कार्ड से ट्रांजेक्शन कर सकता है। इसके लिए हैकर बूथ के अंदर एक हिडेन कैमरा लगाते हैं जो मशीन के कीपैड पर फोकस करता है। यूजर द्वारा कीपैड पर पिन डालते ही वह हिडेन कैमरे में रिकार्ड हो जाता है

कार्ड क्लोन के लिए इस्तेमाल होने वाला स्कीमर प्रतिबंधित है। बावजूद ये दिल्ली एनसीआर के कुछ प्रमुख आईटी मार्केट में चोरी-छिपे बिकता है। इसके अलावा बहुत ई-कॉमर्स वेबसाइट पर ऑनलाइन भी स्कीमर की बिक्री हो रही है। इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की जरूरत है।

स्कीमर से डाटा चोरी करने के बाद हैकर अपने लैपटॉप अथवा कंप्यूटर से डिवाइस को कनेक्ट कर डाटा सेव कर लेते हैं। इसके बाद अगर हैकर को कार्ड स्वैप कर शॉपिंग या कोई और खर्च करना है तो वह मार्केट से डेबिट कार्ड के आकार के ही खाली प्लास्टिक कार्ड खरीदेगा। इसके बाद उस कार्ड पर एक विशेष मशीन के जरिए चोरी किए गए डाटा की मैगनेटिक स्ट्रीप बनाकर पेस्ट कर देगा। अगर हैकर को ऑनलाइन शॉपिंग या ट्रांजेक्शन करना है तो उसे कार्ड क्लोन करने की भी जरूरत नहीं है। हैकर चोरी किए गए डाटा व पिन के जरिए ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर सकता है।

स्कीमर से डाटा चोरी करने के बाद हैकर अपने लैपटॉप अथवा कंप्यूटर से डिवाइस को कनेक्ट कर डाटा सेव कर लेते हैं। इसके बाद अगर हैकर को कार्ड स्वैप कर शॉपिंग या कोई और खर्च करना है तो वह मार्केट से डेबिट कार्ड के आकार के ही खाली प्लास्टिक कार्ड खरीदेगा। इसके बाद उस कार्ड पर एक विशेष मशीन के जरिए चोरी किए गए डाटा की मैगनेटिक स्ट्रीप बनाकर पेस्ट कर देगा। अगर हैकर को ऑनलाइन शॉपिंग या ट्रांजेक्शन करना है तो उसे कार्ड क्लोन करने की भी जरूरत नहीं है। हैकर चोरी किए गए डाटा व पिन के जरिए ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर सकता है।

सावधानी ही बचाव है

-एटीएम मशीन में कार्ड इनसर्ट करने से पहले उसके होल्डर को हिलाकर देख लें। अगर स्कीमर लगा होगा तो वह निकल आएगा।

-एटीएम मशीन का इस्तेमाल करने से पहले कैंसल बटन को दबाकर देंख लें, वह दब रहा है या नहीं।

-एटीएम से रुपये निकालते वक्त अगर कोई आपके पीछे आकर खड़ा हो जाए तो उसे बाहर जाने को बोलें।

-एटीएम से अगर रुपये न निकल रहे हों तो किसी अनजान से मदद न लें। एटीएम पर तैनात गार्ड की मदद ली जा सकती है।

-बिना गार्ड वाले या सूनसान जगहों पर मौजूद एटीएम का इस्तेमाल करने से बचें।

-एटीएम से रुपये निकालते वक्त या कार्ड से खरीदारी करते वक्त अपना पासवर्ड छिपाकर डालें।

-पेट्रोल पंप, होटल, दुकान, रेस्टोरेंट जैसी जगहों पर भी कार्ड अपने सामने ही स्वैप कराएं।

-अगर आपका एटीएम या क्रेडिट कार्ड काले रंग की मैगेनेटिक स्ट्रिप वाला है तो उसे बैंक से बदलवाकर चिप वाले नए कार्ड लें।

-महीने में कम से कम एक बार अपनी ऑनलाइन बैंकिंग, डेबिट व क्रेडिट कार्ड का पासवर्ड या पिन जरूर बदलें।

-अपने इंटरनेट बैंकिंग, डेबिट-क्रेडिट कार्ड का पासवर्ड, ओटीपी या पिन किसी को न बताएं।

-बैंक फोन पर खाते या कार्ड से संबंधित कोई जानकारी कभी नहीं मांगता है।

-भरोसेमंद वेबसाइट पर ऑनलाइन भुगतान करें। जिन वेबसाइट के शुरू में https लिखा होता है वो अमूमन सुरक्षित होती हैं।

-डेबिट कार्ड के साथ उसका पिन नंबर लिखकर न रखें।

-अगर जरूरत न हो तो कार्ड में इंटरनेशनल भुगतान की सुविधा एक्टिवेट न कराएं।

-कार्ड और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की प्रतिदिन की लिमिट उतनी ही रखें जितनी जरूरत हो।

-कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग हैक होने पर तत्काल उसे ब्लॉक कराएं और जितनी जल्दी हो सके साइबर सेल व बैंक को सूचित करें।

-फर्जी ऑनलाइन भुगतान की तुरंत शिकायत करने पर रकम वापस आने की संभावना 80 फीसदी तक होती है।

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