#ChhattisgarhElections2018: कांग्रेस ने हासिल किया जादुई आंकड़ा, सीएम के चार नाम सामने !

रायपुर। #ChhattisgarhElections2018 चुनावी नतीजे और रुझान यह साफ कर चुके हैं कि छत्तीसगढ़ की जनता ने रमन सिंह की सरकार को नकारते हुए कांग्रेस पर भरोसा जजाया है। यहां की 90 में से 55 से भी अधिक सीटों पर कांग्रेस बढ़त बनाए हुए है। बीजेपी 24 सीटों और अजीत जोगी के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस एवं बसपा गठबंधन सात सीटों और 1 सीट पर अन्य आगे हैं। इसके साथ ही यह स्पष्ट होता दिख रहा है कि कांग्रेस अगली सरकार बनाने जा रही है।
बीजेपी 15 सालों में पहली बार सत्ता से बाहर होती दिख रही है। इसके साथ ही कांग्रेस की तरफ से यह सवाल उठ रहा है कि सत्ता में आने की स्थिति में पार्टी की तरफ से कौन मुख्यमंत्री बनेगा। अभी 4 चेहरे सीएम रेस में सबसे आगे दिख रहे हैं।


छत्तीसगढ़ की राजनीति में टीएस सिंह देव का नाम वरिष्ठ नेताओं में शुमार होता है। 31 अक्टूबर 1951 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में जन्मे टीएस सिंह देव का पूरा नाम त्रिभुवनेश्वर शरण सिंह देव है। टीएस सिंह देव वर्तमान में छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। ीएस सिंह देव सरगुजा रियासत के पूर्व राजा हैं और लोग उन्हें प्यार से टीएस बाबा के नाम से पुकारते हैं। टीएस बाबा ने इतिहास में एमए किया है। वह भोपाल के हमीदिया कॉलेज के छात्र रहे हैं। साल 2008 में हुए विधानसभा चुनावों में टीएस सिंह देव ने पहली बार चुनाव लड़ा।

वह सरगुजा जिले की अंबिकापुर सीट से चुनाव मैदान में उतरे और उन्होंने बीजेपी के अनुराग सिंह देव को 948 वोटों से हराया। साल 2013 के चुनाव में भी टीएस सिंह देव अंबिकापुर से ही मैदान में उतरे इस बार भी उनका मुकाबला बीजेपी के अनुराग सिंह देव से ही था। साल 2013 के चुनाव में टीएस बाबा ने अनुराग सिंह को 19 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। 6 जनवरी 2014 को टीएस सिंह देव छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता विपक्ष चुने गए। टीएस सिंह देव 2008 से अंबिकापुर विधानसभा सीट से चुनाव जीतते आ रहे हैं। साल 2013 में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान दिए गए शपथ पत्र के मुताबिक टीएस सिंह देव 500 करोड़ से अधिक की संपत्ति के मालिक हैं।

वह छत्तीसगढ़ के सबसे अमीर विधायक हैं अंबिकापुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते समय दाखिल किए गए अपने में टीएस बाबा ने 514 करोड़ की संपत्ति का शपथपत्र दिया थ। इस कड़ी में दूसरा नाम कांग्रेस प्रदेश कमेटी के प्रमुख भूपेश बघेल का नाम है। वह पाटन सीट से मैदान में उतरे हैं। राज्य में राजनीति के केंद्र बिंदुओं में से एक पाटन विधानसभा क्षेत्र में इस बार उनके सामने भाजपा ने मोती लाल साहू के रूप में एक नए चेहरे को चुनावी अखाड़े में उतारा है। अपने तेवरों से छत्तीसगढ़ की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान बनाने वाले राजनेताओं में शुमार बघेल का नाता विवादों से भी कम नहीं रहा है।

सीडी कांड की वजह से भूपेश बघेल सुर्खियों में रहे हैं। इसके चलते उन्हें जेल जाना पड़ाए लेकिन उन्होंने जमानत लेने से इनकार कर दिया था। 23 अगस्त 1961 को जन्मे बघेल कुर्मी जाति से आते हैं। बात 1980 के दशक की है जब छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश का हिस्सा हुआ करता था। उस वक्त भूपेश बघेल ने पॉलिटिक्स में अपनी पारी की शुरुआत यूथ कांग्रेस के साथ की। दुर्ग जिले के रहने वाले भूपेश यहां के यूथ कांग्रेस अध्यक्ष बने। वे 1990 से 94 तक जिला युवक कांग्रेस कमेटीए दुर्ग ग्रामीण के अध्यक्ष रहे।

भूपेश बघेल वह छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी समाज के 1996 से वर्तमान तक संरक्षक बने हुए हैं। मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड के 1993 से 2001 तक निदेशक भी रहे हैं।  2000 में जब छत्तीसगढ़ अलग राज्य बना तो वह पाटन सीट से विधानसभा पहुंचे। इस दौरान वह कैबिनेट मंत्री भी बने। 2003 में कांग्रेस के सत्ता से बाहर होने पर भूपेश को विपक्ष का उपनेता बनाया गया।

अक्टूबर 2014 में उन्हें छत्तीसगढ़ कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया और वे तब से इस पद पर हैं। भूपेश बघेल का विवादों से भी काफी नाता रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री चरणदास महंत छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के बड़े नेताओं में शुमार किए जाते हैं। वह भी सीएम की रेस में हैंण् उनका राजनीतिक करियर 2009 में अपने शिखर पर पहुंचा जब 15वीं लोकसभा के लिए वह छत्तीसगढ़ से अकेले कांग्रेसी सांसद थे।

महंत का राजनीतिक जीवन मध्य प्रदेश विधानसभा के साथ शुरू हुआ। वह 1980 से 1990 तक दो कार्यकाल के लिए विधानसभा सदस्य रहे। 1993 से 1998 के बीच वह मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री रहे।

तमरध्वज साहू समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और उन्होंने मात्र 1 महीने में राज्य में चुनाव लडऩे के लिए पार्टी की क्या रणनीति होनी चाहिए उसे तैयार करने में महती भूमिका निभाई। वह कांग्रेस अध्यक्ष के भी करीबी है। राहुल ने उन्हें पार्टी के बैकवैर्ड क्लासेज डिपार्टमेंट का चेयरमैन बनाया था। इसके बाद उन्हें पार्टी की वर्किंग कमेटी में जगह दी। वह दुर्ग सीट से चुनाव लड़े हैं। छत्तीसगढ़ में साहू समुदाय की आबादी 16 प्रतिशत है। जानकारों का कहना है कि अगर कांग्रेस उन्हें मुख्यमंत्री बनाती है तो इससे जनता में अच्छा संदेश जाएगा।

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