Electric वाहनों पर सरकार ने लिया बड़ा फैसला, सड़क पर नजर आएंगे एकदम अलग

मोदी सरकार ने बैटरी से चलने वाले वाहनों की पहचान के लिए एक अलग व्‍यवस्‍था की है. बैटरी से चलने वाले सभी वाहनों पर हरी नंबर प्लेट होगी. इस नंबर प्लेट पर अंक या पंजीकरण संख्या विभिन्न श्रेणियों के आधार पर पीले और सफेद रंग में अंकित होगी. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बयान में कहा कि सभी बैटरी चालित वाहनों के लिए हरी नंबर प्लेट अनिवार्य होगी. मोदी सरकार ने बैटरी से चलने वाले वाहनों की पहचान के लिए एक अलग व्‍यवस्‍था की है. बैटरी से चलने वाले सभी वाहनों पर हरी नंबर प्लेट होगी. इस नंबर प्लेट पर अंक या पंजीकरण संख्या विभिन्न श्रेणियों के आधार पर पीले और सफेद रंग में अंकित होगी. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बयान में कहा कि सभी बैटरी चालित वाहनों के लिए हरी नंबर प्लेट अनिवार्य होगी.   हरी नंबर प्‍लेट पर पीले रंग से लिखा होगा नंबर परिवहन वाहनों में हरी नंबर प्लेट पर पंजीकरण संख्या पीले रंग में अंकित होगी. वहीं अन्य सभी श्रेणी के बैटरी वाहनों पर पंजीकरण नंबर हरी नंबर प्लेट पर सफेद रंग में लिखी होगी. इस बारे में अधिसूचना जारी हो गई है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस बारे में केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधनों को अधिसूचित किया है. इस पर आपत्तियां और सुझाव पिछली मई को आमंत्रित किए गए थे.   यह भी पढ़ें : ई-रिक्शा में बैटरी की झंझट खत्म, अब 10 घंटे की जगह सिर्फ 4 मिनट में फुल होगी बैटरी   वाहनों की आसानी से हो सकेगी पहचान सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इससे पहले कहा था कि इसके पीछे मकसद वाहनों की आसानी से पहचान करना है. इससे उन्हें पार्किंग में प्राथमिकता मिलेगी और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में आसानी से प्रवेश मिलेगा. इसके अलावा इससे उन्हें कई अन्य लाभ मसलन टोल में रियायत आदि भी प्राप्त हो सकेगी.  राज्य परिवहन निगमों के लिए तय होगा लक्ष्य जुलाई में केंद्र सरकार ने राज्य परिवहन निगमों के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का लक्ष्य तय करने की योजना बनाई थी. नीति आयोग के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा था कि प्रत्येक राज्य परिवहन निगमों को अपने बेड़े में शामिल करने वाले नये वाहनों में एक निश्चित प्रतिशत में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने होंगे. अधिकारी ने कहा कि जहां तक निजी वाहनों का सवाल है, आयोग का मानना है कि यह बाजार मांग पर छोड़ दिया जाना चाहिए कि लोग इलेक्ट्रिक कार खरीदना चाहते हैं या डीजल-पेट्रोल कार खरीदना चाहते हैं.  कॉर्बन उत्सर्जन कम होना चाहिए अधिकारी ने कहा था कि हम सभी राज्यों से कहेंगे कि उनका कॉर्बन उत्सर्जन कम होना चाहिए. हम राज्यों के परिवहन निगमों को अपने नए आर्डरों में एक निश्चित प्रतिशत में इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद का लक्ष्य देने पर विचार कर रहे हैं. अधिकारी ने साफ किया कि हमें इलेक्ट्रिक वाहनों पर नीति की जरूरत नहीं है बल्कि इसके लिये व्यवहारिक बदलाव लाने की जरूरत है.

हरी नंबर प्‍लेट पर पीले रंग से लिखा होगा नंबर
परिवहन वाहनों में हरी नंबर प्लेट पर पंजीकरण संख्या पीले रंग में अंकित होगी. वहीं अन्य सभी श्रेणी के बैटरी वाहनों पर पंजीकरण नंबर हरी नंबर प्लेट पर सफेद रंग में लिखी होगी. इस बारे में अधिसूचना जारी हो गई है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस बारे में केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधनों को अधिसूचित किया है. इस पर आपत्तियां और सुझाव पिछली मई को आमंत्रित किए गए थे. 

वाहनों की आसानी से हो सकेगी पहचान
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इससे पहले कहा था कि इसके पीछे मकसद वाहनों की आसानी से पहचान करना है. इससे उन्हें पार्किंग में प्राथमिकता मिलेगी और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में आसानी से प्रवेश मिलेगा. इसके अलावा इससे उन्हें कई अन्य लाभ मसलन टोल में रियायत आदि भी प्राप्त हो सकेगी.

राज्य परिवहन निगमों के लिए तय होगा लक्ष्य
जुलाई में केंद्र सरकार ने राज्य परिवहन निगमों के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का लक्ष्य तय करने की योजना बनाई थी. नीति आयोग के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा था कि प्रत्येक राज्य परिवहन निगमों को अपने बेड़े में शामिल करने वाले नये वाहनों में एक निश्चित प्रतिशत में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने होंगे. अधिकारी ने कहा कि जहां तक निजी वाहनों का सवाल है, आयोग का मानना है कि यह बाजार मांग पर छोड़ दिया जाना चाहिए कि लोग इलेक्ट्रिक कार खरीदना चाहते हैं या डीजल-पेट्रोल कार खरीदना चाहते हैं.

कॉर्बन उत्सर्जन कम होना चाहिए
अधिकारी ने कहा था कि हम सभी राज्यों से कहेंगे कि उनका कॉर्बन उत्सर्जन कम होना चाहिए. हम राज्यों के परिवहन निगमों को अपने नए आर्डरों में एक निश्चित प्रतिशत में इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद का लक्ष्य देने पर विचार कर रहे हैं. अधिकारी ने साफ किया कि हमें इलेक्ट्रिक वाहनों पर नीति की जरूरत नहीं है बल्कि इसके लिये व्यवहारिक बदलाव लाने की जरूरत है.

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