EC के ऐलान से फिर विवाद, गोरखपुर उपचुनाव में क्यों हो रही है देरी…

चुनाव आयोग के एक और ऐलान ने फिर से विवादों को जन्म दे दिया है, उसने देश में लंबे समय से रिक्त पड़े 7 में से 3 लोकसभा सीटों पर उपचुनाव कराने के तारीखों की घोषणा की जबकि 4 सीटों के लिए तारीखों का ऐलान नहीं किया.EC के ऐलान से फिर विवाद, गोरखपुर उपचुनाव में क्यों हो रही है देरी...

लोकसभा के जिन 3 सीटों पर उपचुनाव के तारीखों का ऐलान हुआ है उन सीटों के नाम हैं राजस्थान से अलवर और अजमेर तथा पश्चिम बंगाल से उल्बरिया लोकसभा सीट. यहां के सीटिंग सांसदों के निधन के बाद उपचुनाव कराए जा रहे हैं.

जबकि आयोग ने गोरखपुर, फूलपुर के अलावा बिहार के अररिया और जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर तारीखों का ऐलान नहीं किया.

इसी साल मार्च में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने सितंबर में गोरखपुर से संसदीय सीट छोड़ी थी जबकि कैशव प्रसाद मौर्य ने उपमुख्यमंत्री बनने के बाद फूलपुर सीट से इस्तीफा दिया.

वहीं अनंतनाग सीट जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के लोकसभा सीट छोड़ने के बाद खाली हुई थी. यह सीट 4 जुलाई, 2016 से ही खाली चल रही है. सुरक्षा कारणों से यहां पर उपचुनाव नहीं कराए जा सके हैं. दूसरी ओर, बिहार के अररिया सीट से राष्ट्रीय जनता दल के सांसद रहे मोहम्मद तस्लीमुद्दीन के निधन के बाद से यह सीट खाली है और यहां उपचुनाव कराए जाने हैं. 

गोरखपुर में उपचुनाव में देरी क्यों?

गोरखपुर और फूलपुर संसदीय क्षेत्र के उपचुनाव के तारीखों के ऐलान नहीं होने पर सवाल उठना लाजिमी है. इससे पहले आयोग ने जब हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए चुनाव की तारीखों का ऐलान किया, लेकिन गुजरात का नहीं किया था. इसकी विपक्षी दलों ने तीखी आलोचना की और गंभीर सवाल उठाए थे.

अब यही हालात यूपी के इन 2 बहुचर्चित सीटों पर उपचुनाव को लेकर भी बने हैं. जिन 3 सीटों पर उपचुनाव के तारीखों का ऐलान हुआ है वहां 29 जनवरी को मतदान होगा जबकि 1 फरवरी को फैसला आ जाएगा. दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से जारी सूचना के मुताबिक गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा के खाली पड़ी सीटों पर 22 मार्च से पहले उपचुनाव हो जाने चाहिए. ऐसे में इन अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है.

कहा यह भी जा रहा है केंद्र में सत्तारुढ़ भाजपा के लिए इन दोनों सीटों पर योग्य उम्मीदवारों की तलाश अभी जारी है, दोनों सीट पार्टी के लिए बेहद अहम है, लेकिन बदलते हालात में उसके पास सीट बचाने के लिए कड़ी चुनौती मिलती दिख रही है. ऐसे में इन जगहों पर उपचुनाव के तारीखों के ऐलान में देरी हो रही है.

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