GST से पहले करोड़ों की हुई शॉपिंग, बाइक-कार से लेकर जमकर लैपटॉप की भारी पड़ी भीड़..

जीएसटी लागू होने से पहले सस्ता पाने की होड़ में देर रात तक मॉल और शोरूम में खरीदारों की भारी भीड़ लगी रही। कारोबारियों ने भी पुराना स्टॉक खपाने की कवायद में 50 फीसदी तक की छूट रेडीमेड कपड़ों पर दी। इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल उपकरणों के शोरूम पर भी दोपहर से शाम तक खरीदारों का तांता लगा रहा। शुक्रवार को रेडीमेड कपड़ों का सात करोड़ रुपये का कारोबार हुआ, जो आम दिनों की तुलना में दो करोड़ रुपये ज्यादा था।GST से पहले करोड़ों की हुई शॉपिंग, बाइक-कार से लेकर जमकर लैपटॉप की भारी पड़ी भीड़..

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रेडीमेड कारोबारियों का कहना है कि शुक्रवार को ब्रांडेड कंपनी ब्लैक बेरी, लिवाइस, मुफ्ती, कलर प्लस, इंडियन टैरर्न एवं यूएस पोलो के रेडीमेड पर 30 से 40 फीसदी तक की छूट दी गई। जबकि ब्लैकबेरी और पेपे कंपनी की दो जींस खरीदने पर एक फ्री दी जा रही थी।

उन्होंने बताया कि जीएसटी लागू होने से पहले स्टॉक करने के लिए यह छूट चली तो देर रात तक  खरीदारों से शोरूम की रौनक बरकरार रही। गौरतलब है कि जीएसटी में रेडीमेड पर 12 फीसदी टैक्स हो गया है। जबकि वर्तमान में वैट एवं एक्साइज लगाकर नौ फीसदी का टैक्स है। सहारागंज, फन सहित सभी शोरूम पर रेडीमेड पर 20 से 50 फीसदी की छूट दी गई, जिससे अन्य दिनों के सापेक्ष शुक्रवार को अच्छा कारोबार यानी करीब सात करोड़ रुपये के रेडीमेड बिके।

इलेक्ट्रॉनिक्स की कुछ वस्तुएं जीएसटी में 28 फीसदी के दायरे में आने के कारण शुक्रवार को दोपहर में खरीदार लैपटॉप सहित अन्य उपकरण की खरीद के लिए उमड़े। कारोबारियों ने बताया कि लैपटॉप, कंप्यूटर, सीपीयू और एसेसरीज की खूब बिक्री हुई। अनुमान है कि शुक्रवार को एक करोड़ के लैपटॉप बिक गए। उधर कारोबारी सतपाल मीत ने बताया कि इलेक्ट्रिकल उपकरण पर जीएसटी में 28 फीसदी टैक्स तय हुआ है। जबकि पहले 14.5 फीसदी वैट एवं 12.5 फीसदी एक्साइज थी। 

 जीएसटी ने रोक दी फिल्मों की एडवांस बुकिंग
जहां मनोरंजन के दीवाने वीकेंड का बेसब्री से इंतजार करते हैं लेकिन शुक्रवार को फिल्मों की एडवांस बुकिंग करने वाले सिनेप्रेमियों को मायूसी से सामना करना पड़ा। शुक्रवार को जीएसटी के कारण ऑनलाइन एडवांस बुकिंग बंद रही और काउंटर पर भी आगे के टिकटों पर रोक लगी रही। सिनेमाघरों ने शनिवार से जीएसटी के लागू होने पर टिकटों के दाम स्पष्ट न होने के कारण यह कदम उठाया है। शुक्रवार को ‘ट्रांसफार्मर’ जैसी फिल्म प्रदर्शित हुई है। इसके साथ ही ‘एक हसीना थी, एक दीवाना था’ फिल्म भी सिनेमाघरों में लगी जबकि सलमान खान की फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ भी चल रही है।  इन फिल्मों की अग्रिम बुकिंग कराने शुक्रवार को आए लोगों को निराशा हाथ लगी। आनलाइन बुकिंग भी बंद रही। ऐसे में सिने प्रेमी काफी परेशान देखे गए।

फन सिनेमा में पहुंचे सतीश मिश्रा ने बताया कि मैं अपने साथियों के साथ सप्ताहान्त में फिल्म देखने का कार्यक्रम बना रहा हूं। मुझे लगा कि जीएसटी से टिकट की दरें भी प्रभावित होंगी तो एडवांस बुक कर लें। ऑनलाइन नहीं हो पाया तो काउंटर तक आया लेकिन यहां भी टिकट नहीं मिल पाया। कर्र्मचारियों का कहना है कि टिकट कल ही मिलेगा। यही हाल वेव सिनेमा में पहुंचे मनोज शर्मा का भी था। नगर के किसी भी मल्टीप्लेक्स और छविगृह में अग्रिम बुकिंग नहीं की जा रही थी।

कार-बाइक बाजार में भी बूम
चारों तरफ जीएसटी के शोर के बीच राजधानी के लोगों ने शुक्रवार को एक ही दिन में 50 प्रतिशत अधिक वाहनों की खरीद कर डाली। आम दिनों में बिकने वाले वाहनों की संख्या 350 के आसपास रहती है, जबकि शनिवार को यह आंकड़ा 500 से ऊपर पहुंच गया। इसमें से करीब 150 कारें हैं। आमतौर पर यह बिक्री 100 के आसपास ही रहती है। इसके अलावा 250 बाइक की तुलना में 350 बाइक की बिक्री हुई। फैजाबाद रोड टाटा के शोरूम के सेल्स एग्जीक्यूटिव अमित सिंह ने बताया कि आम दिनों की तुलना में 50 प्रतिशत अधिक सेल हुई है। इसके लिए कंपनी ने प्री-जीएसटी ऑफर के चलते मुनाफा भी दिया

वहीं हुंडई मोटर्स की गाड़ियों पर भी 60,000 रुपये तक के लालच में लोग कारें खरीदने पहुंचे। मारुति की गाड़ियों में भी यही असर देखने को मिला। सन मोटर्स पर हीरो की बाइक खरीदने के लिए भीड़ रहीं। सेल्स मैनेजर एनके शर्मा ने बताया कि जीएसटी की वजह से बाइक महंगी होने के डर से ग्राहकों में जल्दबाजी दिखी। हकीकत जबकि इसके उलट है। कंपनी ने भी प्री-जीएसटी में ग्राहकों ऑफर देकर बिक्री की।
 विशेषज्ञों का कहना, जीएसटी से सस्ते होंगे वाहन
चार्टर्ड एकाउंटेंट संदीप भटनागर का कहना है कि जीएसटी से वाहनों के महंगे होने की बात गलत है। असल में ऑटोमोबाइल सेक्टर में 1.5 से लेकर 12.5 प्रतिशत तक की कमी जीएसटी की वजह से आ रही है। छोटी कारों और बाइकों में यह कमी ज्यादा है। वहीं एसयूवी और लग्जरी कारों में यह कमी कम है।  कॉमर्शियल वाहनों में भी जीएसटी पूर्व के टैक्स 30.2 की तुलना में 28 फीसदी ही रह गया है। असल में ऑटोमोबाइल कंपनियां झूठी अफवाह फै लाकर मुनाफा कमाना चाहती हैं। यही वजह है कि केंद्र सरकार को जीएसटी के साथ एंटी प्रोफीटियरिंग रूल्स भी लाने पड़े हैं।

 

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