Exclusive: निराना को कैराना बनाने की कोशिश नाकाम, जानिए कैसे ?

लखनऊ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद के निराना गांव में हिंदू-मुस्लिम को लेकर फैलाये जा रहे तनाव की खबर पूरी तरह झूठी निकली। यह झूठ खुद मुजफ्फरनगर के एसपी सिटी ओमवीर सिंह ने अपनी जांच में पाया। जांच के दौरान दोनों समुदाय के बीच किसी तरह के तनाव की बात नहीं मिली। गांव के रहने वाले एक व्यक्ति ने अपने समुदाय की भावनाओं को अपने पक्ष में करने और माहौल को बिगाडऩे के लिए मकान बिकाऊ होने की बात लिखवायी थी।


एसपी सिटी ओमवीर सिंह ने बताया कि जिस तरह न्यूज चैनल और कुछ अखबारों में निराना गांव मेें हिंदू समाज के लोगों के पलायन की खबर दिखायी और छापी गयी वह पूरी तरह असत्य है। उन्होंने बताया कि इस प्रकरण में उनको जांच के आदेश मिले थे। वह खुद गांव पहुंचे और दोनों समुदाय के लोगों से बातचीत की।

दर्जनों लोगों से बातचीत के बाद इस बात का पता चला कि दोनों समुदाय के बीच किसी तरह का कोई मतभेद नहीं है। उन्होंने बताया कि गांव के रहने वाले प्रदीप नाम के एक युवक ने प्रधानी चुनाव की रंजिश और अपने समुदाय के लोगों की भावनाओं को अपने पक्ष में करने के लिए अपने जानने वाले कुछ लोगों के मकान पर मकान बिकाऊ होने की बात लिखवाकर सनसनी फैलाने की कोशिश की थी।

उन्होंने आगे बताया कि 29 जून को गांव के रहने वाले इन्द्रसिंह की बेटी की शादी के दौरान पाल समाज के अयज कुमार और मुस्लिम पक्ष के शहजाद व उसके साथियों के बीच झगड़ा हुआ था। गांव के ही बड़े बुजुर्गो ने इस झगड़े को आपस में मिल-बैठ कर हल करने की बात कही थी। चार दिन के बाद भी दोनों पक्षों के बीच कोई नतीजा नहीं निकला तो 30 जून को इस मामले में शहजाद सहित 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी।

इस मामले में अब तक पुलिस ने शहजाद सहित चार लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया है, जबकि अन्य की तलाश में पुलिस जुटी है। उन्होंने बताया कि जांच में पाल समुदाय के पलयान जैसी कोई बात निकल कर सामने नहीं आयी है। इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए मंगलवार को एसएसपी अनंत देव और डीएम खुद गांव पहुंचे। उन्होंने दोनों समुदाय के लोगों से मिलकर बातचीत भी की। उन्होंने बताया कि अखबार व चैनलों में छपी और दिखायी गयी खबर निराधार हैं और गांव मेें पूरी तरह हालात सामान्य हैं।

कैराना बनाने की कोशिश की गयी
मुजफ्फरनगर जनपद से जुड़े पुलिस के अधिकारी बताते हैं कि हमेशा से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गांव में इस तरह के छोटे-मोटे झगड़े होते रहते हैं। इन झगड़ों में पुलिस की कार्रवाई से पहले गांव के संभ्रांत लोग बीच में पड़कर आपस में ही बैठकर मामले को सुलझा देते हैं। अगर बातचीत से हल नहीं निकलता है तो फिर मामला पुलिस तक पहुंचता है। निराना गांव में भी ऐसा ही हुआ। कुछ समय पहले पश्चिमी उत्तर के शामली जनपद में कैराना गांव में भी इस तरह हिंदु समाज के पलयान का मुद्दा उठाया गया था।

कहीं धु्रवीकरण की राजनीति तो नहीं?
वहीं दूसरी तरफ निराना गांव में पाल समुदाय के पलायन की अफवाह इस बात की तरफ भी इशारा कर रही है कि कुछ लोग धु्रवीकरण की राजनीति को अपना हथियार बनाकर लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करना चाहते हैं। जानकार बताते हैं कि जैसे-जैसे वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव करीब आता जायेगा, वैसे-वैसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस तरह की घटनाएं सुनने को मिलती रहेंगी। जरूरत इस बात की है कि इस तरह झूठी अफवाह फैलाने वालों पर पुलिस व प्रशासन भी कड़ी कार्रवाई करे।

एसएसपी का कहना है झगड़े को बनाया गया हथियार
मुजफ्फरनगर के एसएसपी अनंत देव का कहना है कि निराना गांव में पलायन जैसी कोई बात नहीं है। यह बात सच है कि 29 जून को पाल समुदाय और मुस्लिम समुदाय के युवकों के बीच बारात में झगड़ा हुआ था। उसी एफआईआर दर्ज है और कानूनी कार्रवाई भी की गयी है।

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