KAIRANA BYPOLL: इन मुद्दों पर कैराना में चल रहा है सियासी मुकाबला

कर्नाटक के रोमांचक चुनाव के बाद अब उत्तरप्रदेश की कैराना संसदीय क्षेत्र का उपचुनाव बीजेपी और विपक्षी पार्टियों के लिए इज्जत का विषय बना हुआ है. 2019 लोकसभा चुनाव का फाइनल माना जाने वाला कैराना लोकसभा उपचुनाव बीजेपी और महागठबंधन के बीच है जो 28 मई से होगा, जिसमें दोनों उम्मीदवार महिलाऐं है.  आइये आपको बताते है किन मुद्दों पर पार्टियां कर रही है प्रचार. कर्नाटक के रोमांचक चुनाव के बाद अब उत्तरप्रदेश की कैराना संसदीय क्षेत्र का उपचुनाव बीजेपी और विपक्षी पार्टियों के लिए इज्जत का विषय बना हुआ है. 2019 लोकसभा चुनाव का फाइनल माना जाने वाला कैराना लोकसभा उपचुनाव बीजेपी और महागठबंधन के बीच है जो 28 मई से होगा, जिसमें दोनों उम्मीदवार महिलाऐं है.  आइये आपको बताते है किन मुद्दों पर पार्टियां कर रही है प्रचार.   कैराना उपचुनाव में बीजेपी के पूर्व स्वर्गीय हुकुम सिंह ने हिन्दुओं के पलायन का मुद्दा उठाया था जो अभी भी बीजेपी के लिए मुख्य मुद्दा बना हुआ है वहीं महागठबंधन में आरएलडी और बाकी पार्टियां यहाँ पर गन्ने की खेती का मुद्दा उठा रही है, बता दें, यहाँ पर गन्ना किसानों की तादात काफी ज्यादा है जो चुनाव को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकती है यही कारण है कि बीजेपी ने यहाँ पर गन्ना मंत्री को भी चुनाव प्रचार में लगा रखा है.   80% के करीब मुस्लिम आबादी और 19% के करीब हिन्दू आबादी वाले इस क्षेत्र में यह चुनाव रमजान के रोज़ों और तपती गर्मी में दोनों पार्टियों के लिए कड़ी चुनौती बना है. सभाओं में कम भीड़ से सभी पार्टियों ने यहाँ पर जमीनी स्तर पर लोगों से मिलने के साथ गाँव-गाँव छोटी-छोटी सभाएं की. कैराना में 28 मई से चुनाव है, अब देखने वाली बात यह होगी कि इस चुनाव में जनता का मूड क्या है, और किस पार्टी को यहाँ पर जश्न मनाने का मौका मिलेगा.

कैराना उपचुनाव में बीजेपी के पूर्व स्वर्गीय हुकुम सिंह ने हिन्दुओं के पलायन का मुद्दा उठाया था जो अभी भी बीजेपी के लिए मुख्य मुद्दा बना हुआ है वहीं महागठबंधन में आरएलडी और बाकी पार्टियां यहाँ पर गन्ने की खेती का मुद्दा उठा रही है, बता दें, यहाँ पर गन्ना किसानों की तादात काफी ज्यादा है जो चुनाव को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकती है यही कारण है कि बीजेपी ने यहाँ पर गन्ना मंत्री को भी चुनाव प्रचार में लगा रखा है. 

80% के करीब मुस्लिम आबादी और 19% के करीब हिन्दू आबादी वाले इस क्षेत्र में यह चुनाव रमजान के रोज़ों और तपती गर्मी में दोनों पार्टियों के लिए कड़ी चुनौती बना है. सभाओं में कम भीड़ से सभी पार्टियों ने यहाँ पर जमीनी स्तर पर लोगों से मिलने के साथ गाँव-गाँव छोटी-छोटी सभाएं की. कैराना में 28 मई से चुनाव है, अब देखने वाली बात यह होगी कि इस चुनाव में जनता का मूड क्या है, और किस पार्टी को यहाँ पर जश्न मनाने का मौका मिलेगा. 

 

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