Dogs: कुत्तों के आंतक से सहमे हैं यहां के लोग, अब तक कई कुत्तों को उतारा गया मौत के घाट!

सीतापुर: कुत्तों को इंसानों का सबसे वफादार जानवर कहा जाता है, पर कभी-कभी यही जानवर इंसानों की जान के दुश्मन भी बन बैठते हैं। आज कल यूपी की राजधानी लखनऊ से सटे सीतापुर के खैराबाद इलाके में ऐसा ही कुछ हो रहा है। यहां के कुत्ते आदमखोर हो गये है और अब तक इन कुत्तों ने 9 बच्चों को अपना शिकार बना डाला है। अब गांव के लोग ने इन कुत्तों को मारने की बीड़ा उठा लिया है। कुत्तों को देख ही गांव के लोग उनको मौत के घाट उतार दे रहे हैं।


खैराबाद क्षेत्र में आदमखोर कुत्तों का जबरदस्त आतंक है। ये कुत्ते अब तक नौ मासूमों को नोचकर खा चुके हैंए जबकि करीब 18 बच्चों को बुरी तरह जख्मी कर चुके हैं। मंगलवार को जब इन कुत्तों ने तीन बच्चों को निवाला बनायाए तब क्षेत्र के लोगों का डर आक्रोश में बदल गया।

बुधवार को देखा गया कि बद्री खेड़ा, कोलिया, महेशपुर, पहाड़पुर,रहिमाबाद, गुरपलिया, नेवादा, टिकरिया, जैनापुर, जैती खेड़ा, कस्बा खैराबाद, लड्डूपुर आदि गांवों के सैकड़ों ग्रामीण अपना काम छोड़कर आदमखोरों की तलाश में जुट गए हैं। हालत यह है कि खेत, बाग, तालाब हर तरफ लोग कुत्तों को तलाशते और उन्हें मौत के घाट उतारते नजर आए।

ऐसे परिवार जिन्होंने अपने बच्चों को खोया हैए वे बेहद आक्रोशित नजर आ रहे थे। खैराबाद क्षेत्र में करीब 30 कुत्तों को ग्रामीणों ने मौत के घाट उतार दिया है। हलांकिए प्रशासन सिर्फ दो कुत्तों के मारे जाने की ही पुष्टि कर रहा है। इधर नरही की प्रधान सुमन जायसवाल ने बताया कि उनके क्षेत्र में दो कुत्तों के मारे जाने की खबर है।

ठीक इसी तरह से कोलिया के प्रधान अतीक अहमद ने बताया कि उनके क्षेत्र में 1 कुत्ता मारा गया है। खैराबाद क्षेत्र में कुत्तों से दहशत का आलम ये है कि लोग अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए उन्हें घर में ही कैद किए हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे घर में बंद जरूर हैं लेकिन इससे वे सुरक्षित है।

महिलाएं जहां भी कुत्ता देखती हैं अपने बच्चों को गोद में उठा लेती हैं। क्या गांव, क्या खेत-खलिहान। हर तरफ आदमखोरों की दहशत साफ नजर आ रही है। अपने कलेजे के टुकड़ों को खोने वाले परिवार बेहद दुखी हैं।

पीडि़तों का कहना था कि इतना बड़ा हादसा होने के बावजूद भीए जिम्मेदार अफसर सुध तक नहीं ले रहे हैं। पीडि़तों ने यहां तक कह डाला कि जो मौतें हुईं उनकी जिम्मेदारी प्रशासन की है। अगर समय रहते प्रशासन चेत जाता तब और मौतों की नौबत न आती। वहीं जानकारों का मानना है कि कुत्तों को मांस न मिलने की वजह से वह आदमखोर हो गये हैं।

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