J&K: इश्क में नाकाम हुए तो मजनूं मियां बन गए पत्थरबाज…

इश्क में नाकाम रहे तो मजनूं मियां ने खुदकुशी का फैसला कर लिया। लेकिन किसी ने उसे सलाह दी कि इस्लाम में खुदकुशी गुनाह है। यह गुनाह किया तो जहन्नुम मिलेगा। अच्छा है कि सुरक्षा बलों के बंकर पर पत्थर फेंको, जवाबी कार्रवाई में शहीद हो जाओगे तो जन्नत मिलेगी।J&K: इश्क में नाकाम हुए तो मजनूं मियां बन गए पत्थरबाज...तब से मजनूं साहब सेना के बंकर पर पत्थर फेंकने लगे। जब गिरफ्तार हुए तो ये बात उसने खुद पुलिस के सामने कबूल की।घाटी में युवाओं को अलगाववादी किस कदर भड़का रहे हैं इसका दिलचस्प किस्सा सोमवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सुनने को मिला।
इस मसले पर विधानसभा में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती व पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भिड़ गए। दरअसल विधानसभा में शोपियां में फायरिंग में दो युवकों के मारे जाने पर विपक्ष के काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा चल रही थी। चर्चा में जवाब देते हुए मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने उमर के बयान का उदाहरण देते हुए कहा कि उमर ने पहले कहा था कि बंकरों पर पथराव आत्महत्या के समान है।

लाशों पर सियासत मुझे नहीं आतीः उमर

 इस पर सदन में मौजूद उमर ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि मैं सीएम के जवाब के बीच में नहीं उठता अगर मेरा नाम नहीं लिया गया होता। उन्होंने कहा कि मुझे लाशों पर सियासत करनी नहीं आती। सीएम लाशों पर सियासत करती हैं।

उमर ने कहा कि उन्होंने सुसाइड और बंकर की बात किसी अन्य संदर्भ में कही थी। फिर उमर ने इस घटना के बारे में सदन को विस्तार से जानकारी दी। हालांकि, मुख्यमंत्री ने इस जवाब पर कोई प्रतिरोध नहीं किया।

उन्होंने उमर का नाम लिए बगैर सिर्फ इतना कहा कि पता नहीं सच्चाई से क्यों भागते हैं। कभी एक बात फिर कभी दूसरी बात। इसके बाद उन्होंने शोपियां प्रकरण को लेकर सदन को सरकार की तरफ से की गई कार्रवाई की जानकारी दी।

इस किस्से से ये जरूर जाहिर हो गया कि पत्थरबाजी केवल सेना तथा सुरक्षा बलों के खिलाफ कथित नाराजगी का ही नतीजा नहीं है, बल्कि युवाओं को छोटी-छोटी बातों पर अलगावदी गुमराह कर सुरक्षा बलों पर पत्थर बरसवाते हैं। 

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