Big News: मथुरा में हुआ शिक्षक भर्ती में बड़ा घोटाला, एसटीएफ ने 16 को किया गिरफ्तार!

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2016-17 में बेसिक शिक्षा विभाग मथुरा मेें की गयी शिक्षकों की भर्ती में बड़ी घोटालेबाजी गयी थी। इस धांधली का खुलासा मंगलवार को यूपी एसटीएफ ने किया है। एसटीएफ ने मथुरा बीएसए दफ्तर में तैनात कनिष्ठï लिपिक सहित 16 लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गये आरोपियों ने 13 शिक्षक और दो कम्प्यूटर आपरेटर शामिल हैं। आरोपियों के पास से चार लाख रुपये नकद, पांच मोबाइल फोन, एक कम्प्यूटर और नियुक्ति के संबंध में दस्तावेज मिले हैं। शिक्षक भर्ती में आपात्र लोगों से 10-10 लाख रुपये लेकर उनकी भर्ती की गयी थी।


एडीजी कानून-व्यवस्था आनंद कुमार ने बताया कि कुछ समय पहले इस बात की शिकायत मिली थी कि मथुरा जनपद में वर्ष 2016-17 में हुई जूनियर और प्राइमरी टीचर भर्ती में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की गयी थी। कई लोगों को फर्जी दस्तावेज के आधार पर नियुक्ति दे दी गयी थी। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसटीएफ को छानबीन के लिए लगाया था।

एसटीएफ ने जब अपनी छानबीन शुरू की तो भर्ती संबंधित पूरी प्रक्रिया में गड़बड़ी मिली। कई चयनित लोगों के दस्तावेज फर्जी पाये गये। इस छानबीन के आधार पर एसटीएफ ने मंगलवार को मथुरा बीएसए दफ्तर में तैनात कनिष्ठï लिपिक मथुरा निवासी महेश शर्मा, सहित मथुरा निवासी मनीश कुमार शर्मा, विंदेश कुमार, देवेन्द्र शिकरवार, दीप करन, मनोज कुमार वर्मा, तेजवीर सिंह, पायल शर्मा, भूपेन्द्र कुमार, योगेन्द्र सिंह, चिंदानंद उर्फ चेतन, मोहित भारद्वाज, सुभाष, रवेन्द्र सिंह और पुष्पेन्द्र सिंह को गिरफ्तार किया। एसटीएफ ने पकड़े गये आरोपियों के पास से चार लाख रुपये, पांच मोबाइल फोन, एक कम्प्यूटर और नियुक्ति संबंधित दस्तावेज मिले।

बीएसए दफ्तर को किया गया सील
एडीजी कानून-व्यवस्था आनंद कुमार ने बताया कि पकड़े गये कनिष्ठï लिपिक महेश शर्मा ने इस धांधलेबाजी में और भी कई लोगों के शामिल होने की बात बतायी है। फिलहाल एसटीएफ मथुरा बीएसए आफिस को सील कर दिया है। एडीजी ने बताया कि अब बीएसए दफ्तर को बीएसए की मौजूदगी में खोला जायेगा और फिर सारे दस्तावेजों की एक-एक कर जांच की जायेगी।

10-10 लाख रुपये लेकर की गयी थी भर्ती
आईजी एसटीएफ ने वर्ष 2016-17 में शिक्षा विभाग में शिक्षकों की भर्ती की जिम्मेदारी कुछ जिलों बीएसए को दी गयी थी। उस वक्त मथुरा जनपद में संजीव कुमार सिंह बीएसए थे। मथुरा जनपद में 257 शिक्षिकोंं की भर्ती हुई थी। इस भर्ती में कई ऐसा लोगों को नौकरी दी गयी थी जो नौकरी की शर्तों को पूरा नहीं करते थे। छानबीन में इस बात का पता चला है कि ऐसा लोगों से 10-10 लाख रुपये लेकर उनको नियुक्ति पत्र दिया गया था। एडीजी ने बताया कि इस मामले में मथुरा के बीएसए की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

पकड़े गये कुछ टीचर भी करते थे दलाली
एडीजी कानून-व्यवस्था ने बताया कि एसटीएफ के हत्थे चढ़े कुछ टीचर चेतन, सुभाष, रवेन्द्र सिंह और पुष्पेन्द्र सिंह भी इस धांधली के खेल में शामिल है। उन लोगों ने न सिर्फ फर्जी दस्तावेज के आधार पर नौकरी हासिल की थी, बल्कि इस खेल में दलाली का भी काम किया था।

अब अन्य जिलों में हुई भर्ती की भी हो सकती है जांच
एडीजी कानून-व्यवस्था ने बताया कि शिक्षक भर्ती के संबंध में मथुरा जनपद से शिकायत मिली थी। इस आधार पर छानबीन की गयी और गैंग को पकड़ा गया। अब उस वक्त अन्य जिलों मेें हुई भर्ती पर सवाल उठने लगे हैं। ऐसे में अगर जरूरत पड़ी तो बाकी जिलों में हुई भर्ती की भी जांच करायी जायेगी।

अब तक 100 से अधिक शिक्षक मिले फर्जी
एडीजी आनंद कुमार ने बताया कि अभी तक की गयी जांच में इस बात का पता चला है कि 100 लोग गलत ढंग से नियुक्त हुए थे। उन्होंने बताया कि अभी जांच चल रही तो संख्या और भी बढ़ सकती है। उन्होंने इस बात का भी खुलासा किया हैइ कई शिक्षक तो ऐसे मिले हंै जिन्होंने नौकरी के आवेदन तक नहीं किया था और उनको रुपये लेकर नौकरी दे दी गयी थी।

6 माह से सभी शिक्षक स्कूलों में पढ़ा रहे थे
एडीजी कानून-व्यवस्था आनंद कुमार ने बताया कि फर्जी ढंग से नियुक्ति पाये सभी शिक्षकों को 6 माह पहले अलग-अलग स्कूल में ज्वाइन कराया गया था। इसके बाद पहली ज्वाइनिंग के बाद सभी को दूसरे स्कूल में तबादला कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि तबादले के पीछे शायद मकसद यह था कि फर्जी नियुक्ति पाये शिक्षकों के बारे में किसी को कुछ पता न चल सके। 6 माह से सभी शिक्षक अपना वेतन भी पाने लगे थे। उन्होंने बताया कि फर्जी नियुक्ति हासिल करने वाले सैकड़ों शिक्षकों ने वेतन लेकर सरकारी खजाने का नुकसान भी पहुंचाया है।

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