IPL2018: 22 गज की पिच का हर रहस्य क्रिकेट प्रेमियों के लिए

IPL2018  का खुमार हर क्रिकेट प्रेमी के सर चढ़ कर बोल रहा है. क्रिकेट का खेल 22 गज की एक पट्टी पर खेला जाता जो मैदान के बीचों बीच स्थित होती है. इसे ही पिच कहा जाता है. तो आज जानिए क्रिकेट पिच के बारे में वो सब जो आप जानना चाहते है .IPL2018  का खुमार हर क्रिकेट प्रेमी के सर चढ़ कर बोल रहा है. क्रिकेट का खेल 22 गज की एक पट्टी पर खेला जाता जो मैदान के बीचों बीच स्थित होती है. इसे ही पिच कहा जाता है. तो आज जानिए क्रिकेट पिच के बारे में वो सब जो आप जानना चाहते है .   -मैदान के बीच में स्टम्प से स्टम्प के बीच की दुरी 66 बॉय 10 फीट की जगह का चुनाव क्रिकेट की पिच के लिए किया जाता है -इस पर लगी घास की बार-बार कटाई की जाती है -पिच दो तरह की होती हैं, प्राकृतिक पिच और कृत्रिम पिच -शौकिया क्रिकेट के लिए कृत्रिम पिच का इस्तेमाल किया जाता है -कृत्रिम पिच को कांक्रीट की स्लैब पर जूट की चटाई औऱ नकली घास को बिछाकर तैयार किया जाता है -इसका इस्तेमाल अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में बिलकुल नहीं किया जाता है -क्रिकेट की पिच के लिए अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में बेहद सख्त नियम हैं -क्रिकेट की अधिकांश पिच व्यवहारिक रुप से नार्थ-साउथ दिशा की और बनाई जाती है ताकि सूर्य की तीखी किरणें बैट्समेन के लिए परेशानी न बन सके   -पिच में दो स्टंप्स के बीच की जगह को प्रोटेक्टेड एरिया कहा जाता है इसे पूरी तरह से सपाट औऱ समतल बनाया जाता है -अतंराष्ट्रीय क्रिकेट में पिच को 'नेचुरल तरीके' से बनाया जाता है, इसलिए पिच पर मौसम का असर बहुत ज्यादा होता है -यदि पिच गीली हो गई है तो वह 'फॉस्ट बॉलर' को सपोर्ट करेगी - पिच में दरार आ गई है तो वह जरूरत से ज्यादा सूखी है तो 'स्पिनर' को मदद मिलेगी -अचानक बारिश हो गई हो तो 'हॉग मशीन' की मदद से पिच और मैदान को सुखाया जाता है   -पिच की घास मैदान की तुलना में बेहद छोटी रखी जाती है  -पिच के उपर से व्यर्थ धूल को हटाने के लिए पिच स्वीपिंग की जाती है -पिच पर रोलर घुमाने से पिच औऱ अधिक सपाट हो जाती है इसे पिच रोलिंग कहते है    कैसे बनती है पिच: 1- खुदाई:  जगह का चुनाव होने के बाद मैदान में 12 से 13 इंच की खुदाई की जाती है.     2- स्लोप: खुदाई के बाद ईट का चूरा डालकर स्लोप बनाया जाता है. फिर ड्रेनेज लाइन डाली जाती है. जिससे एकाएक बारिश के समय पिच पर पानी ना भरे.  3- रेत और मिट्टी और ईट की टुकड़े: पिच पर ड्रेनेज लाइन डालने के बाद फिर चार इंच ईट का चूरा डाला जाता है, इसमें फिर रेत डाली जाती है. रेत के मुकाबले 10 प्रतिशत मिट्टी डाली जाती है. 90 प्रतिशत रेत और ईट के चूरे के हिसाब से पिच में 10 प्रतिशत मिट्टी का उपयोग होता है   4- लेबल की जांच: चूंकि बैट्समैन रनिंग बिटवीन स्टंप लेता है और बॉलर पिच पर ही गेंदबाजी करता है, इसलिए रेत और मिट्टी डालने की प्रकिया में बार-बार लेवल चैक करते हैं.   5- प्लेटिंग करना: रेत और मिट्टी डालने के बाद प्लेट को वायब्रेट करके कॉम्पेक्ट करते हैं. जिससे प्लेटिंग पूरी तरह से समतल हो सके  6- पिच और घास: रेत औऱ मिट्टी, ईट का चूरा  डालने के बाद फिर से पिच पर काली मिट्टी डालकर लेयर बनाई जाती है. जब दो इंच की जगह बचती है तो उसपर घास उगाई जाती है  तो इस तरह बनती है क्रिकेट की पिच जिस पर गेंदबाज और बल्लेबाज अपना जोहर दिखते है और आप और हम उसका मजा लुटते है.

-मैदान के बीच में स्टम्प से स्टम्प के बीच की दुरी 66 बॉय 10 फीट की जगह का चुनाव क्रिकेट की पिच के लिए किया जाता है
-इस पर लगी घास की बार-बार कटाई की जाती है
-पिच दो तरह की होती हैं, प्राकृतिक पिच और कृत्रिम पिच
-शौकिया क्रिकेट के लिए कृत्रिम पिच का इस्तेमाल किया जाता है
-कृत्रिम पिच को कांक्रीट की स्लैब पर जूट की चटाई औऱ नकली घास को बिछाकर तैयार किया जाता है
-इसका इस्तेमाल अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में बिलकुल नहीं किया जाता है
-क्रिकेट की पिच के लिए अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में बेहद सख्त नियम हैं
-क्रिकेट की अधिकांश पिच व्यवहारिक रुप से नार्थ-साउथ दिशा की और बनाई जाती है ताकि सूर्य की तीखी किरणें बैट्समेन के लिए परेशानी न बन सके  
-पिच में दो स्टंप्स के बीच की जगह को प्रोटेक्टेड एरिया कहा जाता है इसे पूरी तरह से सपाट औऱ समतल बनाया जाता है
-अतंराष्ट्रीय क्रिकेट में पिच को ‘नेचुरल तरीके’ से बनाया जाता है, इसलिए पिच पर मौसम का असर बहुत ज्यादा होता है
-यदि पिच गीली हो गई है तो वह ‘फॉस्ट बॉलर’ को सपोर्ट करेगी
– पिच में दरार आ गई है तो वह जरूरत से ज्यादा सूखी है तो ‘स्पिनर’ को मदद मिलेगी
-अचानक बारिश हो गई हो तो ‘हॉग मशीन’ की मदद से पिच और मैदान को सुखाया जाता है 

-पिच की घास मैदान की तुलना में बेहद छोटी रखी जाती है 
-पिच के उपर से व्यर्थ धूल को हटाने के लिए पिच स्वीपिंग की जाती है
-पिच पर रोलर घुमाने से पिच औऱ अधिक सपाट हो जाती है इसे पिच रोलिंग कहते है

कैसे बनती है पिच:
1- खुदाई:  जगह का चुनाव होने के बाद मैदान में 12 से 13 इंच की खुदाई की जाती है.

2- स्लोप: खुदाई के बाद ईट का चूरा डालकर स्लोप बनाया जाता है. फिर ड्रेनेज लाइन डाली जाती है. जिससे एकाएक बारिश के समय पिच पर पानी ना भरे.

3- रेत और मिट्टी और ईट की टुकड़े: पिच पर ड्रेनेज लाइन डालने के बाद फिर चार इंच ईट का चूरा डाला जाता है, इसमें फिर रेत डाली जाती है. रेत के मुकाबले 10 प्रतिशत मिट्टी डाली जाती है. 90 प्रतिशत रेत और ईट के चूरे के हिसाब से पिच में 10 प्रतिशत मिट्टी का उपयोग होता है 

4- लेबल की जांच: चूंकि बैट्समैन रनिंग बिटवीन स्टंप लेता है और बॉलर पिच पर ही गेंदबाजी करता है, इसलिए रेत और मिट्टी डालने की प्रकिया में बार-बार लेवल चैक करते हैं. 

5- प्लेटिंग करना: रेत और मिट्टी डालने के बाद प्लेट को वायब्रेट करके कॉम्पेक्ट करते हैं. जिससे प्लेटिंग पूरी तरह से समतल हो सके

6- पिच और घास: रेत औऱ मिट्टी, ईट का चूरा  डालने के बाद फिर से पिच पर काली मिट्टी डालकर लेयर बनाई जाती है. जब दो इंच की जगह बचती है तो उसपर घास उगाई जाती है

तो इस तरह बनती है क्रिकेट की पिच जिस पर गेंदबाज और बल्लेबाज अपना जोहर दिखते है और आप और हम उसका मजा लुटते है. 

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