बड़ा खुलासा: देश की सबसे बड़ी ATM ठगी का मास्टरमाइंड न‌िकला दसवीं फेल….

अब तक की देश में सबसे बड़ी एटीएम क्लोन‌िंग करने वाला साइबर क्रिमिनल्स गैंग का सरगना रामबीर 10वीं फेल न‌िकला। पुल‌िस की पकड़ में आने पर उसने कई खुलासे क‌िए। इसके आगे की कहानी पर आपको यकीन नहीं होगा।बड़ा खुलासा: देश की सबसे बड़ी ATM ठगी का मास्टरमाइंड न‌िकला दसवीं फेल....अभी-अभी: मोदी सरकार को लगा एक और बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने मौलिक अधिकार मानने से किया इनकार…

झज्जर (हरियाणा) के बरहाना का रहने वाला रामबीर बेहद शातिर है। पढ़ाई में तो उसका दिमाग नहीं लगा, लेकिन अपराध की दुनिया की एबीसीडी उसने अच्छे से सीखी। 2012 में पड़ोस के गांव के सुनील से उसने एटीएम ठगी का ज्ञान लिया। 

उनसके बताया क‌ि पैसे के लालच में वह साइबर क्राइम का मास्टर माइंड बन गया। एटीएम ठगी के मामले में गिरफ्तारी के बाद 2016 में उसने एटीएम कार्ड क्लोनिंग का तरीका अपनाया। लेकिन पहली ही बार में उत्तराखंड पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुल‌िस का मानना है क‌ि यह देश की सबसे बड़े साइबर अटैक में से एक है।

कहा क‌ि एटीएम की-पैड में माचिस की तीली फंसाने के बाद एटीएम निष्क्रिय कर ग्राहकों के खातों से पैसा निकालने का तरीका सीखा। ठगी से पैसा मिलने पर उसने सात लोगों का गिरोह बना लिया। लेकिन वह इस ठगी में पकड़ा गया और जेल गया।

ये राज्य थे टारगेट 

छूटने के बाद शराब तस्करी की। ज्यादा पैसा कमाने की भूख उसे दोबारा साइबर क्राइम की दुनिया में ले आई। वर्ष 2016 में रामबीर ने दिल्ली में एटीएम क्लोनिंग का काम सीखा। पहली बार दिल्ली में एटीएम में स्कीमर डिवाइस और कैमरे के जरिये डाटा चोरी कर पैसा निकालने का प्रयास किया।
 
लेकिन सफल नहीं होने पर लेह, जम्मू-कश्मीर चला गया। वहां सीधे-साधे लोगों को एटीएम ठगी का शिकार बनाया। अक्तूबर 2016 में साथी प्रवीण के साथ लेह में पकड़ा गया। सात माह जेल में रहने के बाद गांव चला आया।
 
उसके दिमाग में कार्ड क्लोनिंग से पैसा कमाने का फितूर था। दिल्ली के बाद दून आकर एटीएम में स्कीमर और कैमरा लगाकर डाटा चोरी करने के बाद लाखों रुपये निकाले, लेकिन पकड़ा गया। रामबीर के साथ पकड़े गए जगमोहन निवासी बरहाना बेरी, झज्जर और सुनील निवासी रोहतक भी आठवीं पास हैं। 

पहाड़ी राज्य थे टारगेट 
रामबीर ने पूछताछ में बताया कि पहाड़ी भोले-भाले होते हैं। जल्दी शक भी नहीं करते हैं। एटीएम बूथ के अंदर दो से तीन लोगों के घुसने पर भी एतराज नहीं करते हैं। यही वजह रही कि रामबीर ने जम्मू-कश्मीर और लेह-लद्दाख में ठगी के बाद उत्तराखंड के देहरादून को क्लोनिंग के लिए चुना।  

प्रॉपर्टी में लगाता था पैसा 
मास्टर माइंड रामबीर एटीएम ठगी से होने वाली कमाई को प्रॉपर्टी खरीदने में लगाता था। उसके नाम कई प्रॉपर्टी है। क्लोनिंग कर पैसा उड़ाने से पहले उसने एक महिला से 50 लाख की प्रॉपर्टी का सौदा भी किया था। पुलिस ने उसकी प्रॉपर्टी की छानबीन भी शुरू कर दी है। 

प्रवीण समेत एक अन्य निशाने पर
रामबीर और उसके साथियों की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ ने अब प्रवीण समेत एक अन्य को अपने रडार पर ले लिया है। प्रवीण एटीएम और क्लोनिंग तकनीकी की जानकारी रखता है। देहरादून के एटीएम से डाटा चोरी करने के बाद प्रवीण की मदद से ही दिल्ली में क्लोनिंग कार्ड तैयार किए गए। एसटीएफ को लैपटॉप, स्कीमर डिवाइस, कैमरा, एक कार और स्कॉर्पियो के इस्तेमाल की जानकारी मिली है। रिमांड के बाद इनकी बरामदगी की जाएगी।

दूसरे राज्यों की पुलिस भी ले सकती है रिमांड
रामबीर और उसके साथियों की बृहस्पतिवार को न्यायालय में पेशी होगी। इसके बाद देहरादून पुलिस उन्हें रिमांड लेकर पूछताछ करेगी। देहरादून पुलिस रामबीर और उसके साथियों की गिरफ्तारी की सूचना राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली पुलिस को भी देगी, ताकि वहां की पुलिस भी रिमांड लेकर उनसे पूछताछ कर सके। देहरादून पुलिस ने अन्य राज्यों की पुलिस से संपर्क करना शुरू कर दिया है। 

लोगों की कमाई पर करते थे ऐश
पहली बार झज्जर में एसटीएफ की छापेमारी की भनक लगने पर रामबीर और उसके साथी दिल्ली से हवाई जहाज से गोवा भागे। हवाई जहाज से उनकी यात्रा करने की पुष्टि हुई है। गोवा में 12 दिन एक होटल में रुके। वहां से वापस हवाई जहाज से दिल्ली आए। पुलिस की सक्रियता की खबर सुनकर ट्रेन से कोल्हापुर, महाराष्ट्र और राजस्थान भागते रहे। 

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